News Strike: सुनवाई पूरी पर नहीं मिला 'इंसाफ', और लंबा खिंचेगा सरकारी कर्मचारियों का इंतजार?
Harish Divekar | Jun 16, 2026, 07:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
मप्र में 2016 से अटका प्रमोशन मामला फिर उलझ गया। सुनवाई पूरी हुई, लेकिन नई बेंच बनने से फैसला टल गया। लाखों कर्मचारीऔर नई भर्तियां प्रभावित रहेंगी।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- मप्र में प्रमोशन प्रक्रिया 2016 से कानूनी विवाद में फंसी।
- सुनवाई पूरी हुई, लेकिन फैसला जारी नहीं हो सका।
- नई बेंच गठित होने के बाद फिर सुनवाई होगी।
- एक लाख से ज्यादा कर्मचारी बिना प्रमोशन रिटायर हुए।
- प्रमोशन विवाद से नई भर्तियां भी प्रभावित हो रही हैं।
अरे सुनती हो, आज मुझे प्रमोशन मिला है...
प्रमोशन विवाद फिर अटका मामला
इस मामले में नया डेवलेपमेंट ये है कि प्रमोशन के नियम फिर से कानूनी फेरबदल के चक्कर में उलझ गई है। नई उलझन के चलते पुराने अधिकारी कर्मचारी परेशान हैं क्योंकि प्रमोशन का इंतजार लंबा हो गया। नई नियुक्तियों पर भी संकट के बादल हैं। क्योंकि वहां भी ये पसोपेश हैं किस नियम के तहत भर्ती दी जाए।
प्रमोशन केस में फिर नया पेंच
कभी लगता है कि बस हर गांठ खुल गई है और मामला सुलझने वाला है। तब ही एक और पेंच फंस गया है। दस साल से चले आ रहे इस मामले की सुनवाई पूरी हो गई थी और फैसला सुरक्षित रखा गया था।
प्रमोशन के इंतजार में बैठे अधिकारी और कर्मचारियों को ये उम्मीद थी कि जल्द उन्हें अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है, लेकिन फैसला सबके सामने आ पाता उससे पहले ही केस की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश संजीव सचदेवा की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में हो गई।
प्रमोशन केस में नई सुनवाई शुरू
नई बेंच बनेगी, वो पूरे मामले को समझेगी, सुनेगी और फिर नए सिरे से फैसला सुनाएगी। इसमें जितना समय लगेगा उतना ही समय नई भर्तियों में भी लगेगा। क्योंकि जब तक पुराने कर्मचारियों का प्रमोशन खाली नहीं होगा तब तक पद खाली नहीं होगा और उस पर वेकेंसी भी नहीं निकलेगी।
सुप्रीम कोर्ट के ये स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी मामले में फैसला 90 दिनों तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे ज्यादा लंबित नहीं होना चाहिए। इसलिए जून में ही फैसला आने की पूरी उम्मीद थी। पर मुख्य न्यायाधीश बदलने से सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
पदोन्नति आरक्षण विवाद पुराना जटिल मुद्दा
इन नियमों में एससी और एसटी यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारी कर्मचारियों को लगातार प्रमोशन मिलते रहे, लेकिन अनरिज्वर्ड कोटे से आने वाले एंप्लॉइज प्रमोशन का इंतजार करते रह गए।
जाहिर है इस फैसले के खिलाफ नाराजगी उठी ही होगी। जो अदालत तक भी पहुंची। 30 अप्रैल 2016 को हाईकोर्ट ने इस पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया और पदोन्नति में आरक्षण से जुड़े नियम को निरस्त कर दिया।
सुप्रीम रोक से अटका प्रमोशन मामला
कानूनी पेंच का नतीजा ये हुआ कि एक लाख से ज्यादा अधिकारी कर्मचारी प्रमोशन का इंतजार करते करते रिटायर भी हो गए। सारी व्यवस्थाएं बनी रहें और काम होता रहे। इसलिए सरकार ने अधिकारी कर्मचारियों को अलग अलग और कई केसेस में उच्च प्रभार भी सौंपे, लेकिन ये जिम्मेदारियां वित्तीय फायदे में तब्दील नहीं हो सकी।
2016 से 2019 तक मामला अदालत में चलता रहा। साल 2019 की एक सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जनरैल सिंह के एक मामले में बड़ा फैसला भी सुनाया। कोर्ट ने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण देने से पहले ये सरकार को ये साबित करना होगा कि संबंधित वर्ग का सरकारी सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। इस फैसले का असर मप्र पर तो पड़ा ही। कई और राज्यों पर भी पड़ा।
2026 में भी प्रमोशन अटका मामला
साल 2022 और 2023 भी ऐसे ही दलीलों में गुजरा। 2024 और 2025 आते-आते हालात ये हुए कि प्रमोशन के इंतजार में कई पद खाली ही रह गए। कई कर्मचारी रिटायर हो गए और अब 2026 में फिर बात वहीं पहुंचती दिख रही है जहां से शुरू हुई थी।
अब नई बेंच बनने के बाद कर्मचारियों को राहत कैसे मिलेगी और कब तक मिलेगी इसका इंतजार जारी रहेगा। इस मामले पर हम प्रमोशन में आरक्षण के नियम पर भी खबर दे चुके हैं।
आप उसका लिंक नीचे देख सकते हैं और गहराई से समझ सकते हैं कि मप्र किस फॉर्मूले पर प्रमोशन और नौकरी देने की कोशिश की गई और उसके बाद से अब तक क्या-क्या हुआ। News Strike | न्यूज स्ट्राइक
ये खबरें भी पढ़ें...
प्रमोशन में आरक्षण: SC ने कहा 90 दिन में फैसला, एमपी में 116 दिन से इंतजार
90 दिन की सीमा पार, 831 रिजर्व फैसले सुनाए... फिर भी प्रमोशन में आरक्षण का फैसला क्यों नहीं?
प्रमोशन में आरक्षण: 90 दिन की सीमा पार, अब फैसले की आस में लाखों कर्मचारी; चीफ जस्टिस की बेंच पर टिकी निगाहें
News Strike: मप्र में सूखे की मार, पानी के लिए तरस रहे कितने जिले, कांग्रेस का प्रदर्शन, सरकार की क्या तैयारी?
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA