ओबीसी आरक्षण फैसले के बाद कई सवाल, सरकार से लेकर PSC और ESB, उम्मीदवार सबमें असमंजस
Sanjay Gupta | Oct 11, 2026, 14:17 IST
OBC आरक्षण पर फैसला तो आ गया, अब आगे क्या?
INDORE. मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद नई उलझन खड़ी हो गई है। प्रदेश की बीजेपी सरकार से लेकर पीएससी और ईएसबी जैसी भर्ती एजेंसियां भी असमंजस में हैं। वहीं लाखों उम्मीदवारों को समझ नहीं आ रहा कि अब उनकी भर्ती का क्या होगा। ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब अभी सामने नहीं आए हैं।
करीब सात साल से चल रहे ओबीसी आरक्षण मामले में हाईकोर्ट ने 09 अक्टूबर को बड़ा फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कमलनाथ सरकार के समय 2019 में बनाए गए कानून को असंवैधानिक करार दिया है। इस कानून के जरिए ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था। अब कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया है। यानी ओबीसी आरक्षण पहले की तरह 14 प्रतिशत ही रहेगा। इस फैसले के बाद सरकार के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि सरकार इनका हल कैसे निकालती है।
जवाब- द सूत्र ने इसमें शासन, प्रशासन और भर्ती एजेंसियों से बात की, लेकिन सभी का यही कहना है कि अभी सब होल्ड पर है। आदेश शुक्रवार को आया है और फिर दो दिन अवकाश। ऐसे में जब तक एजी से सरकार बात नहीं करेगी और जीएडी मार्गदर्शन नहीं देगा, तब तक कुछ नहीं कह सकते हैं। यानी अभी रिजल्ट जारी नहीं होंगे।
जवाब- कई उम्मीदवारों के मन में सवाल है कि पीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा के बाद ही 87-13 का फॉर्मूला लागू कर दिया था। जबकि फाइनल मेरिट लिस्ट मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों के आधार पर बनती है। ऐसे में हो सकता है कि 13 प्रतिशत वाली कैटेगरी में कुछ उम्मीदवारों के अंक ज्यादा हों। वहीं 87 प्रतिशत वाली कैटेगरी में भी कुछ ऐसे उम्मीदवार हो सकते हैं, जो अपने ज्यादा अंकों के आधार पर बेहतर पद पाने के हकदार हों।
दूसरी तरफ ईएसबी ने हाल ही में जारी एक रिजल्ट में अलग तरीका अपनाया। ईएसबी ने लिखित परीक्षा के अंकों के आधार पर 87-13 की मेरिट लिस्ट बनाई। यानी पीएससी और ईएसबी ने एक ही मामले में अलग-अलग तरीके अपनाए।
सितंबर 2022 में सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें कहा गया था कि जो उम्मीदवार जिस कैटेगरी में है, वह उसी में रहेगा। ऐसे में अब उम्मीदवारों के सामने कई तरह की उलझनें हैं।
हालांकि, द सूत्र को अधिकारियों ने बताया कि पुरानी मेरिट लिस्ट में कोई बदलाव नहीं होगा।इसकी वजह यह है कि 87 प्रतिशत वाली सूची के उम्मीदवार नौकरी जॉइन कर चुके हैं। कई लोगों को नौकरी करते हुए सालों हो गए हैं। ऐसे में अब मेरिट लिस्ट बदलना संभव नहीं है।
जीएडी के सर्कुलर और पीएससी के शपथपत्र में भी साफ किया गया था कि 87 और 13 प्रतिशत वाली कैटेगरी के उम्मीदवारों की आपस में अदला-बदली नहीं होगी। उम्मीदवार भी आगे चलकर दूसरी कैटेगरी में जाने या उसके आधार पर पद पाने का दावा नहीं कर सकेंगे।
जवाब- यह सबसे बड़ा सवाल है। सीएम कह चुके हैं कि सामान्य पीएससी और विशेष पीएससी साल 2027 में होगी। वहीं ईएसबी से भी सिपाही भर्ती, एसआई भर्ती यह सब जारी हैं। हजारों पद पदोन्नति के बाद रिक्त हुए हैं। इन पर भर्ती होना है। भर्ती विज्ञापन में कैटेगरी के आधार पर आरक्षण भी बताया जाता है और इसी आधार पर पदों का बंटवारा भी विभाग करता है। ऐसे में सरकार को भर्ती विज्ञापन तो हाईकोर्ट के आदेश के तहत तय आरक्षण एसटी 20 प्रतिशत, एससी 16 प्रतिशत, ओबीसी 14 प्रतिशत, ईडब्ल्यूएस 10 प्रतिशत पर करना होगा। वहीं, सरकार क्या इसे करना चाहेगी, यह बड़ा सवाल है। क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में जाना तय है। ऐसे में सरकार को तय करना है कि वह भर्ती प्रक्रिया को होल्ड करेगी या फिर हाईकोर्ट के आदेश के तहत तय आरक्षण व्यवस्था से जारी करेगी।
जवाब- यह भी एक सवाल है, क्योंकि साल 2019 की पीएससी से लेकर 2020, 2021, 2022, 2023, 2024 के अंतिम रिजल्ट आ चुके हैं और उम्मीदवार जॉइन हो चुके हैं। वहीं, इसी अवधि में 13 प्रतिशत में चयनित जिनका नाम लिफाफे में बंद है, उनकी वरिष्ठता का क्या होगा? जैसे साल 2019 में चयनित 13 प्रतिशत कैटेगरी का डिप्टी कलेक्टर अब कौन सी बैच का कहलाएगा? क्योंकि गलती उसकी नहीं है, यह तो सरकार ने रोक रखा था, वह आगे क्लेम तो करेगा। हालांकि वेतन नहीं ले सकता है क्योंकि नो वर्क नो पेमेंट नियम रहेगा। लेकिन वह आगे सीनियरिटी की मांग तो करेगा।
