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MPPSC की फूड सेफ्टी ऑफिसर मेरिट सूची में दिव्यांग पर उठे सवाल, अभ्यर्थियों ने की शिकायत
Sanjay Gupta | Jul 01, 2026, 10:10 IST
MPPSC की फूड सेफ्टी ऑफिसर मेरिट सूची में दिव्यांग पर उठे सवाल
एमपी की भर्ती परीक्षा में लगातार दिव्यांग सर्टिफिकेट के फर्जीवाड़े की शिकायतें हो रही हैं। अब मामला पीएससी द्वारा हाल ही में जारी की गई फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) परीक्षा की चयनित मेरिट सूची को लेकर उठा है।
मध्य प्रदेश में भर्तियों में एक बार फिर फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट का मामला उठा है। इस बार यह मामला राज्य में 17 साल बाद हुई फूड सेफ्टी ऑफिसर की भर्ती को लेकर है। पीएससी ने 22 जून को ही मेरिट लिस्ट जारी करते हुए 101 उम्मीदवारों का चयन किया है और 32 अभ्यर्थियों को वेटिंग में रखा है। इसमें 12 दिव्यांग भी चयनित हुए हैं।
इसमें चार अस्थिबाधित (orthopedically handicapped) और आठ श्रवणबाधित (Hearing-impaired persons) कैटेगरी के हैं।
मेरिट लिस्ट में चयनित कुल 12 दिव्यांग में से तीन को लेकर शिकायत हुई है। इसमें एक अस्थिबाधित है और दो श्रवणबाधित हैं। इनके चयन को लेकर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव से लेकर मप्र लोक सेवा आयोग और संबंधित विभाग में भी शिकायत की गई है। इसमें चयनित सभी 12 दिव्यांग के सर्टिफिकेट की उच्चस्तरीय जांच और एम्स द्वारा मेडिकल चेकअप की मांग की गई है।
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शिकायत में कहा गया है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC की फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती में गंभीर गड़बड़ी हुई है। यह मामला प्रदेश के हजारों मेहनती युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर चयन सूची में जगह हासिल कर ली है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि तीन अभ्यर्थियों के दिव्यांग प्रमाणपत्रों पर सवाल हैं। इनमें छतरपुर के एक अभ्यर्थी ने परीक्षा से कुछ दिन पहले ही अस्थिबाधित होने का प्रमाणपत्र बनवाया था। बताया गया है कि पेड़ से गिरने के कारण उसके टखने में चोट लगी थी, जिसके आधार पर यह प्रमाणपत्र बनवाया गया।
वहीं, ग्वालियर के एक अभ्यर्थी का चयन श्रवणबाधित श्रेणी में हुआ है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने उसी अभ्यर्थी के साथ इंटरव्यू दिया था और उस समय उसे बातचीत साफ सुनाई दे रही थी। इसके बावजूद उसका चयन श्रवणबाधित प्रमाणपत्र के आधार पर हुआ। इसी तरह एक अन्य अभ्यर्थी के श्रवणबाधित प्रमाणपत्र पर भी फर्जी होने का आरोप लगाया गया है।
वहीं, इसमें से एक अभ्यर्थी जो ग्वालियर के हैं, उनसे द सूत्र ने सीधी बात की है। इस पर उन्होंने कहा कि मेरा सर्टिफिकेट सही बना है। जिनका चयन नहीं हुआ, वे बेवजह के आरोप लगा रहे हैं।
इसके पहले राज्य सेवा परीक्षा में भी दिव्यांग को लेकर आरोप लगे थे। खासकर एक महिला अभ्यर्थी को लेकर, जिनका चयन आबकारी अधिकारी पर हुआ था। इनके बाद में डांस करते हुए वीडियो आए थे, जिसे लेकर कहा गया कि यह फर्जी अस्थिबाधित सर्टिफिकेट से चयनित हुई। हालांकि, मामले में आगे कुछ नहीं हुआ।
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इसमें चार अस्थिबाधित (orthopedically handicapped) और आठ श्रवणबाधित (Hearing-impaired persons) कैटेगरी के हैं।
तीन अभ्यर्थियों को लेकर हुई शिकायत
शिकायत में यह लिखा गया है
क्या मांग है
- निष्पक्ष जांच की मांग:दिव्यांग श्रेणी में चुने गए जिन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों पर सवाल उठे हैं, उनकी दोबारा जांच एम्स भोपाल के उच्चस्तरीय मेडिकल बोर्ड से कराई जाए।
- दोषियों पर कार्रवाई:जांच में किसी अभ्यर्थी का दिव्यांग प्रमाणपत्र फर्जी मिलता है तो उसकी नियुक्ति तुरंत रद्द की जाए। साथ ही उसके खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी का केस दर्ज किया जाए।
- वेटिंग लिस्ट वालों को मौका:फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की जगह मेरिट और वेटिंग लिस्ट में शामिल योग्य उम्मीदवारों को चयन का मौका दिया जाए।
तीन के सर्टिफिकेट पर क्या बोल रहे अभ्यर्थी
वहीं, ग्वालियर के एक अभ्यर्थी का चयन श्रवणबाधित श्रेणी में हुआ है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने उसी अभ्यर्थी के साथ इंटरव्यू दिया था और उस समय उसे बातचीत साफ सुनाई दे रही थी। इसके बावजूद उसका चयन श्रवणबाधित प्रमाणपत्र के आधार पर हुआ। इसी तरह एक अन्य अभ्यर्थी के श्रवणबाधित प्रमाणपत्र पर भी फर्जी होने का आरोप लगाया गया है।
क्या बोल रहे चयनित अभ्यर्थी
इसके पहले राज्य सेवा परीक्षा में भी लगे थे आरोप
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