कमाई का जरिया बनी MP TET परीक्षा: सरकार कमाएगी 15 करोड़!, शिक्षकों ने लगाए आरोप
Manya Jain | Aug 19, 2026, 16:07 IST
mp tet exam fee teachers protest
मध्यप्रदेश में TET परीक्षा शुल्क को लेकर शिक्षक संगठनों ने विरोध शुरू किया है। 1000 रुपए शुल्क से सरकार को करीब 15 करोड़ रुपए मिलेंगे। शिक्षक इसे माफ करने और परीक्षा ऑफलाइन कराने की मांग कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मध्यप्रदेश सरकार प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों की पात्रता परीक्षा ले रही है। इसके लिए एक हजार रुपए शुल्क तय किया गया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह शुल्क सही नहीं है, क्योंकि शिक्षक नई नौकरी के लिए नहीं बल्कि सेवा बचाने के लिए परीक्षा दे रहे हैं।
संगठनों ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मिलकर शुल्क माफ करने की मांग रखने की तैयारी की है। इस बीच शिक्षकों से फिलहाल फॉर्म नहीं भरने की अपील भी की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों से मध्यप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी MPTET ले रही राज्य सरकार पर परीक्षा शुल्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारी चयन मंडल ने परीक्षा के लिए एक हजार रुपए शुल्क तय किया है। प्रदेश में करीब 1.50 लाख शिक्षक इसके दायरे में आने का अनुमान है।
ऐसे में केवल परीक्षा शुल्क से करीब 15 करोड़ रुपए जमा होंगे। शिक्षक संगठनों का दावा है कि परीक्षा के आयोजन पर इससे काफी कम राशि खर्च होगी।
शिक्षक संगठनों ने एक हजार रुपए शुल्क का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि ये शिक्षक नई नियुक्ति के लिए परीक्षा नहीं दे रहे हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में सेवा में बने रहने के लिए पात्रता परीक्षा दे रहे हैं। संगठनों ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर परीक्षा शुल्क माफ करने की मांग करने की तैयारी की है। तब तक प्रदेश के शिक्षकों से फॉर्म नहीं भरने की अपील भी की गई है।
प्रदेश में वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने पर ही सेवा में बनाए रखने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में दिया था। इसके बाद स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के करीब 1.50 लाख शिक्षक इस परीक्षा के दायरे में आने का अनुमान है।
कर्मचारी चयन मंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर प्राथमिक और माध्यमिक वर्ग के शिक्षकों के लिए 21 अगस्त से 9 सितंबर तक आवेदन प्रक्रिया तय की है। इसके लिए एक हजार रुपए परीक्षा शुल्क के अलावा एमपी ऑनलाइन और कियोस्क का शुल्क भी अलग से देना होगा।
शिक्षक संगठनों ने शुल्क का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मुलाकात की तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षक संयुक्त मोर्चा की ओर से 26 अगस्त तक दोनों से मुलाकात का प्रयास किया जा रहा है।
संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में सरकार परीक्षा करा रही है, इसलिए इसका खर्च भी शासन को ही उठाना चाहिए। शिक्षकों से शुल्क लेना उचित नहीं है, क्योंकि वे किसी नई नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित देशभर के शिक्षक 30 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटने की तैयारी में हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने और शिक्षकों के हित में फैसला लेने की मांग की जाएगी। राज्य अध्यापक संघ, शासकीय शिक्षक संगठन समेत अन्य संगठनों ने प्रदेश के शिक्षकों से दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है।
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने सेवारत शिक्षकों की टीईटी निःशुल्क कराने की मांग की है। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि यह परीक्षा शासन और शिक्षा विभाग के निर्देशों के पालन का हिस्सा है, इसलिए इसका खर्च शिक्षकों से लेना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले सीएम राइज स्कूल, उत्कृष्ट विद्यालय और मॉडल स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए हुई परीक्षाओं का खर्च शासन ने उठाया था। ऐसे में सेवारत शिक्षकों की टीईटी के लिए शुल्क लेना समझ से परे है।
