टीईटी के इंतजार में युवा, नियमितिकरण के इंतजार में संविदा, सरकार के सामने दो चुनौतियां ?

Harish Divekar | Jun 04, 2026, 07:00 IST
Share
News Strike
Photograph: (the sootr)

मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के सामने शिक्षा और स्वास्थ्य जगत से दो बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। टीईटी पास युवा और संविदा स्वास्थ्यकर्मी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। सवाल यही है कि सरकार इनसे कैसे निपटेगी।

News Strike

- मैं आज आपसे दो अलग अलग तबकों की बात करूंगा। तबके भले ही अलग हैं लेकिन दोनों के मुद्दे एक ही हैं। इसलिए शुरुआत में दोनों थोड़े बेमेल लग सकते हैं, लेकिन अंत तक मेरी बात गौर से सुनेंगे तो समझ जाएंगे कि सरकार से दोनों के सवाल एक ही जैसे हैं। सीबीएसई और नीट जैसी अहम परीक्षाओं के लेकर पहले से ही सवाल बहुत हैं। शिक्षा व्यवस्था के साथ साथ स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का भी कई जगह बुरा हाल है। इसलइए मैं जो बात करने जा रहा हूं वो इन दोनों के ही लिहाज से बहुत अहम है।

नमस्कार

ये बात है शिक्षक पात्रता परीक्षा की और संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की। इन दोनों ही व्यवस्थाओं से जुड़े लोग संघर्ष के लिए मजबूर हैं। दोनों के संघर्ष की टाइम लाइन अगर देखें तो कई साल लंबी नजर आएगी। पहले बात करते हैं शिक्षक पात्रता परीक्षा की। इस परीक्षा का हाल ये है कि ये हो तो भी मुश्किल और अगर न हो तो भी मुश्किल।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला शिक्षक पात्रता परीक्षा जरूरी

प्रदेश ही नहीं देशभर के शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को करना अनिवार्य यानी कि जरूरी कर दिया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला लिया है। इस फैसले के पीछे एक खास वजह मानी जा रही है। बार बार कहा जा रहा है कि एजुकेशन की क्वालिटी मेंटेन करने के लिए ये फैसला लिया गया है। इसे अतिथि शिक्षकों के लिए इसे कंप्लसरी किया गया है। क्योंकि अब ये माना जाने लगा है कि वो भी शिक्षण व्यवस्था का एक अहम हिस्सा हैं। जो बच्चों को सही और क्वालिटी एजुकेशन देने का जरिया हैं। इसी वजह से उन्हें भी टीईटी परीक्षा पास किया होना जरूरी है। लेकिन मध्यप्रदेश में इस फैसले का जबरदस्त विरोध हुआ। इसी साल अप्रैल माह में टीचर्स के संगठन ने बड़ा आंदोलन किया।

अप्रैल माह में तकरीबन पचास हजार शिक्षकों ने भोपाल में डेरा डाला था। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के तहत सब एकजुट हुए और शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य करने पर नाराजगी जाहिर की। असल में ये परीक्षा उन शिक्षकों को भी देना अनिवार्य है जो पहले से नौकरी कर रहे हैं। इसी बात पर अध्यापक और शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब उनके पास लंबा एक्सपीरियंस हो चुका है तो परीक्षा की जरूरत क्या है। ये तो शिक्षकों का पक्ष हो गया है।

News Strike: मप्र में सूखे की मार, पानी के लिए तरस रहे कितने जिले, कांग्रेस का प्रदर्शन, सरकार की क्या तैयारी?

परीक्षा हो तो भी मुश्किल और न हो तो भी मुश्किल

अब उन युवाओं की बात करते हैं जो नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे युवा अब सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि शिक्षक पात्रता परीक्षा कैसे होगी। जैसा मैंने आपसे पहले ही कहा था कि ये परीक्षा हो तो भी मुश्किल और न हो तो भी मुश्किल। मप्र युवा नाम के ट्विटर हैंडल ने इस संबंध में एक ट्वीट किया है। जिसमें लिखा है कि प्रदेश के लाखों युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। जबकि वो सब एजुकेटेड हैं, फिर भी सरकार पर्याप्त शिक्षक भर्ती नहीं निकाल रही है। ये शिकायत उन युवाओं के हवाले से है जो टीईटी की परीक्षा दे चुके हैं और पास भी कर चुके हैं।

बेरोजगार युवाओं के पत्र ने बढ़ाई टेंशन

इस ट्वीट में एक पत्र भी शामिल हैं, जो लोक शिक्षण संचालनालय के कमिश्नर को लिखा गया है। पत्र में तमाम टीईटी पास किए युवाओं को नौकरी देने और बिना परीक्षा दिए पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों को हटाने का जिक्र किया गया है। पत्र के जरिए चार मांगें भी रखी गईं हैं कि सारे अतिथि शिक्षकों के लिए टीईटी कंपलसरी हो। जिन्होंने ये परीक्षा नहीं दी है उन्हें तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाए। खाली पद सिर्फ टीईटी पास किए युवाओं से भरे जाएं, और, ये प्रोसेस जल्द शुरू की जाए। पत्र के आखिर में लिखा है समस्त एमपीटीईटी उत्तीर्ण अभ्यार्थी।

