27% ओबीसी आरक्षण: हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस की चूक गिनाई, अब भाजपा का रास्ता क्या?

Ramanand Tiwari | Oct 09, 2026, 23:32 IST
Share
ओबीसी आरक्षण को लेकर हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस की कानूनी तैयारी पर सवाल उठाए हैं।
ओबीसी आरक्षण को लेकर हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस की कानूनी तैयारी पर सवाल उठाए हैं।

मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मुद्दा फिर राजनीतिक टकराव के केंद्र में है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देकर कांग्रेस सरकार के 2019 के अध्यादेश पर सवाल उठाए हैं। लेकिन इस बयान से एक दूसरा सवाल भी निकलता है। पिछली सरकार की कानूनी चूक गिनाने के बाद मौजूदा सरकार आरक्षण लागू कराने के लिए क्या ठोस रास्ता निकालेगी?

2019 की गलती पर बहस

मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मुद्दा अब केवल कांग्रेस और भाजपा के आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस विवाद का राजनीतिक और कानूनी पक्ष एक बार फिर सामने आया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस की तत्कालीन सरकार पर चुनावी लाभ के लिए जल्दबाजी में अध्यादेश लाने का आरोप लगाया है।

उनका कहना है कि कांग्रेस ने आरक्षण बढ़ाने का निर्णय तो लिया, लेकिन उसे न्यायिक जांच में टिकाने के लिए जरूरी संवैधानिक और कानूनी तैयारी नहीं की। यह भाजपा का राजनीतिक आरोप है। हालांकि इसके साथ एक महत्वपूर्ण सवाल मौजूदा सरकार के सामने भी खड़ा होता है कि वर्षों से चले आ रहे विवाद का स्थायी समाधान आखिर कैसे निकलेगा?

ओबीसी आरक्षण पर बड़ा झटका: 27% आरक्षण रद्द, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग की नियुक्ति के निर्देश | Big blow to OBC reservation: 27% reservation cancelled, directions for appointment of unreserved category in 13% hold posts
27% OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग को नियुक्ति के निर्देश
09 Oct 2026 ,
By Neel Tiwari
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले कानून को संविधान के खिलाफ मानते हुए रद्द कर दिया है। यानी अब ओबीसी वर्ग को फिर से 14 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इसके साथ ही 13 फीसदी पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले कानून को संविधान के खिलाफ मानते हुए रद्द कर दिया है। यानी अब ओबीसी वर्ग को फिर से 14 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इसके साथ ही 13 फीसदी पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट की कंडिका 215 पर भाजपा का जोर

खंडेलवाल ने अपने बयान में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले की कंडिका 215 का विशेष उल्लेख किया है। उनके अनुसार, न्यायालय ने 2019 के अध्यादेश को पर्याप्त तैयारी के बिना जल्दबाजी में लाए जाने की बात कही है। भाजपा इसे तत्कालीन कांग्रेस सरकार की निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर टिप्पणी मान रही है। हालांकि न्यायालय की टिप्पणी का वास्तविक कानूनी दायरा समझने के लिए फैसले का पूरा पाठ, संबंधित याचिकाएं और अंतिम निर्देश देखना आवश्यक है। किसी अध्यादेश की तैयारी पर टिप्पणी और आरक्षण संबंधी सभी कानूनी प्रश्नों का अंतिम निपटारा एक ही बात नहीं है। इसलिए राजनीतिक दलों के दावों से अलग न्यायिक फैसले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

कांग्रेस को घेरा, लेकिन भाजपा के सामने भी सवाल

खंडेलवाल ने कांग्रेस से पूछा है कि यदि वह वास्तव में ओबीसी वर्ग को अधिकार दिलाना चाहती थी, तो अध्यादेश लाते समय मजबूत संवैधानिक आधार क्यों तैयार नहीं किया गया? उन्होंने कांग्रेस पर अपनी सरकार की गलतियों की जिम्मेदारी लेने के बजाय भाजपा को दोषी ठहराने का आरोप लगाया।

इस बयान का दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है। प्रदेश में वर्तमान सरकार भाजपा की है। ऐसे में अब उससे यह अपेक्षा भी स्वाभाविक है कि वह विवाद के समाधान के लिए उठाए जाने वाले कानूनी और प्रशासनिक कदम स्पष्ट करे। सवाल यह है कि क्या राजनीतिक जवाबदेही केवल 2019 के फैसले तक सीमित रहेगी, या 2026 में समाधान की समयसीमा भी सामने आएगी?

