सरकारी नौकरी के बाद भी गायब!, पुलिस भर्ती में चयन के बावजूद 500 नव-आरक्षक ट्रेनिंग से दूर
Ramanand Tiwari | Dec 27, 2025, 21:21 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती में चयन के बावजूद 500 नव-आरक्षक ट्रेनिंग से गायब हैं। यह मामला पुलिस विभाग के लिए गंभीर चिंताओं का कारण बन गया है। क्या यह फर्जीवाड़े का हिस्सा है? जानिए पूरी जानकारी।
BHOPAL. प्रदेश में जहां लाखों युवा सरकारी नौकरी पाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। पुलिस आरक्षक भर्ती 2023 में चयनित करीब 500 उम्मीदवार ऐसे हैं जो ट्रेनिंग के लिए पहुंचे ही नहीं। यह स्थिति पुलिस महकमे के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
इन सभी चयनित आरक्षकों को पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (PTS) आवंटित कर दिए गए थे। इसके बावजूद न तो वे ट्रेनिंग के लिए पहुंचे और न ही उन्होंने अनुपस्थिति का कोई कारण बताया। पुलिस मुख्यालय ने कई बार रिमाइंडर भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
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सूत्रों के मुताबिक, यह मामला अब सिर्फ अनुपस्थिति का नहीं बल्कि अनुशासनात्मक उल्लंघन का बन गया है। पुलिस विभाग ऐसे आरक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, जिसमें नियुक्ति रद्द होने तक की संभावना जताई जा रही है।
पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2023 के बाद प्रदेश की विभिन्न यूनिटों में 4000 से अधिक चयनित उम्मीदवारों ने आमद दी थी। नियम के अनुसार, सभी को 9 महीने की अनिवार्य ट्रेनिंग दी जानी थी, जिसके लिए पहले ही ट्रेनिंग सेंटर अलॉट कर दिए गए थे।
फिलहाल प्रदेश के 8 पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों में केवल 3498 नव-आरक्षक ही ट्रेनिंग ले रहे हैं। यानी चयन के बावजूद करीब 500 उम्मीदवार सिस्टम से बाहर हैं।
वर्ष 2023 में पुलिस ने 7500 आरक्षक पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था। व्यापमं द्वारा आयोजित परीक्षा के बाद 7411 उम्मीदवार सफल घोषित किए गए।
इनमें से करीब 13% पद ओबीसी आरक्षण से जुड़े कोर्ट केस के चलते रिजर्व रखे गए। बाकी लगभग 6000 नाम मुख्य सूची में शामिल किए गए।
चयन सूची जारी होने के बाद करीब 5000 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दिए गए। लेकिन इनमें से करीब 1000 उम्मीदवारों ने ज्वाइनिंग ही नहीं दी, जबकि 4000 ने यूनिटों में आमद दर्ज कराई।
यूनिट में आमद देने के बाद सभी चयनित उम्मीदवारों को मेडिकल और फिटनेस प्रक्रिया पूरी कर 9 माह की ट्रेनिंग के लिए PTS भेजा जाना था। इसके आदेश 6 महीने पहले ही जारी हो चुके थे।
PHQ की प्रशिक्षण शाखा के अनुसार, “जो उम्मीदवार ट्रेनिंग के लिए आए हैं, उनका प्रशिक्षण जारी है। जो नहीं आए, उनके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।” वहीं चयन एवं भर्ती शाखा के अधिकारी इस मुद्दे पर खामोश बने हुए हैं।
इसी भर्ती प्रक्रिया में फिंगरप्रिंट क्लोनिंग और बायोमेट्रिक फर्जीवाड़ा भी सामने आ चुका है। अब तक 20 से अधिक FIR दर्ज की जा चुकी हैं और 32 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।
जांच में सामने आया कि सिलिकॉन फिंगरप्रिंट क्लोन बनाए गए आधार कार्ड में फोटो अपडेट कर सॉल्वर बैठाए गए। ग्वालियर, भिंड और मुरैना में सक्रिय गिरोह 5 से 10 लाख रुपये में फर्जी चयन का खेल सामने आया।
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यह आशंका भी जताई जा रही है कि फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद कई संदिग्ध उम्मीदवार खुद ही सामने आने से बच रहे हैं। इसी कारण चयन के बावजूद वे न यूनिट पहुंचे और न ट्रेनिंग सेंटर।
पुलिस भर्ती जैसे संवेदनशील सिस्टम में चयन के बाद गैरहाजिरी ट्रेनिंग से दूरी। फर्जीवाड़े की पृष्ठभूमि ये सभी संकेत भर्ती प्रक्रिया की गहन समीक्षा और सख्त निगरानी की मांग कर रहे हैं।
ट्रेनिंग सेंटर अलॉट, फिर भी गैरहाजिर
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अनुशासन पर बड़ा सवाल
4000 से ज्यादा ने दी आमद, 500 अब भी बाहर
8 ट्रेनिंग सेंटर, सिर्फ 3498 कैंडिडेट मौजूद
पुलिस ट्रेनिंग सेंटर और प्रशिक्षुओं की संख्या
| ट्रेनिंग सेंटर का नाम (PTS) | प्रशिक्षण ले रहे आरक्षकों की संख्या |
| PTS इंदौर | 996 |
| PTS भौंरी | 526 |
| PTS तिगरा (ग्वालियर) | 554 |
| PTS रीवा | 472 |
| PTS सागर | 305 |
| PTS उमरिया | 232 |
| PTS पचमढ़ी | 207 |
| PTS उज्जैन | 206 |
| कुल योग | 3498 |
भर्ती की पूरी कहानी: 7500 पद, 7411 सफल
आरक्षण विवाद बना बाधा
शुरुआत में ही 1000 ने नहीं दी ज्वाइनिंग
फिटनेस के बाद ट्रेनिंग जरूरी थी
PHQ की प्रशिक्षण शाखा के अनुसार, “जो उम्मीदवार ट्रेनिंग के लिए आए हैं, उनका प्रशिक्षण जारी है। जो नहीं आए, उनके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।” वहीं चयन एवं भर्ती शाखा के अधिकारी इस मुद्दे पर खामोश बने हुए हैं।
फर्जीवाड़े की परछाईं भी शक के घेरे में
सॉल्वर गैंग का बड़ा नेटवर्क
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क्या इसी वजह से गायब हैं 500 आरक्षक?
सिस्टम के लिए चेतावनी
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