सतपुड़ा अग्निकांड की भेंट चढ़ी नर्सिंग भर्ती 2019, स्वास्थ्य मंत्री बोले- अब रिकॉर्ड देना नामुमकिन

मध्यप्रदेश के सतपुड़ा भवन अग्निकांड में 2019 की नर्सिंग भर्ती का पूरा रिकॉर्ड जलकर राख हो गया है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने विधानसभा में इसकी पुष्टि की है। वहीं इस जवाब के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं...

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Amresh Kushwaha
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mp satpura bhawan fire nursing recruitment 2019 records destroyed

BHOPAL.मध्यप्रदेश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में सतपुड़ा भवन का धुंआ एक बार फिर चर्चा में है। इसने न जाने कितने भविष्य और सवालों को अपनी आगोश में ले लिया था।

साल 2023 के भीषण अग्निकांड की तपिश अब विधानसभा तक पहुंच गई है।

प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने सदन में कहा कि फरवरी 2019 में हुई नर्सिंग ऑफिसर भर्ती से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड जलकर राख हो चुका है। अब इस भर्ती का हिसाब-किताब देना सरकार के लिए लगभग नामुमकिन है।

नर्सिंग भर्ती की सभी फाइल्स जल गईं- डिप्टी सीएम

12 जून 2023 को सतपुड़ा भवन की तीसरी, चौथी, पांचवीं और छठी मंजिल पर भीषण आग लग गई थी। इसी आग में नर्सिंग शाखा की सारी नस्तियां (फाइल्स) भी जलकर राख हो गई थीं।

हाल ही में एमपी विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक मधु भगत ने 2019 की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

इसके जवाब में मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि नर्सिंग भर्ती की सारी फाइल्स आग में जल गईं, इसलिए अब जानकारी देना मुश्किल है।

विधायक के तीखे सवाल पर सरकार मजबूर

विधायक मधु भगत ने नर्सिंग ऑफिसर भर्ती, CHO प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों की पात्रता और बॉन्ड के बारे में जानकारी मांगी थी।

उन्होंने यह भी पूछा था कि अगर बॉन्ड की शर्तें तोड़ी जाएं, तो उस पर क्या कार्रवाई होती है?

वहीं, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के रिकॉर्ड नष्ट होने वाले बयान ने इन तमाम सवालों पर फिलहाल पर्दा डाल दिया है।

योग्यता के खेल में उलझे 4 हजार अभ्यर्थी

यह भर्ती 8 फरवरी 2019 को निकाली गई थी, जो शुरू से ही विवादों के घेरे में रही। विवाद के मुख्य दो कारण थे:

  1. सीएचओ (CHO) की एंट्री: ट्रेनिंग ले रहे उम्मीदवारों को नर्सिंग ऑफिसर पद के लिए पात्र मान लेना।

  2. नियमों में बदलाव: पहले 10वीं पास और 18 माह का प्रशिक्षण पर्याप्त था, लेकिन बीच में ही नियम बदलकर 12वीं (PCB) और 24 माह का प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया गया।

नियमों में इस अचानक बदलाव (Amendment) के कारण हजारों उम्मीदवार रेस से बाहर हो गए थे। नतीजा यह हुआ कि करीब चार हजार अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वहीं, लगभग एक हजार पदों पर हुई इस भर्ती का पूरा कच्चा-चिट्ठा अब फाइलों के साथ जल चुका है।

तब सुरक्षित था, अब गायब कैसे?

दिलचस्प बात यह है कि जून 2023 के अग्निकांड के तुरंत बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और विभाग ने दावा किया था कि मुख्य दस्तावेज सुरक्षित हैं, क्योंकि वे आयुक्त कार्यालय या शासन के पास होते हैं।

अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि स्थापना शाखा का रिकॉर्ड अलग विंग में था, तो फिर सदन में रिकॉर्ड जलने की बात क्यों कही जा रही है? क्या 2019 की नर्सिंग भर्ती का रिकॉर्ड जानबूझकर आग के हवाले हुआ या यह प्रशासनिक लापरवाही है?

लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू की जांच पर भी संकट

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, केवल भर्ती ही नहीं बल्कि सर्विस बुक, तबादले, कोविड काल के खर्च का विवरण और लोकायुक्त व ईओडब्ल्यू में लंबित शिकायतों के दस्तावेज भी प्रभावित हुए हैं।

विभाग अब सर्विस बुक को दोबारा तैयार करने की कोशिश तो कर रहा है, लेकिन पुराने भ्रष्टाचार या अनियमितताओं से जुड़े सबूतों को जुटाना अब नामुमकिन सा लग रहा है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज घोटाला सुरक्षित है क्योंकि उसका रिकॉर्ड डीएमई (DME) कार्यालय में है।

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