जवाब- बिल्कुल, यह तय है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी। क्योंकि जिस तरह से सीएम और भाजपा मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष के बयान आ रहे हैं, वह बताता है कि सरकार इस मुद्दे पर राजनीतिक रूप से पीछे नहीं रह सकती है। कांग्रेस पहले ही बोल चुकी है कि वह सुप्रीम कोर्ट जाएगी। वहीं राहुल गांधी भी छात्रों की गूंज के बाद सरकार को पत्र लिखकर सीधे तौर पर ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने और 13 प्रतिशत होल्ड पद उन्हें देने का बोल चुके हैं। ऐसे में इस फैसले के बाद स्थितियां सुलझने की बजाय और उलझती हुई अधिक नजर आ रही हैं।
जवाब- हाईकोर्ट ने आदेश के तहत तो 87-13 प्रतिशत फार्मूले का वजूद खत्म कर दिया है। चयन एजेंसियों को अब सारे रिजल्ट 100 प्रतिशत पर देना है, यह आदेश में ही लिखा है। अब यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है और हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे मिलता है, तो फिर जरूर यह फार्मूला फिर जिंदा होगा। साथ ही, इसी आधार पर आगे की कानूनी लड़ाई जारी रहने तक रिजल्ट और भर्तियां हो सकेंगी। क्योंकि इस फार्मूले को पूर्व के हाईकोर्ट फैसलों में मान्य किया गया था।
जानकारी के अनुसार इस मुद्दे को अब सरकार प्राथमिकता में रखते हुए एजी व विधि विशेषज्ञों से बात करके आगे बढ़ेगी। इसके साथ ही सरकार को जीएडी से बात कर चयन एजेंसियों को आगे की प्रक्रिया के लिए भी मार्गदर्शन देना होगा। ऐसा नहीं होने पर रिजल्ट और भर्ती प्रक्रियाएं ही होल्ड पर चली जाएंगी। ऐसे में सरकार के साथ ही लाखों उम्मीदवारों के लिए अगला सप्ताह काफी अहम होने वाला है। तभी इन सवालों के भी जवाब मिलेंगे।
हाईकोर्ट के फैसले में तीन बातें अहम हैं-
- ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत ही रहेगा। अब पीएससी, ईएसबी और दूसरी भर्ती एजेंसियों को इसी आधार पर परीक्षाओं के रिजल्ट जारी करने होंगे।
- पहले हुई नियुक्तियां रद्द नहीं होंगी। मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 के बीच 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर जिन लोगों को नौकरी मिली है, उनकी नियुक्तियां बरकरार रहेंगी। इन नियुक्तियों को अगले तीन साल की भर्तियों में समायोजित किया जाएगा।
- रुके हुए 13 प्रतिशत पदों पर भर्ती होगी। जिन 13 प्रतिशत पदों के रिजल्ट रोककर रखे गए थे, उन्हें अब अनारक्षित वर्ग से भरा जाएगा। यह काम कोर्ट के आदेश के तीन महीने के भीतर पूरा करना होगा।
अब क्या सवाल हैं जिनका जवाब सभी चाहते हैं:
सवाल- अभी जारी भर्ती में रिजल्ट का क्या होगा, जो जारी होना है? क्या वह सौ फीसदी पर आएगा? क्योंकि हाईकोर्ट के आदेश के बिंदु 221 में साफ लिखा है कि अब इसी आधार (यानी ओबीसी आरक्षण 14 फीसदी) पर चयन एजेंसियां रिजल्ट जारी करेंगी।
सवाल- 13 फीसदी होल्ड पद अनहोल्ड करेंगे तो क्या मेरिट सभी अंक देखकर रिवाइज्ड होगी?
दूसरी तरफ ईएसबी ने हाल ही में जारी एक रिजल्ट में अलग तरीका अपनाया। ईएसबी ने लिखित परीक्षा के अंकों के आधार पर 87-13 की मेरिट लिस्ट बनाई। यानी पीएससी और ईएसबी ने एक ही मामले में अलग-अलग तरीके अपनाए।
सितंबर 2022 में सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें कहा गया था कि जो उम्मीदवार जिस कैटेगरी में है, वह उसी में रहेगा। ऐसे में अब उम्मीदवारों के सामने कई तरह की उलझनें हैं।
हालांकि, द सूत्र को अधिकारियों ने बताया कि पुरानी मेरिट लिस्ट में कोई बदलाव नहीं होगा।इसकी वजह यह है कि 87 प्रतिशत वाली सूची के उम्मीदवार नौकरी जॉइन कर चुके हैं। कई लोगों को नौकरी करते हुए सालों हो गए हैं। ऐसे में अब मेरिट लिस्ट बदलना संभव नहीं है।
जीएडी के सर्कुलर और पीएससी के शपथपत्र में भी साफ किया गया था कि 87 और 13 प्रतिशत वाली कैटेगरी के उम्मीदवारों की आपस में अदला-बदली नहीं होगी। उम्मीदवार भी आगे चलकर दूसरी कैटेगरी में जाने या उसके आधार पर पद पाने का दावा नहीं कर सकेंगे।
सवाल- पदोन्नति से हजारों पद रिक्त हुए, उनके भर्ती विज्ञापन का क्या होगा?
सवाल- 13 फीसदी पद अनहोल्ड करते हैं तो पांच-छह साल पहले चयनितों की वरिष्ठता का क्या होगा?
सवाल- क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी?
सवाल- 87-13 फीसदी फार्मूले का अब क्या होगा?
अगले सप्ताह ही जीएडी करेगा विचार
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