जीतू पटवारी का बड़ा आरोप-ओबीसी आरक्षण रोकने के लिए सरकार ने वकीलों को दिए 200 करोड़ रुपए

Sandeep Kumar | Oct 10, 2026, 18:39 IST
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मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है।<br>
मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है।

मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस मामले को लेकर शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर वकीलों को 200 करोड़ रुपए देने का आरोप लगाए हैं। वहीं उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार ने कोर्ट में सही आंकड़े नहीं रखे। फिलहाल इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने अब सुप्रीम कोर्ट में जाने की चेतावनी दी है।

जीतू पटवारी ने क्या आरोप लगाए?

“सरकार ने OBC आरक्षण रोकने के लिए वकीलों को 200 करोड़ रुपए दिए। कांग्रेस हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी। इसका पूरा खर्च उठाएगी।”
By: – जीतू पटवारी, अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस
पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार ने एक पेशी के लिए वकीलों को 55 लाख रुपए दिए। उनके मुताबिक तारीख बढ़ने पर हर बार 1 करोड़ रुपए खर्च हुए। पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा को ‘महाखलनायक’ बताया। उन्होंने आरएसएस (RSS ) को भी यही नाम दिया।

सर्वे में सिर्फ 10 हजार लोगों पर सवाल

पटवारी ने सरकार के OBC सर्वे पर सवाल उठाए। मध्यप्रदेश की आबादी 7.25 करोड़ है। कोर्ट में सिर्फ करीब 10 हजार लोगों की रिपोर्ट रखी गई। पटवारी के मुताबिक हाईकोर्ट ने भी इस पर टिप्पणी की थी। क्या सरकार इन सवालों का जवाब देगी?

ओबीसी आरक्षण पर बड़ा झटका: 27% आरक्षण रद्द, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग की नियुक्ति के निर्देश | Big blow to OBC reservation: 27% reservation cancelled, directions for appointment of unreserved category in 13% hold posts
27% OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग को नियुक्ति के निर्देश
09 Oct 2026 ,
By Neel Tiwari
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले कानून को संविधान के खिलाफ मानते हुए रद्द कर दिया है। यानी अब ओबीसी वर्ग को फिर से 14 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इसके साथ ही 13 फीसदी पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले कानून को संविधान के खिलाफ मानते हुए रद्द कर दिया है। यानी अब ओबीसी वर्ग को फिर से 14 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इसके साथ ही 13 फीसदी पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।

कमलनाथ सरकार के फैसले पर क्या बोले?

अब जरा पीछे चलते हैं। पटवारी के मुताबिक कमलनाथ सरकार ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया था। लागू होने के बाद कुछ साल तक लोगों को नौकरियां भी मिलीं।

पटवारी का आरोप है, सर्वदलीय बैठक के नाम पर ओबीसी समाज को गुमराह किया गया। उनके मुताबिक मोहन सरकार ने जानबूझकर ऐसी स्थिति बनाई। फैसला गलती से नहीं हुआ।

ओबीसी आरक्षण पर कमलनाथ का बीजेपी पर 'चोरी और सीनाजोरी' का आरोप, सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग | Kamal Nath accuses BJP of 'theft and audacity' on OBC reservation, demands going to Supreme Court
ओबीसी आरक्षण पर पूर्व सीएम कमलनाथ का बीजेपी पर हमला, बोले- चोरी और सीनाजोरी की राजनीति कर रही सरकार
10 Oct 2026 ,
By Amresh Kushwaha
BHOPAL. मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर सियासत तेज हो गई है। जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने सरकार पर चोरी और सीनाजोरी की राजनीति का आरोप लगाया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट जाने और विधानसभा में नया कानून बनाने की मांग की है।
BHOPAL. मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर सियासत तेज हो गई है। जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने सरकार पर चोरी और सीनाजोरी की राजनीति का आरोप लगाया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट जाने और विधानसभा में नया कानून बनाने की मांग की है।

उमंग सिंघार ने सरकार से क्या कहा?

“सरकार ने कोर्ट में सही आंकड़े और मजबूत तथ्य पेश नहीं किए। मोहन यादव सरकार ने OBC समाज की पीठ में छुरा घोंपा। समाज और प्रदेश माफ नहीं करेगा।”
By: उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष
सिंघार ने कहा कि 9 अक्टूबर को आए फैसले से ओबीसी समाज को झटका लगा। उनके मुताबिक आबादी में इस वर्ग की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा है। समाज को उम्मीद थी कि बच्चों को शिक्षा और रोजगार में ज्यादा अवसर मिलेंगे। सिंघार का आरोप है, सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करना ही नहीं चाहती थी।

मंत्री धर्मेंद्र लोधी का जवाब क्या है?

“तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के जरिए 27% OBC आरक्षण लागू किया था। इसका नोटिफिकेशन लचर और त्रुटिपूर्ण था। अध्यादेश बेहद जल्दबाजी में लाया गया। इस महत्वपूर्ण विषय पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से भी परामर्श नहीं लिया गया।”
By: – धर्मेंद्र लोधी, राज्य मंत्री
अध्यादेश (सरकार का तुरंत जारी किया गया आदेश) पर लोधी ने सवाल उठाए। उनके मुताबिक फैसले से तत्कालीन कांग्रेस सरकार की मंशा पर संदेह पैदा हुआ।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

27 प्रतिशत आरक्षण पर जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने फैसला सुनाया था। बेंच ने 2019 के कानून को असंवैधानिक बताया। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश में ओबीसी को 14 प्रतिशत ही मिलेगा।

13 प्रतिशत होल्ड पदों का क्या होगा?

महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के मुताबिक कोर्ट ने होल्ड पदों पर आदेश दिया। भर्तियों में रोके गए 13 प्रतिशत पद अनारक्षित वर्ग की चयन सूची से भरे जाएंगे। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) को तीन महीने में जरूरी कार्रवाई करनी होगी। कर्मचारी चयन मंडल और दूसरी भर्ती एजेंसियों पर भी यही समयसीमा लागू है।

अब आगे क्या होगा?

कांग्रेस और ओबीसी महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की बात कही है। सरकार पहले फैसले का विधिक परीक्षण (कानूनी जांच) करेगी। फिर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

एमपी ओबीसी कोटा (Madhya Pradesh OBC quota) का मामला अब सबकी नजर में है। 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण ( 27 percent OBC reservation) के कानून पर आए फैसले को कांग्रेस चुनौती देगी। ओबीसी आरक्षण ( OBC reservation) पर सरकार का अगला कदम कानूनी जांच के बाद तय होगा। क्या सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी? फिल ओबीसी आरक्षण मामले पर फैसला आ चुका है, पर लड़ाई खत्म नहीं हुई।

FAQ:

  1. ओबीसी आरक्षण को लेकर जीतू पटवारी ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
    पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार ने ओबीसी आरक्षण रोकने के लिए वकीलों को 200 करोड़ रुपए दिए। (यह आंकड़ा अभी confirm नहीं हुआ है) कांग्रेस ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी कही है।
  2. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण पर क्या फैसला दिया?
    हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 27 प्रतिशत आरक्षण वाले 2019 के कानून को असंवैधानिक बताया है। कोर्ट ने साफ किया कि प्रदेश में ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण ही मिलेगा। फैसला जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने सुनाया।
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