प्रमोशन से सीधे डिमोशन! MP के 15 हजार पुलिसकर्मियों का छिन सकता है बढ़ा पद
Amresh Kushwaha | Jul 11, 2026, 13:20 IST
15 हजार पुलिसकर्मियों पर डिमोशन का खतरा
मध्य प्रदेश में करीब 15 हजार पुलिसकर्मियों पर डिमोशन का खतरा मंडरा रहा है। नए पदोन्नति नियम के तहत डीपीसी शुरू हुई है। पांढुर्णा में 32 हेड कॉन्स्टेबल को वापस आरक्षक बना दिया गया है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश पुलिस में करीब 15 हजार कर्मचारियों पर डिमोशन का खतरा मंडरा रहा है।
- ये सभी पिछले पांच साल से कार्यवाहक पदोन्नति पर ऊंचे पद संभाल रहे हैं।
- नया पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद नियमित डीपीसी प्रक्रिया शुरू हुई है।
- पांढुर्णा जिले में 32 हेड कॉन्स्टेबल को वापस आरक्षक बना दिया गया है।
- शुरुआती समीक्षा में करीब एक हजार कर्मचारी सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
इसके बाद पुलिस विभाग में नियमित विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी (Departmental Promotion Committee) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जो कर्मचारी तय मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उनसे कार्यवाहक प्रभार वापस ले लिया जाएगा।
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पांढुर्णा से शुरुआत
इन सभी को दोबारा उनके मूल पद यानी आरक्षक पर पदस्थ किया गया है। अब ये सभी कर्मचारी आरक्षक के तौर पर ही ड्यूटी करेंगे। पुलिस विभाग ने साफ किया है कि यह कार्रवाई नई पदोन्नति नियमावली और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के मुताबिक ही की गई है।
कैसे होगा फैसला
कितने प्रभावित होंगे
क्यों बनी यह नौबत
साल 2021 में सरकार ने कार्यवाहक यानी ऑफिसिएटिंग पदोन्नति देकर उच्च पदों का प्रभार बांटना शुरू किया। साल 2022 में आरक्षक से लेकर टीआई स्तर तक बड़ी संख्या में कार्यवाहक पदस्थापन हुए।
2023 में पुलिस मुख्यालय ने इस व्यवस्था का दायरा और बढ़ा दिया। 2024 तक कई जिलों में कार्यवाहक कर्मचारी नियमित पदों की तरह काम करते रहे।
आखिरकार 2025 में मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 लागू हुआ, जिसके बाद नियमित डीपीसी का रास्ता साफ हुआ। अब 2026 में डीपीसी के साथ समीक्षा शुरू हो चुकी है और प्रभार वापस लेने की कार्रवाई भी प्रारंभ हो गई है।
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एमपी में कितने पुलिसकर्मी
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9 साल से अटके प्रमोशन
पीएचई विभाग का हाल
यदि पदोन्नति समय पर नहीं हुई, तो ईएनसी जैसे शीर्ष पद भी प्रभार के भरोसे ही चलेंगे। नई वरिष्ठता सूची बनने के बाद भी अगर प्रमोशन नहीं हुए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। अधिकारियों की इस कमी से विभागीय कामकाज और परियोजनाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्रमोशन का नया फॉर्मूला
प्रमोशन लिस्ट भी दो तरह से बनाई जाएगी। क्लास-1 अधिकारियों, जैसे डिप्टी कलेक्टर के लिए लिस्ट मेरिट और सीनियरिटी दोनों के आधार पर बनेगी। वहीं क्लास-2 और उससे नीचे के पदों के लिए लिस्ट सिर्फ सीनियरिटी के आधार पर तैयार होगी।
एसीआर की शर्त जरूरी
कर्मचारियों में चिंता
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर आम नागरिकों को यह समझने में मदद करती है कि सरकारी विभागों में लंबे समय तक अटके रहने वाले फैसले किस तरह कर्मचारियों और आम जनता को दी जाने वाली सेवाओं दोनों को प्रभावित करते हैं। यह रिपोर्ट सिर्फ तथ्यों पर आधारित है, किसी पर आरोप नहीं लगाती।
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