एमपी में एक साल में 69 हजार मजदूरों की मौत, सभी की उम्र 60 से कम, विभाग करेगा जांच

मध्य प्रदेश में संबल योजना के तहत पंजीकृत 69 हजार मजदूरों की मौत ने सरकार को चौंका दिया है। हैरानी की बात यह है कि मरने वाले सभी श्रमिकों की उम्र 60 साल से कम थी। पिछले दो वर्षों के मुकाबले इस बार मौतों का आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

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Aman Vaishnav
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mp sabal yojana labour death investigation 2025

NEWS IN SHORT

  • मध्य प्रदेश में साल 2025 में 69 हजार असंगठित श्रमिकों की मौत हुई है।

  • मरने वाले सभी श्रमिक 60 साल से कम उम्र के थे।

  • सामान्य मौतों पर 2 लाख और दुर्घटना पर 4 लाख रुपए का मुआवजा मिलता है।

  • 2024 के मुकाबले इस साल मौतों की संख्या हैरान कर देने वाली है।

  • सरकार अब मजदूरों के लिए बीपी, शुगर और हार्ट चेकअप अनिवार्य करेगी।

News In Detail

मध्य प्रदेश के श्रमिकों से जुड़ी एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आई है। साल 2025 में मध्य प्रदेश में असंगठित श्रमिकों की मौत ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। ये सभी श्रमिक मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना में पंजीकृत थे। हैरानी की बात यह है कि इन श्रमिकों में से सभी की उम्र 18 साल से 60 साल से बीच थी। वहीं 90% मौतें सामान्य रजिस्टर्ड हुई हैं। 

इस बार श्रम विभाग इस बात की जांच करेगा कि इन मौतों के पीछे क्या वजह है। इन मौतों पर हर साल करीब 1200 से 1500 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जा रहा है।

कितना मिलता है मुआवजा

संबल योजना में पंजीकृत श्रमिकों की सामान्य मौत पर परिवार को 2 लाख रुपए का मुआवजा मिलता है। वहीं दुर्घटना में मौत हो जाती है तो 4 लाख रुपए दिए जाते हैं। 2024-25 के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान 57 हजार सामान्य मौतें हुई हैं।

 इन लोगों के परिवारों को कुल 1140 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया गया है। वहीं, दुर्घटनाओं में 5800 मौतें हुई हैं। इन पर 232 करोड़ रुपए मुआवजा बांटा गया है।

2025 में हुई 69 हजार श्रमिकों की मौत

2023 में राज्य में 48 हजार और 2024 में 50 हजार श्रमिकों की मौत हुई थी। साल 2025 में ये संख्या बढ़कर 69 हजार तक पहुंच गई है। श्रम विभाग के सचिव रघुराज माधव राजेंद्रन ने 2 फरवरी को सभी कलेक्टरों को एक पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं।

कहा कि जो श्रमिक काम करते वक्त जान गंवा रहे हैं, उनकी मौत के कारणों की जांच की जाए। विभाग का कहना है कि राज्य में औसत आयु करीब 67 साल है, जबकि कामकाजी आयु को 60 साल तक माना जाता है।

मजदूरों की सेफ्टी सबसे पहले

अब से मजदूरों के लिए बीपी, शुगर और कार्डियक रिस्क जैसी जांच की जाएगी। इसके लिए श्रम विभाग, स्वास्थ्य, पुलिस, परिवहन और स्थानीय प्रशासन मिलकर काम करेंगे।

काम के दौरान हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, ग्लव्स, मास्क और अन्य सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू किया जाएगा। साथ ही इनकी नियमित निगरानी की जाएगी। इसके अलावा, इंडस्ट्री एरिया, निर्माण स्थल, ईंट-भट्टों के पास, कारखानों और कृषि क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे।

2 करोड़ असंगठित श्रमिक, 91 लाख से ज्यादा महिलाएं

मध्य प्रदेश में करीब दो करोड़ असंगठित मजदूर काम कर रहे हैं। इनमें 42 तरह के काम शामिल हैं। जैसे कि कारपेंटर, पेंटर, मिस्त्री, इलेक्ट्रीशियन, फिटर, वेंडर, प्लंबर, मैकेनिक। डामर का काम करने वाले और रोड-भवन बनाने वाले श्रमिक भी इसमें शामिल हैं।

अब तक राज्य में लगभग 2 करोड़ असंगठित श्रमिकों ने अपना पंजीकरण करा लिया है। इनमें से 1.16 करोड़ पुरुष और 91 लाख से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं।

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