जनगणना ने रोका MP नगर निकाय चुनाव का रास्ता, 6 महीने टल सकती है वोटिंग
Sumit Kumar | Sept 23, 2026, 19:33 IST
जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया के चलते मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां प्रभावित होने की संभावना है। Photograph: (The Sootr)
MP निकाय चुनाव 2027 में छह महीने की देरी हो सकती है। जनगणना और परिसीमन के कारण वार्डों की सीमाएं और आरक्षण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। ऐसे में 413 नगरीय निकायों के चुनाव की तैयारियां नए सिरे से करनी पड़ सकती हैं।
MP Nikay Chunav 2027: मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव तय समय से आगे बढ़ सकते हैं। जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया के कारण चुनाव में करीब छह महीने देरी होने की संभावना जताई जा रही है।
दरअसल, निकाय चुनाव से पहले वार्डों का परिसीमन और आरक्षण प्रक्रिया पूरी की जाती है। अभी जनगणना का काम चल रहा है। ऐसे में नए आंकड़ों के आधार पर वार्डों की सीमाएं बदल सकती हैं। इसके चलते सरकार मौजूदा व्यवस्था के आधार पर चुनाव कराने की बजाय नई प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर सकती है।
नगरीय निकाय चुनाव में सबसे अहम प्रक्रिया वार्ड परिसीमन की होती है। जनसंख्या के आधार पर वार्डों की सीमाएं तय की जाती हैं। ऐसे में जनगणना पूरी होने के बाद नए आंकड़ों के आधार पर वार्डों का पुनर्गठन किया जा सकता है।
इसके अलावा सरकार ने कई पंचायतों को मिलाकर नई नगर परिषद बनाने की घोषणा भी की है। नए निकायों के गठन और सीमाओं के निर्धारण की प्रक्रिया भी जनगणना पूरी होने के बाद आगे बढ़ सकती है। यही वजह है कि निकाय चुनाव की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।
मध्य प्रदेश में कुल 413 नगरीय निकायों में चुनाव होने हैं। इनमें 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद शामिल हैं। इन चुनावों में महापौर, अध्यक्ष और 7 हजार 679 वार्ड पार्षद पदों के लिए मतदान कराया जाएगा।
इस बार नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव भी सीधे जनता के वोट से कराया जाएगा। इससे पहले अध्यक्षों का चुनाव पार्षदों के माध्यम से होता था।
निकाय चुनाव में एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षण तय किया जाता है। महापौर और अध्यक्ष पदों के आरक्षण की प्रक्रिया नगरीय विकास विभाग की ओर से कराई जाती है।
लेकिन परिसीमन में बदलाव होने के बाद आरक्षण प्रक्रिया भी नए सिरे से करनी पड़ सकती है। इसलिए नगर निकाय चुनाव 2027 का कार्यक्रम जारी होने में देरी हो सकती है।
राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि आरक्षण और परिसीमन की प्रक्रिया सरकार के स्तर पर होती है। आयोग की जिम्मेदारी चुनाव कराने की है। आयोग ने मतदाता सूची अपडेट करने का काम पूरा कर लिया है। पंचायत चुनावों के लिए ईवीएम खरीद का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया है।
अधिकारियों के अनुसार, अगर समय पर ईवीएम उपलब्ध हो जाती हैं तो चुनाव ईवीएम से ही कराए जाएंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार निकाय चुनाव की प्रक्रिया जल्दबाजी में शुरू नहीं करना चाहती। वजह यह है कि परिसीमन, आरक्षण और नए निकायों के गठन जैसे काम पूरे होने बाकी हैं।
नगरीय निकाय चुनाव राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनके परिणामों का असर राजनीतिक दलों की आगामी रणनीतियों पर पड़ता है।
मध्य प्रदेश में पिछली बार नगरीय निकाय चुनाव जुलाई 2022 में हुए थे। उस समय प्रदेश के 347 नगरीय निकायों में दो चरणों में मतदान कराया गया था। पहले चरण में 6 जुलाई और दूसरे चरण में 13 जुलाई को वोट डाले गए थे।
पहले चरण में 6 जुलाई 2022 को 133 नगरीय निकायों के लिए मतदान हुआ था। इनमें 11 नगर निगम, 36 नगर पालिका और 86 नगर परिषद शामिल थीं। पहले चरण के चुनाव परिणाम 18 जुलाई 2022 को घोषित किए गए थे।
वहीं, दूसरे चरण में 13 जुलाई 2022 को पांच नगर निगम, 40 नगर पालिका और 168 नगर परिषदों के लिए मतदान कराया गया था। इस तरह दूसरे चरण में कुल 213 नगरीय निकायों में वोट डाले गए थे। इसके नतीजे 20 जुलाई 2022 को घोषित किए गए थे।
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दरअसल, निकाय चुनाव से पहले वार्डों का परिसीमन और आरक्षण प्रक्रिया पूरी की जाती है। अभी जनगणना का काम चल रहा है। ऐसे में नए आंकड़ों के आधार पर वार्डों की सीमाएं बदल सकती हैं। इसके चलते सरकार मौजूदा व्यवस्था के आधार पर चुनाव कराने की बजाय नई प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर सकती है।
जनगणना के बाद बदल सकते हैं वार्डों के समीकरण
इसके अलावा सरकार ने कई पंचायतों को मिलाकर नई नगर परिषद बनाने की घोषणा भी की है। नए निकायों के गठन और सीमाओं के निर्धारण की प्रक्रिया भी जनगणना पूरी होने के बाद आगे बढ़ सकती है। यही वजह है कि निकाय चुनाव की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।
413 नगरीय निकायों में होने हैं चुनाव
इस बार नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव भी सीधे जनता के वोट से कराया जाएगा। इससे पहले अध्यक्षों का चुनाव पार्षदों के माध्यम से होता था।
आरक्षण प्रक्रिया पर भी असर
लेकिन परिसीमन में बदलाव होने के बाद आरक्षण प्रक्रिया भी नए सिरे से करनी पड़ सकती है। इसलिए नगर निकाय चुनाव 2027 का कार्यक्रम जारी होने में देरी हो सकती है।
निर्वाचन आयोग ने कहा- चुनाव कराना हमारी जिम्मेदारी
अधिकारियों के अनुसार, अगर समय पर ईवीएम उपलब्ध हो जाती हैं तो चुनाव ईवीएम से ही कराए जाएंगे।
सरकार जल्दबाजी के पक्ष में नहीं
नगरीय निकाय चुनाव राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनके परिणामों का असर राजनीतिक दलों की आगामी रणनीतियों पर पड़ता है।
मध्य प्रदेश नगर निकाय चुनाव 2022
पहले चरण में 6 जुलाई 2022 को 133 नगरीय निकायों के लिए मतदान हुआ था। इनमें 11 नगर निगम, 36 नगर पालिका और 86 नगर परिषद शामिल थीं। पहले चरण के चुनाव परिणाम 18 जुलाई 2022 को घोषित किए गए थे।
वहीं, दूसरे चरण में 13 जुलाई 2022 को पांच नगर निगम, 40 नगर पालिका और 168 नगर परिषदों के लिए मतदान कराया गया था। इस तरह दूसरे चरण में कुल 213 नगरीय निकायों में वोट डाले गए थे। इसके नतीजे 20 जुलाई 2022 को घोषित किए गए थे।
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