नर्मदा में दौड़ेगा 600 सीटर वाला लग्जरी वाटर क्रूज, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से ओंकारेश्वर तक कर सकेंगे सवारी
Kaushiki | Oct 04, 2026, 09:46 IST
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से स्टैच्यू ऑफ वननेस तक क्रूज सर्विस की तैयारी
गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से एमपी के ओंकारेश्वर तक नर्मदा नदी में क्रूज सेवा की योजना है। 600 यात्रियों की क्षमता वाला लग्जरी क्रूज तैयार है। यह नया रूट स्टैच्यू ऑफ वननेस को जोड़ेगा। जरूरी सुरक्षा मंजूरियों के बाद यह इंटरस्टेट वाटरवे सर्विस पर्यटकों के लिए शुरू होगी। पर्यटकों के लिए यह सफर काफी यादगार और रोमांचक होगा। इस योजना से मध्य भारत में रिवर टूरिज्म को बढ़त मिलेगी।
सोचिए, आप मां नर्मदा की शांत लहरों पर सफर कर रहे हैं। आपके सामने एक तरफ दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा खड़ी है। वहीं दूसरी तरफ ओंकारेश्वर का पवित्र ज्योतिर्लिंग क्षेत्र है। अब यह खूबसूरत सपना बहुत जल्द सच होने वाला है। गुजरात के एकतानगर से मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर तक क्रूज चलाने की तैयारी है। यह नया वॉटर रूट दो बड़े राज्यों को आपस में जोड़ेगा।
पर्यटक अब नदी के रास्ते एक अनोखा अनुभव ले सकेंगे। इस रूट पर 597 फीट ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी मौजूद है। इसके साथ ही 108 फीट ऊंची स्टैच्यू ऑफ वननेस भी जुड़ जाएगी। यानी सरदार पटेल और आचार्य शंकर की पावन भूमि एक साथ जुड़ेंगी। पर्यटकों के लिए यह सफर काफी यादगार और रोमांचक होगा। इस योजना से मध्य भारत में रिवर टूरिज्म को बढ़त मिलेगी।
नर्मदा नदी में 600 सीटों वाला लग्जरी क्रूज तैयार किया गया है। यह क्रूज फिलहाल गुजरात में अपनी सेवाएं दे रहा है। अधिकारियों के मुताबिक मंजूरी मिलते ही इसका रूट बढ़ाएंगे।
इस क्रूज में 250 मेहमानों के खाने का इंतजाम है। साथ ही इसमें शानदार परफॉर्मेंस डेक भी बनाया गया है। लोग सफर के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मजा ले सकेंगे। इसे सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि अनुभव बनाया गया है।
गुजरात में कई नए आकर्षण तैयार किए जा रहे हैं। पर्यटकों के लिए डैम एक्सपीरियंस सेंटर बनाया गया है। यहां वाटर पार्क और फॉरेस्ट म्यूजियम भी बन रहा है। गुजरात वंदना म्यूजियम भी लोगों को खूब पसंद आएगा।
जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी म्यूजियम भी तैयार हो रहा है। रॉयल किंगडम्स का म्यूजियम भी यहां देखने को मिलेगा। बच्चों के लिए वीर बालक उद्यान भी विकसित हो रहा है। इन जगहों से लोग एकतानगर में ज्यादा वक्त बिताएंगे।
गुजरात के एकतानगर का इलाका करीब 56 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह इलाका आसपास के 90 गांवों को कवर करता है। यहां घूमने के लिए 26 बड़े टूरिस्ट स्पॉट मौजूद हैं। हर साल यहां 50 लाख से ज्यादा पर्यटक आते हैं।
पर्यटकों की सुविधा के लिए 55 इलेक्ट्रिक बसें चलती हैं। साथ ही ई-रिक्शा, ई-कार्ट और ई-बाइक भी उपलब्ध हैं। यह ग्रीन ट्रांसपोर्ट कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करता है। क्रूज सेवा से पर्यटन का दायरा एमपी तक फैल जाएगा।
पर्यटन बढ़ने से स्थानीय आदिवासियों को सीधा फायदा मिला है। लगभग 18 सौ आदिवासी महिलाओं को सीधा रोजगार मिला है। करीब सात हजार लोग इनडायरेक्टली काम से जुड़े हैं। हॉस्पिटैलिटी, ट्रांसपोर्ट और कंस्ट्रक्शन में नए मौके बने हैं।
आदिवासी महिलाएं खुद पिंक ई-रिक्शा चला रही हैं। वे अपने फूड आउटलेट और रेस्टोरेंट भी संभाल रही हैं। गुजरात एकता महिला मंडल उन्हें फाइनेंसियल असिस्टेंस और ट्रेनिंग दे रहा है। इससे खेती के अलावा कमाई का नया जरिया मिला है।
