पहले अपने धार्मिक स्थल संभालिए, फिर वक्फ की बात करें: जमीयत

Sandeep Kumar | Jul 09, 2026, 16:47 IST
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पहले अपने धार्मिक स्थल संभालिए, फिर वक्फ की बात करें
पहले अपने धार्मिक स्थल संभालिए, फिर वक्फ की बात करें

एमपी वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति हुई है। जमीयत उलेमा मध्यप्रदेश ने इसका कड़ा विरोध किया है। सदर मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। भोपाल के एक निकाह काजी ने भी इस्तीफा दे दिया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त हुए।
  • जमीयत उलेमा ने इस फैसले का विरोध किया।
  • मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने सरकार पर सवाल उठाए।
  • भोपाल निकाह काजी ने पद से इस्तीफा दे दिया।
  • मुस्लिम संगठनों ने नियुक्ति के खिलाफ प्रदर्शन किया।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में हाल ही में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया गया। सरकार का कहना है कि इससे बोर्ड में पारदर्शिता आएगी। लेकिन मुस्लिम संगठनों ने इस फैसले पर तीखी आपत्ति जताई है।

जमीयत उलेमा मध्यप्रदेश के सदर मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी धार्मिक संस्थाएं नहीं संभाल पा रहे, वे वक्फ की सुरक्षा कैसे करेंगे।

सरकार पर उठे तीखे सवाल

मुफ्ती अहमद ने कहा कि सरकार अभी अपने मजहबी मामले और मंदिरों से जुड़े विवाद देख रही है। उन्होंने सरकार से अदब के साथ अपील की कि वह अपनी चीजें संभाले। मुस्लिम समाज को अपनी मजहबी चीजें खुद संभालने दी जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी कलेक्टर रैंक का एक सीईओ (CEO – Chief Executive Officer) बोर्ड में होता था। उस व्यवस्था पर किसी को कोई आपत्ति नहीं थी।

मुफ्ती अहमद ने सवाल उठाया कि अगर पारदर्शिता ही मकसद है, तो मंदिर समितियों में भी मुस्लिमों को जगह मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक किसी एक समुदाय की संस्था में दूसरे धर्म को शामिल करना बराबरी के सिद्धांत के खिलाफ है।

पहली बार ऐसा फैसला

मुफ्ती मोहम्मद ने कहा कि देश में हर धर्म की संस्थाएं अपने ही समुदाय के लोग चलाते आए हैं। हिंदू संस्थाओं में हिंदू और सिख संस्थाओं में सिख प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन पहली बार वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया गया है। उन्होंने इसे मुस्लिम समाज के लिए चिंता का विषय बताया।

नीयत पर शक क्यों

मुफ्ती अहमद ने कहा कि इस फैसले से आशंका बनती है कि सरकार की नजर वक्फ की जमीनों और कब्रिस्तानों पर है। उन्होंने कहा कि यह संपत्तियां मुस्लिम समाज ने गरीबों के लिए समर्पित की हैं।

जमीयत उलेमा के नायब सदर मुफ्ती जिया कासमी ने भी यही सवाल दोहराया। उनका कहना था कि अगर नीयत साफ है, तो सभी धर्मों में समान नियम लागू हों।

मुफ्ती अहमद ने यह भी बताया कि जमीयत उलेमा शुरू से ही वक्फ कानून के खिलाफ अदालत में लड़ाई लड़ रही है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी सबसे पहले कोर्ट पहुंचे थे।

निकाह काजी का इस्तीफा

इस विवाद के बीच भोपाल के निकाह काजी मोहम्मद मआज खान नोमानी नदवी ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने निकाह काजी पद के साथ दीनी तालीमी बोर्ड के महासचिव पद से भी त्यागपत्र दिया। नदवी ने लिखा कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां ईमानदारी से निभाईं। लेकिन मौजूदा हालात में इन पदों पर बने रहना संभव नहीं रहा। वहीं वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल के स्वागत समारोह पर भी मुफ्ती मोहम्मद मसरूर ने नाराजगी जताई।

तीन दिन पहले प्रदर्शन

इस नियुक्ति के विरोध में तीन दिन पहले भोपाल के बुधवारा चौराहे पर प्रदर्शन हुआ था। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के सदस्य सड़क पर उतरे थे।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि इससे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।

FAQ

  1. मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड विवाद क्या है?
    सरकार ने वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त किए हैं। जमीयत उलेमा और अन्य मुस्लिम संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह पहली बार हुआ है।
  2. भोपाल के निकाह काजी ने इस्तीफा क्यों दिया?
    मोहम्मद मआज खान नोमानी नदवी ने वक्फ बोर्ड नियुक्ति के विरोध में इस्तीफा दिया। उन्होंने निकाह काजी और दीनी तालीमी बोर्ड, दोनों पद छोड़े। उन्होंने मौजूदा हालात को कारण बताया।
  3. जमीयत उलेमा ने सरकार से क्या मांग की?
    जमीयत उलेमा ने सरकार से नियुक्ति वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि पारदर्शिता के नियम सभी धर्मों पर लागू होने चाहिए। संगठन अदालत में भी यह लड़ाई जारी रखेगा।
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