ओबीसी आरक्षण पर पूर्व सीएम कमलनाथ का बीजेपी पर हमला, बोले- चोरी और सीनाजोरी की राजनीति कर रही सरकार
BHOPAL. मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर सियासत तेज हो गई है। जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने सरकार पर चोरी और सीनाजोरी की राजनीति का आरोप लगाया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट जाने और विधानसभा में नया कानून बनाने की मांग की है।
पूर्व सीएम कमलनाथ ने क्या कहा
उनके मुताबिक आरक्षण की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी होती है। वहीं, बाद में बनी भाजपा सरकारों ने अदालत के सामने सच्चाई नहीं रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने जल्दबाजी में आरक्षण दिया, यह भाजपा नेताओं का भ्रामक प्रचार है। कमलनाथ ने ऐसे बयानों को अदालत के आदेश की गलत व्याख्या बताया है।
मध्य प्रदेश में OBC वर्ग को 2019 में मेरी सरकार द्वारा दिया गया 27% आरक्षण षड्यंत्रपूर्वक समाप्त करने के बाद भारतीय जनता पार्टी "चोरी और सीना जोरी" की राजनीति पर उतर आई है।सच्चाई यह है कि मेरी सरकार ने जनता की भलाई के लिए आरक्षण दिया था। आरक्षण की रक्षा करना सरकार की ज़िम्मेदारी होती है। लेकिन उसके बाद बनी भाजपा सरकारों ने कोर्ट के सामने सच्चाई रखी ही नहीं।भाजपा नेताओं के बयान में यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि तब कांग्रेस सरकार ने जल्दबाजी में आरक्षण दिया। इस तरह के भ्रामक बयान अदालत के आदेश की ग़लत व्याख्या और अवमानना की तरह हैं।सच्चाई यह कि कांग्रेस सरकार ने 2019 में मध्य प्रदेश विधानसभा में क़ानून पास करके ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण दिया था, जो पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करके दिया गया था।2020 से प्रदेश में भाजपा की सरकारें हैं, इन 6 साल में भाजपा ने जानबूझकर ओबीसी जनसंख्या के सही आंकड़े न्यायालय के सामने नहीं रखे।भाजपा सरकार की ज़िम्मेदारी थी कि वह अदालत में मामले को पुरज़ोर ढंग से रखें, लेकिन भाजपा नेताओं के बयानों से लगता है कि 2019 में हमने जो आरक्षण दिया उसके बाद से उस आरक्षण के संरक्षण के लिए भाजपा ने कुछ नहीं किया। अगर भाजपा नेता जो कह रहे हैं उसे सच मान लें तो स्पष्ट है कि भाजपा ने पिछले 6 साल में अदालत के सामने ओबीसी का पक्ष रखा ही नहीं है।अगर, भाजपा में ओबीसी वर्ग के प्रति जरा भी संवेदनशीलता है तो तुरंत सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाए और साथ ही विधानसभा में नया कानून पारित कर 27% आरक्षण बहाल करे।
— Kamal Nath (@OfficeOfKNath) October 10, 2026
भाजपा पर 6 साल का आरोप
उनका आरोप है कि इन छह साल में भाजपा ने जानबूझकर ओबीसी आबादी के सही आंकड़े अदालत में नहीं रखे थे। अदालत में मामला मजबूती से रखने की जिम्मेदारी सरकार की थी। उन्होंने यह तक कहा कि भाजपा नेताओं के बयान सच मानें, तो पार्टी ने छह साल में ओबीसी का पक्ष रखा ही नहीं था।
कमलनाथ की दो मांगें
ये दोनों मांगें अभी राजनीतिक मांगें हैं। सरकार ने इन पर कोई औपचारिक फैसला नहीं बताया है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर सकती है।
हाईकोर्ट के फैसले में क्या है
कोर्ट ने कहा कि 50 फीसदी की सीमा पार करने के लिए असाधारण परिस्थिति साबित करनी होती है। अदालत को ऐसी परिस्थिति नहीं मिली है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से जरूरी परामर्श न लेने का मुद्दा भी अहम रहा। 1983 की महाजन आयोग की पुरानी रिपोर्ट पर निर्भरता पर भी सवाल उठे हैं।
अदालत ने ओबीसी की सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी के आंकड़े भी देखे थे। उसके मुताबिक हिस्सेदारी करीब 28.16 फीसदी थी। ओबीसी के लिए स्वीकृत पदों में से करीब 51.17 फीसदी खाली थे। यानी अदालत ने सिर्फ आरक्षण के प्रतिशत को वजह नहीं माना है।
13% होल्ड पदों का क्या होगा
हाईकोर्ट ने इन रोके गए 13 फीसदी पदों पर अनारक्षित वर्ग के पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए अधिकतम तीन महीने का समय दिया गया है। मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 के बीच 27 फीसदी आरक्षण से नौकरी पाने वालों की नियुक्तियां रद्द नहीं होंगी।
दूसरे पक्षों की प्रतिक्रिया
ओबीसी पक्ष के वकील पुष्पेंद्र शाह ने कहा कि फैसले में कई बातें साफ नहीं हैं। उनके मुताबिक ओबीसी पक्ष जल्द सुप्रीम कोर्ट जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार भी इसे चुनौती देगी।
वहीं अनारक्षित वर्ग की ओर से पैरवी करने वाले वकील आदित्य सांघी ने फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उनके मुताबिक सरकार असाधारण परिस्थिति साबित नहीं कर पाई है।
अब आगे क्या होगा
यदि नया कानून आया, तो उसे भी अदालत की कसौटी पर परखा जाएगा। वहीं, अपील हुई, तो सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई लंबी चल सकती है। तब तक होल्ड पदों और भर्तियों पर असमंजस रह सकता है।
कमलनाथ के आरोप और सरकार का जवाब, दोनों इस मुद्दे का हिस्सा हैं। लेकिन अदालत का लिखा आदेश सबसे अहम दस्तावेज है। इसलिए पाठकों को राजनीतिक बयानों के साथ आदेश की बातें भी देखनी चाहिए।
FAQs
- कमलनाथ ने ओबीसी आरक्षण के बारे में क्या कहा है?
कमलनाथ ने आरोप लगाया है कि 2019 में उनकी सरकार द्वारा दिया गया 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण एक षड्यंत्र के माध्यम से खत्म कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आरक्षण की रक्षा सरकार की जिम्मेदारी होती है और भाजपा सरकार ने अदालत में सही तथ्य नहीं रखे। - ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला क्या है और इसका असर क्या होगा?
हाईकोर्ट ने 2019 में लागू 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को असंवैधानिक मानते हुए रद्द कर दिया है और अब ओबीसी आरक्षण 14 फीसदी पर वापस आ गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि असाधारण परिस्थितियों को साबित करने के लिए जरूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। - ओबीसी आरक्षण पर अब सरकार का अगला कदम क्या होगा?
सरकार के अगले कदम पर सभी की नजर है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी या विधानसभा में नया कानून लाएगी। यदि नया कानून लाया गया, तो उसे भी अदालत की कसौटी पर परखा जाएगा।
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