इस पत्र को देखकर ये तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी ऑफिशियल संगठन की ओर से ये पत्र नहीं लिखा गया है। लेकिन सरकार इस पर एक परसेंट भी अमल करने के बारे में सोचती है तो क्या होगा। क्या और ज्यादा विरोध नहीं भड़केगा। मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ नहीं हूं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला है तो जो कहा गया है वो लागू होना चाहिए।

News Strike : निगम-मंडल अध्यक्षों के लिए लाभ का पद नहीं बनेगा आराम का पद, न मिलेगा टिकट, उल्टा करनी पड़ेगी ये मशक्कत!

युवाओं की मांग पर भी उठ रहे सवाल

लेकिन एक युवाओं का समूह कैसे इस मांग को वाजिब ठहरा सकता है कि जो लोग पहले से अतिथि शिक्षक हैं उन्हें हटा दिया जाए। ये भी तो संभव है कि खुद अतिथि शिक्षक इस मुद्दे पर जाकर अदालत की शरण लें। अगर अतिथि शिक्षकों को यूं ही हटा दिया जाता है, तो इसमें भी कोई संशय नहीं कि वो सड़क पर आएंगे और आंदोलन करेंगे, लेकिन अगर अतिथि शिक्षकों के बारे में सोचते हैं तो जाहिर है कि जो युवा टीईटी पास कर चुके हैं। उनके लिए नौकरी का इंतजार और लंबा हो जाएगा। इसलिए ये मसला ऐसा है जिस पर बहुत सोच समझ कर सरकारी और प्रशासनिक मशीनरी को बीच का रास्ता निकलना होगा। ताकि, सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी कायम रहे। अतिथि शिक्षकों का काम भी चलता रहे और युवाओं को भी रोजगार मिले।

News Strike: कांग्रेस को क्यों पसंद आ रही कॉकरोच जनता पार्टी? दिग्गज नेताओं ने किए ट्वीट

इधर 32 हजार संविदा स्वास्थ्यकर्मी भी सड़क पर

ये तो बात हुई टीईटी परीक्षा का इंतजार कर रहे युवाओं की और टीईटी परीक्षा की। अब बात करते हैं संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की। संविदा स्वास्थ्यकर्मियों ने बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रदेश में करीब 32 हजार संविदा स्वास्थ्यकर्मी हैं, जो प्रदेश की स्वास्थ सेवाओं की बागडोर संभालते हैं। इन स्वास्थ्यकर्मियों की सबसे बड़ी मांग है नियमितीकरण। इसके अलावा हस साल दस परसेंट की वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता और नियमित कर्मचारियों जैसी छुट्टियां मिलने जैसी मांगे शामिल हैं। ये मांगे लंबे समय से पेंडिंग है।

संविदा स्वास्थ्यकर्मियों ने 25 मई से काली पट्टी बांधकर काम करना शुरू कर दिया था। दो दिन ऐसा करने के बाद कलेक्टर, सीएमएचओ और बीएमओ को ज्ञापन सौंपा। इस तरह उनका आंदोलन स्टेप बाय स्टेप आगे बढ़ता रहा। दो जून को स्वास्थ्यकर्मी ऑनलाइन और ऑफ लाइन काम भी बंद कर चुके हैं। अब आठ जून को एमपी के संविदा स्वास्थ्यकर्मी सीएम हाउस के घेराव की तैयारी में हैं।

संविदा स्वास्थ्यकर्मियों को हलके में लेना बड़ी गलती साबित हो सकता है। सिर्फ इलाज को छोड़ दें तो उसके अलावा स्वास्थ्य से जुड़े कई कामों की कमान इन्हीं के हाथ में होती है। इनकी हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ेगा। डिजिटल हो चुकी स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ेगा। जो लोग अलग अलग योजनाओं के तहत इलाज कराने जा रहे हैं. उन्हें योजना का लाभ मिलने में देरी हो सकती है।

यानी सरकार के सामने दो अलग अलग और बड़े मुद्दे हैं। दोनों ही शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े हैं. और, युवाओं से सीधा वास्ता रखते हैं। इसलिए इन दोनों पर फैसला लेना और सही तरीके से फैसला लेना सरकार की बड़ी मजबूरी और चुनौती दोनों हैं।

🔴News Strike: MP VidhanSabha Chunav 2028 के लिए बीजेपी का बड़ा फैसला, इन नेताओं को नहीं मिलेगा टिकट!

Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • News Strike
  • शिक्षक पात्रता परीक्षा
  • अतिथि शिक्षक
  • लोक शिक्षण संचालनालय
  • एमपी के संविदा स्वास्थ्यकर्मी
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती