एमपी में बढ़ेगा जल संकट? ज्यादा बारिश होने के बाद भी घट जाएगा नदियों का पानी!
Aman Vaishnav | Jul 16, 2026, 11:00 IST
एमपी में जल संकट
मध्य प्रदेश में जल संकट को लेकर केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट में बेतवा, केन और सोन नदी में गैर-मानसून सीजन के दौरान पानी का बहाव कम होने की आशंका जताई गई है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- सीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट में एक बड़ी आशंका जताई गई है।
- 2050 तक मध्यप्रदेश की तीन नदियों में पानी घट सकता है।
- इनमें बेतवा, केन और सोन शामिल हैं।
- गर्मी के मौसम में इनकी धार पूरी तरह टूट सकती है।
- इससे इन नदियों पर निर्भर शहर और जिले प्रभावित होंगे।
इसके पीछे वजह क्या है?
तेज बारिश का पानी जमीन में ठीक से नहीं रिसता है। यह ज्यादातर बाढ़ बनकर बह जाता है। इससे भूमिगत जल का स्तर नहीं बढ़ पाता है।
नतीजा यह होता है कि मानसून के बाद नदियों को प्राकृतिक सहारा नहीं मिलता। इसी सहारे को विशेषज्ञ बेसफ्लो कहते हैं। जब यह कम होता है, तो सूखे मौसम में नदी का पानी तेजी से घटता है।
किस नदी में कितना असर
बेतवा बेसिन में 2050 तक गैर-मानसून महीनों में पानी 10 से 20 प्रतिशत तक घट सकता है। ज्यादातर पानी सिर्फ मानसून के महीनों में सिमट जाएगा।
केन बेसिन को सबसे ज्यादा वल्नरेबल यानी असुरक्षित बताया गया है। सूखे मौसम में यहां पानी की उपलब्धता में भारी गिरावट आ सकती है।
सोन बेसिन में मानसून के दौरान भारी पानी रहेगा। लेकिन गैर-मानसून महीनों में यहां भी करीब 15 प्रतिशत तक कमी का अनुमान है।
सबसे ज्यादा खतरा किसे
विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्रों में जंगल लगातार घट रहे हैं। खनन की वजह से इन इलाकों का लैंडयूज भी बदल रहा है। यह भी नदियों का प्रवाह घटने की बड़ी वजह हो सकती है।
इसका असर सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। ये तीनों नदियां गंगा बेसिन का हिस्सा हैं। इनमें पानी घटने से उत्तर प्रदेश और बिहार भी प्रभावित होंगे। गंगा-यमुना के बहाव पर भी इसका उल्टा असर पड़ सकता है।
समाधान क्या है ?
सबसे पहला उपाय है पौधरोपण। नदियों के उद्गम स्थल और आसपास बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने होंगे। इससे मिट्टी की नमी बची रहेगी।
बेसिन क्षेत्रों में पुराने तालाबों को फिर से जिंदा करना भी जरूरी है। इससे मानसून का ज्यादा पानी रोका जा सकेगा।
ज्यादातर नदियों पर बांध पहले से बने हैं। अब जरूरत है ऐसी तकनीक की, जिससे सूखे मौसम में भी नदी में एक तय मात्रा में पानी बहता रहे।
किन जिलों पर पड़ेगा असर
केन नदी से कटनी, दमोह, पन्ना, छतरपुर और बांदा जिले जुड़े हैं। बेतवा नदी रायसेन, विदिशा, ललितपुर, झांसी, निवाड़ी और हमीरपुर से गुजरती है। सोन नदी से अनूपपुर, शहडोल, सीधी, सिंगरौली और सोनभद्र जिले जुड़े हैं।
इन सभी जिलों में पानी की उपलब्धता आने वाले सालों में चुनौती बन सकती है।
एसीएस राजेश राजौरा क्या बोले
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