मोहन सरकार के सामने तीन बड़ी चुनौतियां

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार के सामने इस मामले में तीन प्रमुख चुनौतियां दिखाई देती हैं। पहली चुनौती न्यायालय के फैसले और संबंधित आरक्षण प्रावधानों की कानूनी स्थिति स्पष्ट करना है।

दूसरी चुनौती यह तय करना है कि 27 प्रतिशत आरक्षण के संकल्प को संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप आगे बढ़ाने के लिए कौन-से विकल्प उपलब्ध हैं। तीसरी चुनौती उन अभ्यर्थियों और युवाओं की अनिश्चितता दूर करना है, जिनके लिए आरक्षण का सवाल सरकारी रोजगार और अवसरों से जुड़ा हुआ है।

आरक्षण संबंधी विवादों में संवैधानिक सीमाएं, न्यायिक आदेश और भर्ती प्रक्रियाओं की अलग-अलग परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए किसी राजनीतिक घोषणा को तत्काल लागू होने वाले कानूनी अधिकार के बराबर नहीं माना जा सकता।

सर्वदलीय चर्चा का विकल्प, लेकिन तारीख तय नहीं

खंडेलवाल ने कहा है कि भाजपा सरकार उच्च न्यायालय के निर्णय के सभी कानूनी पहलुओं का अध्ययन करके आगे की रणनीति तय करेगी। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर अन्य राजनीतिक दलों से चर्चा और समन्वय की संभावना भी जताई है।

इससे संकेत मिलता है कि सरकार कानूनी समीक्षा के साथ राजनीतिक सहमति का रास्ता भी तलाश सकती है। हालांकि उनके बयान में ऐसी किसी बैठक की निश्चित तारीख, कानूनी प्रस्ताव की समयसीमा या अगले निर्णय का स्पष्ट कार्यक्रम नहीं बताया गया है। यही वह बिंदु है जहां आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

27 प्रतिशत आरक्षण का संकल्प कितना आगे बढ़ेगा?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण ( OBC Reservation ) दिलाने के संकल्प पर कायम है। उन्होंने सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

लेकिन संकल्प और उसके कानूनी क्रियान्वयन के बीच की प्रक्रिया अभी महत्वपूर्ण है। आगे यह देखना होगा कि सरकार न्यायालय के निर्णय के बाद किस तरह की कानूनी राय प्राप्त करती है और क्या किसी नए विधायी या प्रशासनिक कदम की आवश्यकता पड़ती है।

बयान नहीं, फैसलों पर रहेगी नजर

मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण का विवाद अब अतीत की राजनीतिक जिम्मेदारी के साथ भविष्य की प्रशासनिक जवाबदेही का भी विषय बन गया है। कांग्रेस से 2019 के निर्णय पर सवाल पूछे जा रहे हैं, जबकि भाजपा सरकार के सामने 2026 में समाधान की दिशा स्पष्ट करने की चुनौती है।

खंडेलवाल के बयान ने कांग्रेस की कानूनी तैयारी को फिर बहस में ला दिया है। अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार अपनी अगली कार्रवाई कब और किस रूप में सामने रखती है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर राजनीतिक सहमति और कानूनी समाधान के बीच की दूरी कब कम होगी?
Tags:
  • 27% ओबीसी आरक्षण
  • ओबीसी आरक्षण
  • हेमंत खंडेलवाल
  • मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
  • Hemant Khandelwal
  • OBC
  • आरक्षण
  • OBC Reservation
पहले शिकायत, फिर नियुक्ति और अब विदाई! डिप्टी सीएम देवड़ा के यहां किसकी चली? OSD की नियुक्ति की फाइलों पर सवाल

By Ramanand Tiwari

पहले शिकायत, फिर नियुक्ति और अब विदाई! डिप्टी सीएम देवड़ा के यहां किसकी चली? OSD की नियुक्ति की फाइलों पर सवाल
OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला: CM मोहन यादव की पहली प्रतिक्रिया, बोले- कानूनी परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी सरकार

By Sumit Kumar

OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला: CM मोहन यादव की पहली प्रतिक्रिया, बोले- कानूनी परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी सरकार
जबलपुर में 4 पटवारियों के अपहरण का दावा, मझौली से पटवारी लापता! कलेक्टर बोले पुलिस के पास जाएं

By Neel Tiwari

जबलपुर में 4 पटवारियों के अपहरण का दावा, मझौली से पटवारी लापता! कलेक्टर बोले पुलिस के पास जाएं
घर से वोट डालने की तैयारी, लेकिन पहचान और गोपनीयता की गारंटी कौन देगा?, डिजिटल मतदान की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

By Ramanand Tiwari

घर से वोट डालने की तैयारी, लेकिन पहचान और गोपनीयता की गारंटी कौन देगा?, डिजिटल मतदान की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
कटनी के बहोरीबंद SDM पर 4 पटवारियों को बंधक बनाने का आरोप, मोबाइल जब्त कर जबरन काम कराने की शिकायत लेकर थाने पहुंचा संघ

By Neel Tiwari

कटनी के बहोरीबंद SDM पर 4 पटवारियों को बंधक बनाने का आरोप, मोबाइल जब्त कर जबरन काम कराने की शिकायत लेकर थाने पहुंचा संघ
आईपीएस कैडर रिव्यू में देरी: कैडर रिव्यू बैठक नहीं हो सकी समय पर, अफसरों की उम्र निकली, जवाबदेह कौन?

By Ramanand Tiwari

आईपीएस कैडर रिव्यू में देरी: कैडर रिव्यू बैठक नहीं हो सकी समय पर, अफसरों की उम्र निकली, जवाबदेह कौन?
MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें: एमपी में SPS के तबादले और 27% OBC आरक्षण पर HC का बड़ा फैसला

By Sandeep Kumar

MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें: एमपी में SPS के तबादले और 27% OBC आरक्षण पर HC का बड़ा फैसला