NEWS STRIKE : Bhopal में किसान आंदोलन क्या इंटेलिजेंस का फेलियर ? मूंग मामले में ही क्यों होता है हंगामा ?
Harish Divekar | Jul 30, 2026, 07:01 IST
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भोपाल में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन उग्र हुआ। सीएम हाउस घेराव की तैयारी, सरकार ने बनाई मंत्रियों की कमेटी। लेकिन बड़ा सवाल इतने किसान राजधानी में कैसे आए, क्या इसमें सरकार का इंटेलिजेंस फेल साबित हुआ।
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पहले कॉकरोच और अब किसान, बीजेपी सरकार की नाक में दम कर रहे हैं। मेरा सवाल ये है कि इतनी बड़ी तादाद में किसान भोपाल तक पहुंचे कैसे। जब किसान सीएम हाउस की घेराबंदी के लिए सैकड़ों किमी की दूरी से निकले, तब क्या प्रदेश की पुलिस और इंटेलिजेंस सो रहे थे। मैं आपको ये भी बताउंगा कि हर साल क्यों मूंग के मामले में ही किसान को सड़क पर उतरना पड़ता है।
नमस्कार
जब मैंने ये सेगमेंट रिकॉर्ड करना शुरू किया तब तक किसान भोपाल की सड़क पर जमा थे। हम कह सकते हैं कि ये सड़क भोपाल की बड़ी आबादी को सिटी सेंटर से जोड़ती है। होशंगाबाद रोड के आसपार रहने वाले कई लोग होंगे जो सरकारी दफ्तर में काम करते हैं तो उन्हें अरेरा हिल्स तक आना होगा। बहुत से लोग होंगे जो प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं, उन्हें भी कम से कम एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और दस नंबर के इलाके तक आना ही पड़ेगा। लेकिन किसानों के प्रदर्शन के चलते डायरेक्टर कनेक्शन पूरी तरह से बंद हो गया। अधिकांश लोगों को डाइवर्जन का सहारा लेना पड़ा। स्कूल कॉलेजों की तो छुट्टी ही कर दी गई, पर कोई बात नहीं। किसान और जवान की जय करने वाला ये देश अन्नदाता की खातिर इतनी परेशानी तो उठा ही सकता है। सवाल ये है कि अन्नदाता क्यों परेशान है। क्यों प्रदेश का किसान हर बार मूंग दाल के मसले पर ही इतना परेशान होता है।
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दो हजार किसान एक साथ आंदोलन पर
आज सुबह की शुरुआत किसानों ने भी फुटबॉल खेलकर की। रातभर सड़क पर बिताई और सुबह फिर आंदोलन के लिए तैयार हो गए। एक दिन पहले जो किसान बेरिकेड तोड़कर शहर में और अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था वो किसान आधे कपड़े उतारकर बसों पर चढ़ कर प्रदर्शन करता दिखा। किसान सीएम हाउस तक मार्च करना चाहते हैं, उनके तेवर साफ बताते हैं कि अगर सीएम हाउस तक जाने की इजाजत मिल गई तो शायद उनका मार्च बहुत शांतिपूर्ण तरीके से न हो। बताया जा रहा है कि करीब दो हजार किसान एक साथ आंदोलन पर उतर आया है।
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किसान राजधानी तक पहुंच गया। ऐसा कैसे हुआ
देश ने अभी अभी एक आंदोलन देखा है। तब भी सवाल यही था कि क्या खूफिया एजेंसीयों को ये अंदाजा नहीं हुआ कि जेन जी का आंदोलन इतना बड़ा होगा। क्या उसी तरह प्रदेश की इंटेलिजेंस एजेंसी को ये अंदाजा नहीं हुआ कि कितनी संख्या में किसान हैं और कितने उग्र हैं। और, एक बात बता दूं, अगर ये आंदोलन काबू में नहीं आया तो आपको बहुत जल्द जेन जी वाला अंदाज भी इस आंदोलन में नजर आ सकता है।
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प्रदेश का किसान मूंग खरीदी को लेकर हर साल परेशान
कहने को तो मप्र में डबल इंजन सरकार है यानी दोनों ही जगह बीजेपी हैं। इससे भी खास बात ये है कि केंद्र में जो कृषि मंत्री हैं वो मप्र के किसान पुत्र शिवराज सिंह चौहान ही हैं। जो मूंग के मसले से अच्छे से वाकिफ हैं। उसके बाद भी प्रदेश का किसान मूंग खरीदी को लेकर हर साल परेशान होता है। मूंग खरीदी के सीजन में प्रदेश और केंद्र सरकार एक दूसरे में बॉल फेंकने में ज्यादा बिजी रहते हैं।
कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने भी इस मुद्दे पर कल कहा कि वो शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन का लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध कर चुके हैं। पर पत्र लिखने की जरूरत ही क्यों पड़ी। जब पहले से पता था कि मूंग इस सीजन में होती है और बिकने के लिए आती है तो केंद्र और प्रदेश ने पहले से तैयारी करके क्यों नहीं रखी। आंदोलन उग्र हो चुका है तो सीएम मोहन यादव ने भी कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना , मंत्री विश्वास सारंग , मंत्री राकेश सिंह , राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कृष्णा गौर शामिल है।
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सीएम ने उम्मीद जताई, जल्द निकलेगा समाधान
इस साल इस आंदोलन का जो भी नतीजा हो, देखने वाली बात ये होगी कि क्या सरकार अगले साल मूंग खरीदी के लिए पहले से तैयारी करेगी या फिर हम अगले साल भी ऐसा ही कोई नजारा देखेंगे। ये हालात दिल्ली की पराली की याद दिलाते हैं। हर साल पराली जलती है, दिल्ली का गला चौक होता है। लेकिन पराली जलने के भी इंतजाम पहले से नहीं किए जाते। वही हालात मूंग बोने वाले किसानों के हो गए हैं। जो पहले मूंग की खेती करते हैं और फिर उसकी बिक्री के लिए परेशान होते हैं। क्या सरकार अगले साल उसी वक्त कोई इंतजाम कर लेंगे जब किसान मूंग के बीज बोना शुरू करेगा।
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