/sootr/media/media_files/2026/01/11/clean-water-campaign-mp-government-2026-01-11-10-28-38.jpg)
News In Short
इंदौर के भागीरथपुरा कांड के बाद, मध्य प्रदेश सरकार ने स्वच्छ जल अभियान शुरू किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभियान को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लॉन्च किया है।
अभियान दो चरणों में चलेगा, पहले चरण की तारीख 10 जनवरी से 28 फरवरी तक है।
जल सुनवाई हर मंगलवार होगी, नागरिक अपनी शिकायतें 181 पर दर्ज कर सकते हैं।
तकनीकी निगरानी के तहत, पाइपलाइनों की जीआईएस मैपिंग और रोबोट से जांच होगी।
News In Detail
BHOPAL. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 10 जनवरी 2026 को स्वच्छ जल अभियान शुरू किया है।
इस अभियान का मकसद जल सुरक्षा, जल संरक्षण और लोगों को स्वच्छ पानी देना है। मुख्यमंत्री ने इस अभियान को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लॉन्च किया। इस दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल भी मौजूद थे।
प्रदेश में स्वच्छ जल अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। जल सुरक्षा व जल संरक्षण और जल से संबंधित शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिये 'जल सुनवाई' शुरू की जाएगी।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) January 10, 2026
आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित मंत्रीगण, महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, कमिश्नर, कलेक्टर, स्थानीय निकायों के… pic.twitter.com/kSN08IGtM7
जानें क्या है स्वच्छ जल अभियान
स्वच्छ जल अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य प्रदेश में नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल प्रदान करना है। इसमें जल शोधन यंत्रों और पानी संग्रहण टंकियों की सफाई की जाएगी। अभियान में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जल सुनवाई हर मंगलवार आयोजित की जाएगी, ताकि जनता अपनी शिकायतें दर्ज करवा सके और समय पर समाधान प्राप्त कर सके।
दो चरणों में चलेगा यह अभियान
स्वच्छ जल अभियान (Clean Water Campaign) को दो चरणों में चलाया जाएगा। पहला चरण 10 जनवरी से 28 फरवरी तक चलेगा। दूसरा चरण 1 मार्च से 31 मई तक होगा। इस दौरान, सभी जल शोधन संयंत्र और पेयजल टंकियों की सफाई की जाएगी।
इसके अलावा, जीआईएस मैप (GIS MAP) आधारित एप के जरिए निगरानी की जाएगी। इससे व्यवस्था की सही स्थिति की लगातार जांच की जा सकेगी।
/sootr/media/post_attachments/a7a14eca-19a.png)
लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि हर घर तक साफ पानी पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि दूषित पानी की आपूर्ति किसी भी हालत में नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि अभियान के दौरान कोई लापरवाही करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
IMP FACTS
तकनीक से होगी जल आपूर्ति की निगरानी
इस अभियान में तकनीकी पहलुओं को भी शामिल किया गया है। पेयजल और सीवेज पाइपलाइनों की जीआईएस मैपिंग की जाएगी। पाइपलाइन में होने वाली लीकेज की जांच के लिए रोबोट का इस्तेमाल होगा।
यह सुनिश्चित करेगा कि दूषित पानी की आपूर्ति रुक सके। इसके अलावा, सभी पेयजल स्रोतों की नियमित गुणवत्ता जांच की जाएगी। एसटीपी की सतत निगरानी भी की जाएगी।
/sootr/media/post_attachments/a3338147-dbb.png)
जल सुनवाई का होगा अनोखा आयोजन
इस अभियान का एक विशेष पहलू जल सुनवाई होगी, जो हर मंगलवार आयोजित की जाएगी। इस पहल के जरिए नागरिकों को अपनी शिकायतें सीधे दर्ज कराने का मौका मिलेगा।
पेयजल से जुड़ी शिकायतें181 नंबर पर दर्ज की जा सकेंगी। तय समय-सीमा में इन शिकायतों का समाधान कर आवेदकों को सूचित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह बड़ी चुनौती है, लेकिन सरकार इसे सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।
/sootr/media/post_attachments/700295c6-5d7.png)
Sootr Knowledge
जानें क्या है इंदौर का भागीरथपुरा कांड?
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 के आखिरी दिनों में दूषित पानी की वजह से एक बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया। दरअसल, नर्मदा जल की पाइपलाइन में सीवेज और ड्रेनेज लाइन का पानी मिल गया था।
इससे फीकल कोलिफॉर्म और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया फैल गए। इसके अलावा, इलाके के बोरवेल का गंदा पानी नर्मदा की पाइपलाइन में घुसकर पीने के पानी को जहरीला बना रहा था।
इस वजह से उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां फैल गईं, और 3200 से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए। इसे भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के मुख्य कारण के तौर पर बताया जा रहा है।
अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। एक 6 महीने का बच्चा भी इस संकट का शिकार हो गया। 414 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से ज्यादातर को छुट्टी मिल गई है। वहीं, अभी भी 45 लोग इलाज करा रहे हैं। अब तक (जनवरी 2026 तक ) भागीरथपुरा इलाके में नए मरीज निकल रहे हैं।
अब आगे क्या
सीएम मोहन यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ जल आपूर्ति व्यवस्था सुधारना नहीं है। दीर्घकालिक उपायों से प्रदेश को स्वच्छ पेयजल व्यवस्था में एक आदर्श बनाना है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश सरकार ने स्वच्छ जल अभियान शुरू किया है, जो दो चरणों में जल शोधन और पाइपलाइन सफाई करेगा। जीआईएस मैपिंग और रोबोट्स से निगरानी होगी। हर मंगलवार जल सुनवाई होगी, जहां नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने दीर्घकालिक सुधारों से प्रदेश को स्वच्छ जल का आदर्श बनाने का संकल्प लिया है।
ये खबर भी पढ़िए...
भागीरथपुरा में दूषित पानी ने ली एक और जान, 4 मरीज वेंटिलेटर पर कर रहे मौत से संघर्ष
भागीरथपुरा कांड: अधूरा इलाज बन रहा नई परेशानी, हालात सामान्य होने के दावों के बीच फिर मिले 12 मरीज
इंदौर भागीरथपुरा पर दो ACS आए, लेकिन मौतों के आंकड़े सब एक-दूसरे पर डाल रहे
इंदौर भागीरथपुरा कांड में शहर की छवि से लेकर निगम, प्रशासन को डैमेज करने की साजिश की आशंका
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us