भोपाल में आज CJI सूर्यकांत समेत 25 जज राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन में होंगे शामिल

भोपाल की NJA में आज और कल को राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन हो रहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और 25 हाईकोर्ट के जज जन-केंद्रित न्यायपालिका और लंबित मामलों को तकनीक से सुलझाने जैसे अहम मुद्दों पर मंथन करेंगे।

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Anjali Dwivedi
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BHOPAL. भोपाल में आज से नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज होने जा रहा है। CJI सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में एकीकृत, कुशल और जन-केंद्रित न्यायपालिका विषय पर देशभर के 25 से अधिक हाईकोर्ट जजों को संबोधित करेंगे। जहां वे आमजन के लिए न्याय व्यवस्था को सुलभ बनाने पर मंथन करेंगे।

CJI  सूर्यकांत का पहला दौरा

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत सीजेआई का पदभार संभालने के बाद पहली बार मध्य प्रदेश के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें देश के विभिन्न राज्यों के 25 से अधिक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justices) और वरिष्ठ न्यायाधीश(Senior Judge) एक साथ एक मंच पर मौजूद रहेंगे। लंबे समय बाद भोपाल में जजों का इतना बड़ा समागम होने जा रहा है, जो प्रशासनिक और न्यायिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जन-केंद्रित न्यायपालिका

इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय एकीकृत, कुशल और जन-केंद्रित न्यायपालिका रखा गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न्याय व्यवस्था को आम आदमी के लिए और अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाना है। बदलते सामाजिक परिवेश में अदालतों की भूमिका और नागरिकों की उम्मीदों के बीच तालमेल बिठाने पर न्यायाधीश गहन विचार-विमर्श करेंगे।

भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, सम्मेलन के दौरान न्यायिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण और अदालतों में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर विशेष सत्र आयोजित होंगे। पेंडिंग केसों यानी लंबित मामलों के बोझ को कम करना और जिला स्तर से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक बेहतर समन्वय स्थापित करना इस मंथन का मुख्य एजेंडा रहने वाला है।

न्यायिक सुधारों का केंद्र

भोपाल स्थित नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (NJA) देश में न्यायिक प्रशिक्षण और शोध का प्रमुख संस्थान है। यहां होने वाले इस संवाद से निकलने वाले निष्कर्षों को आने वाले समय में देश के न्यायिक सुधारों (Judicial Reforms) की बुनियाद माना जा रहा है। विधि जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि सीजेआई की मौजूदगी में होने वाला यह संवाद न्याय प्रणाली को अधिक उत्तरदायी (Accountable) बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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