यह खबर हमारे लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि ये देश में धार्मिक और नेचुरल टूरिज्म के एक नए दौर की शुरुआत कर रही है। गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग।
इन दोनो को एक साथ जोड़ने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक ही यात्रा में दो बड़े धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों का अनुभव मिलेगा। इससे समय की बचत होगी और सड़क के बजाय नदी के रास्ते आरामदायक सफर का नया विकल्प मिलेगा।
इसके अलावा, इस परियोजना से स्थानीय आदिवासियों और युवाओं के लिए रोजगार, व्यापार और होमस्टे जैसे कमाई के नए रास्ते खुलेंगे। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
FAQ:
पर्यटक अब नदी के रास्ते एक अनोखा अनुभव ले सकेंगे। इस रूट पर 597 फीट ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी मौजूद है। इसके साथ ही 108 फीट ऊंची स्टैच्यू ऑफ वननेस भी जुड़ जाएगी। यानी सरदार पटेल और आचार्य शंकर की पावन भूमि एक साथ जुड़ेंगी। पर्यटकों के लिए यह सफर काफी यादगार और रोमांचक होगा। इस योजना से मध्य भारत में रिवर टूरिज्म को बढ़त मिलेगी।
600 सीटर का क्रूज तैयार
इस क्रूज में 250 मेहमानों के खाने का इंतजाम है। साथ ही इसमें शानदार परफॉर्मेंस डेक भी बनाया गया है। लोग सफर के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मजा ले सकेंगे। इसे सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि अनुभव बनाया गया है।
नए टूरिस्ट स्पॉट की एंट्री
जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी म्यूजियम भी तैयार हो रहा है। रॉयल किंगडम्स का म्यूजियम भी यहां देखने को मिलेगा। बच्चों के लिए वीर बालक उद्यान भी विकसित हो रहा है। इन जगहों से लोग एकतानगर में ज्यादा वक्त बिताएंगे।
हर साल आते हैं 50 लाख लोग
पर्यटकों की सुविधा के लिए 55 इलेक्ट्रिक बसें चलती हैं। साथ ही ई-रिक्शा, ई-कार्ट और ई-बाइक भी उपलब्ध हैं। यह ग्रीन ट्रांसपोर्ट कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करता है। क्रूज सेवा से पर्यटन का दायरा एमपी तक फैल जाएगा।
लोकल लोगों को मिला रोजगार
आदिवासी महिलाएं खुद पिंक ई-रिक्शा चला रही हैं। वे अपने फूड आउटलेट और रेस्टोरेंट भी संभाल रही हैं। गुजरात एकता महिला मंडल उन्हें फाइनेंसियल असिस्टेंस और ट्रेनिंग दे रहा है। इससे खेती के अलावा कमाई का नया जरिया मिला है।
यह खबर क्यों जरूरी है
इन दोनो को एक साथ जोड़ने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक ही यात्रा में दो बड़े धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों का अनुभव मिलेगा। इससे समय की बचत होगी और सड़क के बजाय नदी के रास्ते आरामदायक सफर का नया विकल्प मिलेगा।
इसके अलावा, इस परियोजना से स्थानीय आदिवासियों और युवाओं के लिए रोजगार, व्यापार और होमस्टे जैसे कमाई के नए रास्ते खुलेंगे। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
FAQ:
- गुजरात के एकतानगर से ओंकारेश्वर तक क्रूज यात्रा कब शुरू होगी?
क्रूज यात्रा की शुरूआत जल्द ही होने की उम्मीद है, लेकिन वर्तमान में कोई निश्चित तिथि जानकारी में उपलब्ध नहीं है। - इस क्रूज में किन सुविधाओं का ध्यान रखा गया है?
600 सीटों वाले इस लग्जरी क्रूज में 250 मेहमानों के खाने का इंतजाम, एक शानदार परफॉर्मेंस डेक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मजा लेने की सुविधा शामिल है। - क्रूज सेवा से स्थानीय समुदाय को क्या लाभ होगा?
क्रूज सेवा से स्थानीय आदिवासियों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, जिसमें लगभग 1800 आदिवासी महिलाएं सीधे रोजगार पा रही हैं और हजारों लोग अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हुए हैं।
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