भागीरथपुरा से मिला सबक, जल अभियान में सुधारे 1100 से ज्यादा लीकेज

मध्य प्रदेश के शहरों में जल और सीवर व्यवस्था सुधारने के लिए बड़ा अभियान चलाया गया। आयुक्त संकेत भोंडवे ने लीकेज और जल जांच से जुड़े आंकड़े जारी किए।

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Sanjay Dhiman
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urban administration improved water campaign, more than 1100 leakages

Photograph: (the sootr)

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NEWS IS SHORT

  • प्रदेश के नगरीय निकायों में जल और सीवर व्यवस्था सुधारने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
  • अब तक 1176 जल लीकेज की मरम्मत पूरी हुई, जिससे पानी की बर्बादी काफी हद तक रुकी।
  • पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 7619 जल सैंपल की जांच कराई गई।
  • जल और सीवर से जुड़ी अधिकांश शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है।
  • विभाग ने नागरिकों से समय पर शिकायत दर्ज कराने और सहयोग की अपील की है।

NEWS IN DETAIL

BHOPAL. इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों ने प्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग की आंखें खोल दी है। प्रदेश में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अब विभाग ने पूरे प्रदेश में एकसाथ सफाई और जल सुनवाई की। इस जल सुनवाई में पानी से जुड़ी 293 शिकायतें मिली। इस दौरान 1176 लीकेज सुधारे गए वहीं 7,600 से ज्यादा पानी के सैंपल लिए गए। 

जल लीकेज रोकने पर प्रशासन सख्त

भागीरथपुरा कांड के बाद से प्रदेशभर में पाइप लाइन लीकेज रोकने पर विभाग का फोकस है। इस अभियान में 1176 मरम्मत कार्य पूरे किए गए। नगर निगम क्षेत्रों में 547 लीकेज की मरम्मत की गई। नगर पालिका परिषदों में 315 लीकेज ठीक किए गए हैं। नगर परिषद क्षेत्रों में 314 जल लीकेज पर काम पूरा हो चुका है। इन सुधारों से पानी की बर्बादी को रोका जा सकेगा। 

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जल गुणवत्ता जांच को लेकर बड़ा अभियान

नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया इंदौर की घटना के बाद पानी की गुणवत्ता सबसे अहम हो गई है। इसी कारण 7619 जल नमूनों की जांच कराई गई है। नगर निगमों से 4498 जल नमूनों की जांच पूरी हुई। नगर पालिकाओं से 1496 और नगर परिषदों से 1625 नमूने लिए गए। इन जांचों से यह सुनिश्चित हुआ कि पानी स्वास्थ्य मानकों पर खरा उतरे। खराब गुणवत्ता मिलने पर तुरंत सुधार कार्रवाई की गई।

704 कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण

जल नमूना संग्रहण में 744 सफाई मित्र और अमृत मित्र तैनात रहे। इनके साथ 704 कर्मचारियों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण से जल परीक्षण प्रक्रिया ज्यादा सटीक और तेज हुई। मैदानी अमला अब पहले से ज्यादा जिम्मेदारी के साथ काम कर रहा है।

पानी की टंकियों और स्टोरेज सिस्टम की सफाई

ओएचटी जीएसआर और सम्प की नियमित सफाई पर जोर दिया गया। अब तक 684 जल भंडारण संरचनाओं और पानी की टंकियों की सफाई पूरी हो चुकी है। हर टंकी पर सफाई की तारीख ऑयल पेंटिंग से लिखी गई। अगली सफाई की तारीख भी स्पष्ट रूप से अंकित की गई है। इस व्यवस्था से निगरानी मजबूत होगी।

छोटे मरम्मत कार्यों से बड़ी राहत

जल आपूर्ति से जुड़े 1650 छोटे मरम्मत कार्य पूरे किए गए। नगर निगमों में 829 छोटे सुधार कार्य किए गए। नगर पालिकाओं में 440 और नगर परिषदों में 381 कार्य हुए। इन छोटे सुधारों से बड़ी तकनीकी दिक्कतें समय रहते सुलझ सकेंगी। 

284 शिकायतों का समाधान

जल से जुड़ी 293 शिकायतें दर्ज की गई थीं। इनमें से 284 शिकायतों का समाधान कर दिया गया है। सीवर लीकेज और मैनहोल ओवरफ्लो की 285 शिकायतें आईं। इनमें से 134 शिकायतों का निस्तारण हो चुका है। आयुक्त संकेत भोंडवे ने लंबित मामलों के शीघ्र समाधान निर्देश दिए। उन्होंने गुणवत्ता और समयसीमा दोनों पर जोर दिया है।

नागरिकों से सहयोग की अपील

विभाग ने नागरिकों से समस्याएं तय माध्यमों से बताने की अपील की। समय पर सूचना मिलने से कार्रवाई तेज और असरदार हो सकती है। प्रशासन मानता है कि जनता की भागीदारी से व्यवस्था मजबूत बनेगी।

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निष्कर्ष

प्रदेश में जल और सीवर व्यवस्था सुधार के प्रयास असर दिखा रहे हैं। लीकेज मरम्मत जल जांच और शिकायत समाधान में लगातार प्रगति हुई। कुछ सीवर शिकायतें अभी शेष हैं लेकिन समाधान की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन का प्रयास है कि इंदौर के भागीरथपुरा के बाद किसी दूसरे शहर में दूषित पानी से कोई घटना सामने न आ सके। 

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