ओबीसी आरक्षण पर पूर्व सीएम कमलनाथ का बीजेपी पर हमला, बोले- चोरी और सीनाजोरी की राजनीति कर रही सरकार

Amresh Kushwaha | Oct 10, 2026, 14:07 IST
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OBC आरक्षण पर पूर्व सीएम कमलनाथ का सरकार पर पलटवार।
OBC आरक्षण पर पूर्व सीएम कमलनाथ का सरकार पर पलटवार।

BHOPAL. मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर सियासत तेज हो गई है। जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने सरकार पर चोरी और सीनाजोरी की राजनीति का आरोप लगाया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट जाने और विधानसभा में नया कानून बनाने की मांग की है।

बता दें कि इस विवाद में तीन पक्ष हैं। एक तरफ कमलनाथ के आरोप हैं। दूसरी तरफ हाईकोर्ट का फैसला है। तीसरी तरफ सरकार और याचिकाकर्ताओं की प्रतिक्रियाएं हैं। इसलिए इन्हें अलग-अलग समझना जरूरी है।

पूर्व सीएम कमलनाथ ने क्या कहा

पूर्व सीएम कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स (X) पर लिखा कि 2019 में उनकी सरकार ने ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण दिया था। उनका दावा है कि इसे बाद में षड्यंत्र के जरिए खत्म किया गया था। इसके बाद भाजपा चोरी और सीनाजोरी की राजनीति पर उतर आई है।

उनके मुताबिक आरक्षण की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी होती है। वहीं, बाद में बनी भाजपा सरकारों ने अदालत के सामने सच्चाई नहीं रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने जल्दबाजी में आरक्षण दिया, यह भाजपा नेताओं का भ्रामक प्रचार है। कमलनाथ ने ऐसे बयानों को अदालत के आदेश की गलत व्याख्या बताया है।

भाजपा पर 6 साल का आरोप

कमलनाथ का कहना है कि 2019 में कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में कानून पास किया था। उनके अनुसार यह संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करके हुआ था। फिर 2020 से प्रदेश में भाजपा की सरकारें हैं।

उनका आरोप है कि इन छह साल में भाजपा ने जानबूझकर ओबीसी आबादी के सही आंकड़े अदालत में नहीं रखे थे। अदालत में मामला मजबूती से रखने की जिम्मेदारी सरकार की थी। उन्होंने यह तक कहा कि भाजपा नेताओं के बयान सच मानें, तो पार्टी ने छह साल में ओबीसी का पक्ष रखा ही नहीं था।

कमलनाथ की दो मांगें

कमलनाथ ने भाजपा से दो मांगें रखीं। पहली, यदि पार्टी में ओबीसी वर्ग के प्रति जरा भी संवेदनशीलता है, तो सुप्रीम कोर्ट में तुरंत याचिका लगाए। दूसरी, विधानसभा में नया कानून पास करके 27 फीसदी आरक्षण बहाल करे।

ये दोनों मांगें अभी राजनीतिक मांगें हैं। सरकार ने इन पर कोई औपचारिक फैसला नहीं बताया है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर सकती है।

ओबीसी आरक्षण पर बड़ा झटका: 27% आरक्षण रद्द, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग की नियुक्ति के निर्देश | Big blow to OBC reservation: 27% reservation cancelled, directions for appointment of unreserved category in 13% hold posts
27% OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग को नियुक्ति के निर्देश
09 Oct 2026 ,
By Neel Tiwari
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले कानून को संविधान के खिलाफ मानते हुए रद्द कर दिया है। यानी अब ओबीसी वर्ग को फिर से 14 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इसके साथ ही 13 फीसदी पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले कानून को संविधान के खिलाफ मानते हुए रद्द कर दिया है। यानी अब ओबीसी वर्ग को फिर से 14 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इसके साथ ही 13 फीसदी पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट के फैसले में क्या है

जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की पीठ ने फैसला सुनाया है। पीठ ने 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले संशोधन कानून को असंवैधानिक माना है। वहीं, अब कानून रद्द हो गया और ओबीसी आरक्षण 14 फीसदी रह गया है।

कोर्ट ने कहा कि 50 फीसदी की सीमा पार करने के लिए असाधारण परिस्थिति साबित करनी होती है। अदालत को ऐसी परिस्थिति नहीं मिली है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से जरूरी परामर्श न लेने का मुद्दा भी अहम रहा। 1983 की महाजन आयोग की पुरानी रिपोर्ट पर निर्भरता पर भी सवाल उठे हैं।

अदालत ने ओबीसी की सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी के आंकड़े भी देखे थे। उसके मुताबिक हिस्सेदारी करीब 28.16 फीसदी थी। ओबीसी के लिए स्वीकृत पदों में से करीब 51.17 फीसदी खाली थे। यानी अदालत ने सिर्फ आरक्षण के प्रतिशत को वजह नहीं माना है।

