MP Municipal CMO Posting Rule: सीएमओ पद को लेकर सरकार सख्त, नियमों में बदलाव
Manya Jain | Jun 09, 2026, 08:30 IST
MP Municipal CMO Posting Rule
MP में अब बाबुओं के सीएमओ (CMO) बनने पर रोक लगा दी गई है। नगरीय प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर जूनियर कर्मचारियों से प्रभार वापस लेने और सीनियरों को तैनात करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश में अब CMO पद पर केवल वरिष्ठ अधिकारी ही बैठ सकेंगे।
- कनिष्ठ कर्मचारियों को CMO पद पर बैठना अब प्रतिबंधित होगा।
- गलत तरीके से पद पर बैठे कर्मचारियों को तुरंत हटाया जाएगा।
- हटाने में देरी पर उन्हें वित्तीय गड़बड़ी का जिम्मेदार माना जाएगा।
- गाइडलाइन नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा सख्त जारी की गई।
बाबुओं पर लगी रोक, विभाग ने जारी किए निर्देश
अब तक कई नगर पालिकाओं में लोअर डिविजन क्लर्क और सहायक ग्रेड-3 जैसे कनिष्ठ पदों के कर्मचारी सीएमओ का प्रभार संभाल रहे थे। नए निर्देशों के मुताबिक यह व्यवस्था पूरी तरह बंद होगी।
MP Municipal CMO Posting Rule Change
जो बन चुके हैं उन्हें भी हटाया जाएगा
यह कदम नगर निकायों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
इन पदों के अधिकारियों को मिलेगी प्राथमिकता
विशेष परिस्थितियों में केवल सहायक ग्रेड-1 को अवसर दिया जा सकता है। एलडीसी और सहायक ग्रेड-3 को किसी भी स्थिति में पात्र नहीं माना जाएगा।
चरणबद्ध प्रक्रिया से होगी नियुक्ति
अगर जिले में कोई उपयुक्त अधिकारी नहीं मिला तो उसी जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर विचार होगा। इसके बाद भी पद खाली रहा तो पूरे संभाग के पात्र अधिकारियों की सूची से चयन किया जाएगा।
पारदर्शिता बढ़ाना है मकसद
FAQ
- MP में नगर पालिका CMO पद पर कौन नहीं बैठ सकता?
LDC और सहायक ग्रेड-3 जैसे कनिष्ठ पदों के कर्मचारी अब CMO नहीं बन सकेंगे। नगरीय प्रशासन विभाग ने इसे लेकर सख्त गाइडलाइन जारी की है। पहले से ऐसे पदों पर बैठे कर्मचारियों को तुरंत हटाया जाएगा। - CMO का प्रभार किसे दिया जा सकता है?
लेखा अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, कार्यालय अधीक्षक, मुख्य लिपिक और लेखापाल जैसे वरिष्ठ पदों के अधिकारियों को CMO का प्रभार मिल सकता है। विशेष स्थिति में सहायक ग्रेड-1 को भी मौका दिया जा सकता है। - नियम न मानने पर क्या होगा?
अगर अयोग्य कर्मचारी हटाने के बाद भी CMO पद पर बना रहता है तो उसे बड़ी वित्तीय गड़बड़ी का जिम्मेदार माना जाएगा। यह एक गंभीर प्रशासनिक दोष माना जाता है।
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