कुछ लोग संत कम, मेरी सास ज्यादा बन गए हैं, हर बात पर मुंह फुला लेते हैं-हर्षा रिछारिया
Manya Jain | Jul 31, 2026, 15:30 IST
mp sadhvi harshanand giri on women safety
साध्वी हर्षानंद गिरि द्वारा कुछ संतों पर निशाना साधने की खबर है। संतों की तुलना सास से करते हुए उन्होंने पहनावे पर टिप्पणी का आरोप लगाया और महिला सुरक्षा पर भी कड़े सवाल उठाए।
समझें क्या है पूरा मामला...
- साध्वी हर्षानंद गिरि ने कुछ संतों पर निशाना साधा है।
- उनका कहना है कि संत उनके खान-पान और पहनावे पर टिप्पणी करते हैं।
- उन्होंने महिला सुरक्षा को लेकर भी बड़ा सवाल उठाया।
- उन्होंने संतो की तुलना सास से की।
क्या बोलीं साध्वी हर्षानंद गिरि
साध्वी (हर्षा रिछारिया) ने समाज में महिला सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि जब दो महीने की बच्ची भी सुरक्षित नहीं, तो वे कहां जाएं। उन्होंने कहा कि जो संत परिवार से दूर रहने को कहते हैं, वे पहले उनकी सुरक्षा की गारंटी लें।
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साध्वी ने यह भी कहा कि असली संत में क्रोध और ईर्ष्या नहीं होती। उनके मुताबिक संतों का गुस्सा पानी के बुलबुले जैसा होना चाहिए, जो जल्दी खत्म हो जाए।
उज्जैन वाली घटना का पूरा किस्सा
मीडिया ने उनसे पूछा कि साध्वी होकर भी वे माता-पिता के साथ क्यों रहती हैं। कुछ संतों का आरोप था कि साध्वी को मोह-माया और रिश्तों से दूर रहना चाहिए।
इस पर साध्वी ने जवाब दिया कि जिन्हें आपत्ति है, वे पहले खुद के लिए आश्रम बना चुके हैं। उनका अभी अपना कोई आश्रम नहीं है।
साध्वी ने कहा कि उनके पास सिर्फ दो विकल्प हैं। पहला, गुरुजी का आश्रम, जहां वे ज्यादा दिन नहीं रह सकतीं। दूसरा, माता-पिता का घर, जहां वे खुद को सबसे सुरक्षित मानती हैं।
दो दिन पहले क्या हुआ था
इस दौरान हर्षा रिछारिया ने कुछ आश्रमों की व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि आश्रमों में महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि कुछ संत छिपकर ब्यूटी पार्लर जाते हैं।
इन बयानों के बाद संत समाज के एक वर्ग ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इसी विवाद के बाद उनका ताजा वीडियो सामने आया है।
हर्षा को किसने दी संन्यास दीक्षा
दीक्षा के दौरान हर्षा से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म कराया गया था। यह अनुष्ठान अक्षय तृतीया के दिन शिप्रा नदी के तट पर हुआ था। इसके बाद ही वे मॉडल से साध्वी हर्षानंद गिरि बनीं।
हर्षा से जुड़े अन्य विवाद
शुरुआत में खुद को साध्वी कहने पर भी उन्हें आपत्तियों का सामना करना पड़ा था। बाद में उज्जैन में दीक्षा लेकर वे विधिवत साध्वी बनीं।
उन्होंने एआई (AI – Artificial Intelligence) की मदद से बनाई गई फर्जी वीडियो का आरोप भी लगाया था। उनका कहना था कि इससे उनकी छवि खराब करने की कोशिश हुई।
धमकियों और विरोध के बीच उनके मन में धर्म का रास्ता छोड़ने का विचार भी आया था। बाद में वे अपने फैसले पर कायम रहीं।
पेशवाई के रथ में बैठने को लेकर भी अखाड़े में मतभेद हुए थे। इसके अलावा उनके पुराने लुक और भगवा वेश, दोनों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आती रही हैं।
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