13% होल्ड पदों का क्या होगा

29 सितंबर 2022 के बाद भर्तियों में 87-13 का फॉर्मूला चल रहा था। यानी 87 फीसदी पदों के नतीजे जारी होते थे। 13 फीसदी पद रोके गए थे। इन्हें होल्ड पद कहा जाता है।

हाईकोर्ट ने इन रोके गए 13 फीसदी पदों पर अनारक्षित वर्ग के पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए अधिकतम तीन महीने का समय दिया गया है। मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 के बीच 27 फीसदी आरक्षण से नौकरी पाने वालों की नियुक्तियां रद्द नहीं होंगी।

27% ओबीसी आरक्षण: कांग्रेस की चूक पर भाजपा का सवाल, अब मोहन सरकार का अगला कदम क्या? | 27% OBC Reservation: BJP questions Congress's lapse, what is CM Mohan's next step?
27% ओबीसी आरक्षण: हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस की चूक गिनाई, अब भाजपा का रास्ता क्या?
09 Oct 2026 ,
By Ramanand Tiwari
मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मुद्दा फिर राजनीतिक टकराव के केंद्र में है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देकर कांग्रेस सरकार के 2019 के अध्यादेश पर सवाल उठाए हैं। लेकिन इस बयान से एक दूसरा सवाल भी निकलता है। पिछली सरकार की कानूनी चूक गिनाने के बाद मौजूदा सरकार आरक्षण लागू कराने के लिए क्या ठोस रास्ता निकालेगी?
मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मुद्दा फिर राजनीतिक टकराव के केंद्र में है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देकर कांग्रेस सरकार के 2019 के अध्यादेश पर सवाल उठाए हैं। लेकिन इस बयान से एक दूसरा सवाल भी निकलता है। पिछली सरकार की कानूनी चूक गिनाने के बाद मौजूदा सरकार आरक्षण लागू कराने के लिए क्या ठोस रास्ता निकालेगी?

दूसरे पक्षों की प्रतिक्रिया

महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि 159 पन्नों के आदेश का विश्लेषण हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट जाने के सवाल पर उन्होंने साफ जवाब नहीं दिया है। नई स्थिति बनने पर जानकारी देने की बात कही है।

ओबीसी पक्ष के वकील पुष्पेंद्र शाह ने कहा कि फैसले में कई बातें साफ नहीं हैं। उनके मुताबिक ओबीसी पक्ष जल्द सुप्रीम कोर्ट जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार भी इसे चुनौती देगी।

वहीं अनारक्षित वर्ग की ओर से पैरवी करने वाले वकील आदित्य सांघी ने फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उनके मुताबिक सरकार असाधारण परिस्थिति साबित नहीं कर पाई है।

अब आगे क्या होगा

अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है। क्या वह सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी? क्या विधानसभा में नया कानून आएगा? इन सवालों का जवाब अभी नहीं मिला है।

यदि नया कानून आया, तो उसे भी अदालत की कसौटी पर परखा जाएगा। वहीं, अपील हुई, तो सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई लंबी चल सकती है। तब तक होल्ड पदों और भर्तियों पर असमंजस रह सकता है।

कमलनाथ के आरोप और सरकार का जवाब, दोनों इस मुद्दे का हिस्सा हैं। लेकिन अदालत का लिखा आदेश सबसे अहम दस्तावेज है। इसलिए पाठकों को राजनीतिक बयानों के साथ आदेश की बातें भी देखनी चाहिए।

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OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला: CM मोहन यादव की पहली प्रतिक्रिया, बोले- कानूनी परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी सरकार
10 Oct 2026 ,
By Sumit Kumar
मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सरकार कोर्ट के फैसले का कानूनी परीक्षण करेगी। इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा।
मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सरकार कोर्ट के फैसले का कानूनी परीक्षण करेगी। इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा।

FAQs

  1. कमलनाथ ने ओबीसी आरक्षण के बारे में क्या कहा है?
    कमलनाथ ने आरोप लगाया है कि 2019 में उनकी सरकार द्वारा दिया गया 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण एक षड्यंत्र के माध्यम से खत्म कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आरक्षण की रक्षा सरकार की जिम्मेदारी होती है और भाजपा सरकार ने अदालत में सही तथ्य नहीं रखे।
  2. ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला क्या है और इसका असर क्या होगा?
    हाईकोर्ट ने 2019 में लागू 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को असंवैधानिक मानते हुए रद्द कर दिया है और अब ओबीसी आरक्षण 14 फीसदी पर वापस आ गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि असाधारण परिस्थितियों को साबित करने के लिए जरूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था।
  3. ओबीसी आरक्षण पर अब सरकार का अगला कदम क्या होगा?
    सरकार के अगले कदम पर सभी की नजर है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी या विधानसभा में नया कानून लाएगी। यदि नया कानून लाया गया, तो उसे भी अदालत की कसौटी पर परखा जाएगा।
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