MP निकाय चुनाव से पहले लिस्ट में 58 लाख वोटर की गड़बड़ी, आयोग करेगा जांच

Amresh Kushwaha | Jun 25, 2026, 11:00 IST
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मध्यप्रदेश में 58 लाख एक्स्ट्रा वोटर
मध्यप्रदेश में 58 लाख एक्स्ट्रा वोटर

मध्यप्रदेश में केंद्रीय और राज्य निर्वाचन आयोग की वोटर लिस्ट में 58 लाख मतदाताओं का अंतर मिला है। कई लोगों के नाम गांव और शहर दोनों सूचियों में हैं। साल 2027 के निकाय चुनाव से पहले यह बड़ी चुनौती है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश विधानसभा और नगरीय निकाय वोटर लिस्ट में 58 लाख मतदाताओं का फर्क मिला है।
  • कई मतदाताओं के नाम पंचायत और नगरीय निकाय, दोनों सूचियों में एक साथ दर्ज हैं।
  • एसआईआर के बाद विधानसभा सूची से डुप्लीकेट नाम हटे, पर निकाय सूची से नहीं हटे।
  • राज्य निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय चुनाव आयोग को पांच बार रिमाइंडर भेजा, फिर भी अपडेटेड लिस्ट नहीं मिली।
  • 2027 के जून-जुलाई में 413 नगरीय निकायों और करीब 23 हजार ग्राम पंचायतों के चुनाव होने हैं।

एक नंबर जो सब कुछ कह देता है

मध्यप्रदेश में निकाय चुनावों से पहले एक बड़ी गड़बड़ी पकड़ाई है। केंद्रीय चुनाव आयोग की विधानसभावार सूची में प्रदेश में पांच करोड़ 39 लाख मतदाता दर्ज हैं। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग की नगरीय निकाय और पंचायत सूची में यह संख्या पांच करोड़ 97 लाख है। यानी दोनों के बीच 58 लाख का फर्क है।

यह फर्क आते कहां से है? इसे समझने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने 22 अप्रैल से जिला स्तर पर वोटर लिस्ट की अलग से जांच शुरू की थी। इसी में यह चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है।

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तीन कारणों से बढ़ी है संख्या

राज्य निर्वाचन आयोग की शुरुआती जांच में इस अंतर के पीछे तीन मुख्य वजहें मिली हैं। पहली वजह है डुप्लीकेट मतदाता यानी ऐसे लोग जिनका नाम एक ही नगरीय निकाय में दो या उससे ज्यादा जगह दर्ज है। कुछ मामलों में एक ही जिले के दो अलग-अलग निकायों की सूचियों में भी एक ही व्यक्ति का नाम पाया गया है।

दूसरी बड़ी वजह है शिफ्टेड वोटर। ये वे लोग हैं जो गांव छोड़कर शहर आ बसे पर पंचायत की वोटर लिस्ट से अपना नाम नहीं कटवाया। इसलिए उनका नाम पंचायत और नगरीय निकाय दोनों जगह मौजूद है। तीसरी वजह वे मतदाता हैं जिनके नाम अनजाने में दो अलग पतों पर दर्ज हो गए हैं।

एसआईआर के बाद भी क्यों नहीं हुई सफाई

विधानसभा चुनावों से पहले एसआईआर की प्रक्रिया में केंद्रीय चुनाव आयोग की सूची से डुप्लीकेट नाम हटाए गए थे। वहीं, यही सफाई स्थानीय निकायों की सूची में नहीं हो सकी। इसकी वजह थी कि राज्य निर्वाचन आयोग को एसआईआर के बाद की अपडेटेड सूची ही नहीं मिली।

राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि आयोग ने केंद्रीय चुनाव आयोग को पांच-पांच बार रिमाइंडर भेजे। इसके बाद भी अपडेटेड वोटर लिस्ट नहीं मिली। मजबूरन आयोग को जिला स्तर पर अपने दम पर यह काम करना पड़ रहा है।

दो आयोगों के अलग-अलग तर्क

इस मामले में दोनों आयोगों की अलग दलील है। राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि बिना अपडेटेड लिस्ट के निकाय सूची ठीक करना मुश्किल है। दूसरी तरफ संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपी सिंह जादौन का कहना है कि केंद्रीय चुनाव आयोग की नीति के मुताबिक रिवीजन प्रक्रिया के दौरान सूची साझा नहीं की जाती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक चुनाव के समय नियमों के अनुसार अपडेटेड सूची दे दी जाएगी।

यानी एक संस्था को अभी सूची चाहिए और दूसरी कह रही है बाद में मिलेगी। यही पेंच अभी सबसे बड़ी समस्या है।

2027 के चुनावों पर असर

मध्यप्रदेश में 2027 के जून-जुलाई में 413 नगरीय निकायों के चुनाव होने हैं। इनके साथ करीब 23 हजार ग्राम पंचायतों में भी मतदान होगा। इतने बड़े चुनाव से पहले अगर 58 लाख का यह अंतर नहीं सुधरा, तो चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। डुप्लीकेट वोटरों की मौजूदगी फर्जी मतदान की आशंका को जन्म देती है।

अब आगे क्या होगा

राज्य निर्वाचन आयोग अब वोटर लिस्ट की जांच SDR यानी अनुपस्थित, शिफ्टेड, मृत और डुप्लीकेट नामों के आधार पर करेगा। इसके लिए राज्य निर्वाचन आयुक्त ने 29 जून को सभी जिला और उप जिला निर्वाचन अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक बुलाई है। इस बैठक में वोटर लिस्ट की पूरी तरह से समीक्षा की जाएगी। साथ ही, उसमें सुधार को लेकर विस्तार से चर्चा होगी।

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