उमंग सिंघार का खेल मंत्री पर हमला: स्कूलों में खेल शिक्षक नहीं, खिलाड़ियों को भी नहीं मिला पूरा हक?
Ramanand Tiwari | Jun 02, 2026, 19:52 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्य प्रदेश के स्कूलों में 1.21 लाख खेल शिक्षक नहीं हैं। खेलो MP में पुरस्कार राशि में कटौती और पारदर्शिता पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
समझें पूरा मामला...
- प्रदेश के 1.22 लाख स्कूलों में से 1.21 लाख में खेल शिक्षक नहीं हैं।
- भोपाल के 991 सरकारी स्कूलों में केवल 5 खेल शिक्षक पदस्थ हैं।
- खेलो MP में बैडमिंटन पुरस्कार राशि बाद में दो खिलाड़ियों में बांटी गई।
- खिलाड़ियों ने पारदर्शिता और नियमों के पहले खुलासे की मांग की।
- विपक्ष ने खेल नीति और ढांचे की कमजोरियों पर गंभीर सवाल उठाए।
वहीं दूसरी ओर, हाल ही में आयोजित खेलो MP ( Khelo MP) यूथ गेम्स में बैडमिंटन खिलाड़ियों द्वारा पुरस्कार राशि में कटौती के आरोपों ने भी नई बहस छेड़ दी है।
सिंघार का सवाल है कि जब स्कूलों में बच्चों को खेल सिखाने वाले शिक्षक ही नहीं हैं, तो खेल प्रतिभाएं तैयार कैसे होंगी? वहीं खिलाड़ियों का आरोप है कि उन्हें घोषित पुरस्कार राशि का पूरा लाभ भी नहीं मिला। ऐसे में खेल नीति, खेल प्रबंधन और खिलाड़ियों के भरोसे पर एक साथ कई सवाल खड़े हो गए हैं।
उमंग सिंघार ने किया दावा
खिलाड़ियों का दावा, घोषित राशि बाद में दो खिलाड़ियों में बांट दी गई। सर्कुलर में राशि विभाजन का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। विपक्ष ने इसे खेल प्रतिभाओं के साथ अन्याय बताया।
खेल मंत्री विश्वास सारंग जी, जवाब दीजिए...
मध्यप्रदेश में 1.22 लाख स्कूल हैं, लेकिन 1.21 लाख स्कूलों में स्पोर्ट्स टीचर नहीं हैं।
राजधानी भोपाल के 991 सरकारी स्कूलों में सिर्फ 5 खेल शिक्षक पदस्थ हैं।
जब बच्चों को खेल सिखाने वाला ही नहीं होगा, तो ओलंपिक पदक, खेल प्रतिभा और…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) June 2, 2026
बिना खेल शिक्षक कैसे बनेंगे खिलाड़ी?
सिंघार के मुताबिक, लाखों बच्चों के पास खेल सीखने के लिए प्रशिक्षित शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में जमीनी स्तर से नई प्रतिभाएं तैयार करने का दावा कितना वास्तविक है, यह बड़ा सवाल है।
भोपाल की तस्वीर भी चौंकाने वाली
खेलो MP ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें
खिलाड़ियों का दावा: नियम पहले नहीं बताए
घोषित पुरस्कार राशि...
- प्रथम स्थान : 31,000 रुपए
- द्वितीय स्थान : 21,000 रुपए
- तृतीय स्थान : 11,000 रुपए
खिलाड़ियों के साथ नहीं बरती पारदर्शिता
बड़ा सवाल: खेलों की बुनियादी व्यवस्था मजबूत है?
खेल विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विपक्ष का आरोप: प्रचार ज्यादा, ढांचा कमजोर
क्या खेल नीति के केंद्र में खिलाड़ी हैं या आयोजन?
यही वजह है कि उमंग सिंघार के सवाल केवल राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि खेल व्यवस्था की बुनियादी चुनौतियों पर भी बहस खड़ी कर रहे हैं। अब नजर इस बात पर है कि मप्र खेल विभाग इन सवालों का जवाब किस तरह देता है।
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