उपेंद्र कौशल ने कहा कि शिक्षा विभाग के पास सभी सेवारत शिक्षकों का सेवा और शैक्षणिक रिकॉर्ड पहले से मौजूद है। विभाग यह भी जानता है कि कौन से शिक्षक टीईटी पास कर चुके हैं और किन्हें परीक्षा देना जरूरी है।
उनका कहना है कि सभी शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन कराने के बजाय विभाग को टीईटी से वंचित शिक्षकों की सूची जारी करनी चाहिए। इससे शिक्षकों के बीच भ्रम की स्थिति दूर होगी और यह साफ हो सकेगा कि किन्हें परीक्षा में शामिल होना है। विभाग संबंधित शिक्षकों को सीधे निर्देश जारी कर भी सूचना दे सकता है।
शासकीय शिक्षक संगठन ने ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन टीईटी कराने की मांग की है। संगठन के मुताबिक, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, तकनीकी संसाधनों और सर्वर से जुड़ी दिक्कतों के कारण शिक्षकों को परेशानी हो सकती है। संगठन का मानना है कि परीक्षा के सुचारु और पारदर्शी संचालन के लिए ऑफलाइन परीक्षा बेहतर विकल्प है।
उपेंद्र कौशल (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश) ने कहा कि यह परीक्षा शासन और शिक्षा विभाग के निर्देशों के पालन का हिस्सा है, इसलिए इसका खर्च शिक्षकों से लेना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सीएम राइज स्कूल, उत्कृष्ट विद्यालय और मॉडल स्कूलों की नियुक्ति परीक्षाओं का खर्च पहले शासन ने ही उठाया था।
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संगठनों ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मिलकर शुल्क माफ करने की मांग रखने की तैयारी की है। इस बीच शिक्षकों से फिलहाल फॉर्म नहीं भरने की अपील भी की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों से मध्यप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी MPTET ले रही राज्य सरकार पर परीक्षा शुल्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारी चयन मंडल ने परीक्षा के लिए एक हजार रुपए शुल्क तय किया है। प्रदेश में करीब 1.50 लाख शिक्षक इसके दायरे में आने का अनुमान है।
ऐसे में केवल परीक्षा शुल्क से करीब 15 करोड़ रुपए जमा होंगे। शिक्षक संगठनों का दावा है कि परीक्षा के आयोजन पर इससे काफी कम राशि खर्च होगी।
शिक्षक क्यों कर रहे विरोध
क्यों देनी पड़ रही है यह परीक्षा
कर्मचारी चयन मंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर प्राथमिक और माध्यमिक वर्ग के शिक्षकों के लिए 21 अगस्त से 9 सितंबर तक आवेदन प्रक्रिया तय की है। इसके लिए एक हजार रुपए परीक्षा शुल्क के अलावा एमपी ऑनलाइन और कियोस्क का शुल्क भी अलग से देना होगा।
शुल्क माफी की मांग तेज
संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में सरकार परीक्षा करा रही है, इसलिए इसका खर्च भी शासन को ही उठाना चाहिए। शिक्षकों से शुल्क लेना उचित नहीं है, क्योंकि वे किसी नई नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं।
30 अगस्त को जंतर-मंतर पर जुटेंगे शिक्षक
फ्री और ऑफलाइन परीक्षा की मांग
उन्होंने कहा कि इससे पहले सीएम राइज स्कूल, उत्कृष्ट विद्यालय और मॉडल स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए हुई परीक्षाओं का खर्च शासन ने उठाया था। ऐसे में सेवारत शिक्षकों की टीईटी के लिए शुल्क लेना समझ से परे है।
वंचित शिक्षकों की सूची जारी करने की मांग
उनका कहना है कि सभी शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन कराने के बजाय विभाग को टीईटी से वंचित शिक्षकों की सूची जारी करनी चाहिए। इससे शिक्षकों के बीच भ्रम की स्थिति दूर होगी और यह साफ हो सकेगा कि किन्हें परीक्षा में शामिल होना है। विभाग संबंधित शिक्षकों को सीधे निर्देश जारी कर भी सूचना दे सकता है।
ऑनलाइन नहीं, ऑफलाइन परीक्षा की मांग
एक्सपर्ट कोट्स
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8 साल बाद मिली खुशी, पर TET से उलझा MP में 35 हजार शिक्षकों का प्रमोशन
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