सावधान! कहीं आप इस कैटेगिरी में तो नहीं हैं, वरना वोटर लिस्ट से कट सकता है नाम!
The Sootr | Jan 27, 2026, 19:06 IST
Photograph: (thesootr)
मध्यप्रदेश में वोटर लिस्ट से बिना सार्वजनिक जानकारी के नाम हटने का खतरा बन गया है। करीब 25% वोटर्स 'लॉजिकल डिस्क्रीपेंसी' और 'अनमैप्ड' श्रेणी में आ सकते हैं।
News In Short
वोटर लिस्ट से नाम कटने का खतरा, जानकारी न होने से भ्रम और डर।
सजप ने चुनाव आयोग से सूची सार्वजनिक करने की मांग की।
पश्चिम बंगाल में प्रक्रिया अपनाई गई थी, मध्यप्रदेश में नहीं।
कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल, राजनीतिक आधार पर नाम हटाने का आरोप।
News In Detail
प्रदेश में बड़ी संख्या में वोटर्स ऐसे हैं, जिनके नाम बिना सार्वजनिक जानकारी के हटाए जा सकते हैं। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल करीब 25 प्रतिशत वोटर्स ऐसे हैं, जिन पर नाम कटने का खतरा बना हुआ है।
अब इसे लेकर समाजवादी जन परिषद (सजप) ने हरदा और बैतूल कलेक्टर समेत मध्यप्रदेश के चुनाव आयोग से मांग की है कि पश्चिम बंगाल की तरह मध्यप्रदेश में भी ‘लॉजिकल डिस्क्रीपेंसी’ और ‘अनमैप्ड वोटर्स’ की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए, ताकि कोई भी मतदाता अंधेरे में न रहे।
25% वोटर क्यों खतरे में हैं?
mp voter list
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आप समझिए सीधी बात
इनमें से करीब 40 हजार वोटर्स ‘लॉजिकल डिस्क्रीपेंसी’ की श्रेणी में हैं। करीब 7 हजार वोटर्स ‘अनमैप्ड’ बताए जा रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद इन मतदाताओं की सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे आम वोटर्स में भ्रम और डर की स्थिति बन रही है।
‘अनमैप्ड’ मतदाता कौन हैं?
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सरल उदाहरण यह है...
‘लॉजिकल डिस्क्रीपेंसी’ क्या होती है?
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पश्चिम बंगाल में क्या हुआ?
अनुराग मोदी ने बताया कि पश्चिम बंगाल के मामले में चुनाव आयोग ने साफ निर्देश दिए थे कि 24 जनवरी 2026 तक ‘Logical Discrepancies’ और ‘Unmapped’ श्रेणी में आने वाले वोटर्स के नाम ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और शहरी वार्ड कार्यालयों में सार्वजनिक रूप से लगाए जाएं। सजप का कहना है कि मध्यप्रदेश में यह प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजनीतिक आधार पर नाम हटाने का आरोप
आंकड़ों पर भी सवाल
सजप की तीन मांगें...
- ‘Logical Discrepancies’ और ‘Unmapped’ वोटर्स की सूची तुरंत सार्वजनिक की जाए।
- राजनीतिक आधार पर किसी भी वोटर का नाम हटाने की कोशिश रोकी जाए।
- पूरी SIR प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों को शामिल कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल
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