दो घंटे चली बैठक के बाद MP सरकार ने 60% तक खरीदी, स्लॉट बुकिंग, उपार्जन अवधि बढ़ाई
Pawan Modiya | Jul 29, 2026, 22:23 IST
किसान आंदोलन
एमपी में मूंग खरीदी को लेकर जारी किसान आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने पात्र किसानों से 60 प्रतिशत तक खरीदी, स्लॉट बुकिंग, उपार्जन अवधि बढ़ाने का फैसला किया। इसी दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर केंद्र का पक्ष भी रखा।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसान आंदोलन जारी है।
- सरकार ने पात्र किसानों से 60 प्रतिशत खरीदी का फैसला किया।
- स्लॉट बुकिंग और खरीदी अवधि भी बढ़ाई गई।
- ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित कर दी गई।
- इसी बीच केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा।
राज्य सरकार ने किसानों को दी बड़ी राहत
राज्य सरकार ने पात्र किसानों से मूंग उपज का 60 प्रतिशत तक उपार्जन करने का फैसला लिया है। सरकार के मुताबिक यह नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में औसतन करीब तीन क्विंटल प्रति एकड़ के बराबर है। हालांकि, आंदोलन कर रहे किसान इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रति एकड़ केवल तीन क्विंटल मूंग की खरीदी उनकी वास्तविक पैदावार के मुकाबले काफी कम है।
किसानों का दावा है कि उनकी उपज इससे कहीं अधिक होती है। ऐसे में बड़ी मात्रा में फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं बिक पाएगी। इसी मांग को लेकर बुधवार को बड़ी संख्या में किसान भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर जुटे। यहां से उन्होंने मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच शुरू कर दिया। किसानों की मांग है कि प्रति एकड़ खरीदी की सीमा बढ़ाई जाए और सभी पात्र किसानों की पूरी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए। आंदोलन के चलते प्रशासन भी अलर्ट रहा और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।
किसान नेताओं का कहना है कि जब तक खरीदी की शर्तों में व्यावहारिक बदलाव नहीं होगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं सरकार का कहना है कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए गए हैं और अधिक से अधिक किसानों को राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।
स्लॉट बुकिंग को बढ़ाया
इसके साथ ही उपार्जन की अंतिम तिथि भी आगे बढ़ा दी गई है। पहले खरीदी 10 अगस्त तक होनी थी। अब यह प्रक्रिया 20 अगस्त तक चलेगी। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त समय मिलने से ज्यादा किसानों की फसल खरीदी जा सकेगी।
ई-टोकन व्यवस्था पर भी निर्णय
इन्हीं शिकायतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का फैसला किया है। यह समिति ई-टोकन व्यवस्था की समीक्षा करेगी। अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर जरूरी सुधार किए जाएंगे। तब तक ई-टोकन के जरिए खाद वितरण की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दी गई है।
केंद्र सरकार का पक्ष भी सामने आया
पत्र में कहा गया कि केंद्र सरकार पहले ही मध्य प्रदेश को 4,54,580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दे चुकी है। यह देश में किसी भी राज्य को मिली सबसे बड़ी स्वीकृति बताई गई है। पत्र के अनुसार देशभर में स्वीकृत 5,23,243 मीट्रिक टन मूंग खरीदी में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 87 प्रतिशत है।
कृषि मंत्री ने क्या कहा
पत्र में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार किसी राज्य के लिए खरीदी का लक्ष्य तय नहीं करती। खरीदी की स्वीकृति पीएम-आशा (PM-AASHA) योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार दी जाती है। यदि जरूरत पड़ती है तो योजना के नियमों के तहत अतिरिक्त खरीदी की व्यवस्था भी की जा सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए खरीदी प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। इससे किसानों को समय पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में भी मध्य प्रदेश को मूंग खरीदी की सबसे अधिक स्वीकृतियां मिलती रही हैं।
दोनों सरकारों के बयान में क्या समानता
दोनों पक्षों का कहना है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपज बेचने का अवसर मिलना चाहिए। हालांकि किसान संगठनों की मांग है कि खरीदी प्रक्रिया पूरी क्षमता के साथ और बिना किसी परेशानी के पूरी की जाए।
आगे क्या होगा
ई-टोकन व्यवस्था की समीक्षा के लिए बनी समिति भी अपनी रिपोर्ट देगी। उसके बाद सरकार खाद वितरण की नई व्यवस्था पर फैसला ले सकती है।
जरूरी FAQ
सरकार ने पात्र किसानों से मूंग खरीदी की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी है। साथ ही स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 10 अगस्त और उपार्जन की अंतिम तिथि 20 अगस्त कर दी गई है।
शिवराज सिंह चौहान ने पत्र में क्या दावा किया है?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को 4,54,580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की मंजूरी दी है। यह देश में किसी भी राज्य को मिली सबसे बड़ी स्वीकृति बताई गई है। साथ ही खरीदी प्रक्रिया तेज करने का आग्रह भी किया गया है।
ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल क्यों रोकी गई है?
किसानों की शिकायतों और शुरुआती व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने उच्चस्तरीय समिति बनाई है। समिति की सिफारिशें आने तक ई-टोकन के जरिए खाद वितरण की व्यवस्था स्थगित रहेगी।
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