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News in Short
- पीएससी से विविध मांगों को लेकर 15 जनवरी को न्याय यात्रा 2.0 का आयोजन था।
- इसके पहले ही पुलिस ने सख्त की और छात्र नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।
- पुलिस ने आयोजन को मंजूरी नहीं दी थी। इसके खिलाफ छात्र नेता हाईकोर्ट गए।
- हाईकोर्ट ने पुलिस के आवेदन खारिज करने के कारणों को उचित नहीं पाया।
- वनडे मैच के चलते 18 तक मंजूरी नहीं दी जा सकती। अगले सप्ताह कर सकते हैं।
News in Detail
NEYU के पीएससी की मांगों को लेकर होने वाली न्याय यात्रा पुलिस की सख्ती से 15 जनवरी को नहीं हो सकी। इस मामले में हाईकोर्ट इंदौर में शुक्रवार को सुनवाई हुई। इसमें आंदोलनकारियों के आवेदन को सही पाया गया। आदेश दिए गए कि नई तारीख के लिए फिर आवेदन किया जाए। पुलिस इस पर नए सिरे से विचार करे।
अधिकारी विचार कर निर्णय लेंगे
नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के 15 जनवरी के आंदोलन न्याय यात्रा 2.0 को नए सिरे से करने का रास्ता खुल गया है। हाईकोर्ट में लगी याचिका पर आदेश हुआ है कि शांतिपूर्वक आंदोलन के लिए संबंधित अधिकारी के पास आवेदन किया जाए। नए तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर अधिकारी विचार कर निर्णय लेंगे। पूर्व के फैसले (मंजूरी निरस्त करने) को अलग रखकर नई परिस्थितियों के अनुसार फैसला लिया जाए।
हाईकोर्ट ने 18 जनवरी तक आंदोलन की मंजूरी आदेश जारी करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि इंदौर में वनडे मैच को देखते हुए कानून व्यवस्था की दृष्टि से यह उचित नहीं होगा। इसलिए इसे वह अगले सप्ताह ही करें।
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पुलिस के आदेश में चौंकाने वाली बातें
वहीं आंदोलनकारियों की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल और जयेश गुरनानी ने चौंकाने वाली बातें हाईकोर्ट में रखी। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन की मंजूरी खारिज करने के लिए पुलिस ने अजीब कारण बताए। इसमें कहा गया कि पीएससी में इंटरव्यू चल रहे हैं, जो आंदोलन से प्रभावित होंगे, जबकि उस समय कोई इंटरव्यू नहीं हो रहे थे।
दूसरा कारण बताया गया कि जेल में कैदियों का आना-जाना प्रभावित होगा। हालांकि, पीएससी जाने के कई रास्ते हैं। इससे जेल का रास्ता प्रभावित नहीं होता। तीसरा कारण बताया कि गलर्स होस्टल है, डॉक्टर का आना-जाना होता है, लेकिन वहां कई रास्ते हैं आने-जाने के।
चौथा कारण बताया कि सर्किट हाउस है, न्यायाधीश के बंगले हैं। इनका आवागमन प्रभावित होता है। लेकिन यह सभी कारण गलत है और वहां कई मार्ग आने-जाने के हैं।
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आंदोलन शांति से होगा क्या
इस दौरान जस्टिस ने पूछा कि आंदोलन शांति से होगा यह कैसे कह सकते हैं। इस पर अधिवक्ता ने कहा कि इसकी अडंरटेकिंग दी जा रही है। आंदोलन में करीब एक हजार उम्मीदवारों का आना संभावित है। आंदोलन के दौरान पूरी शांति रहेगी।
हमारे पास अपनी मांग बताने के लिए ज्ञापन देने के सिवा कोई रास्ता नहीं है। जस्टिस ने सभी तर्क सुनने के बाद कहा कि ज्ञापन देने की मांग मंजूर की जाती है। इसके लिए नए सिरे से संबंधित अधिकारी के पास आवेदन किया जाए। अधिकारी नई परिस्थितियों के अनुसार इस पर फैसला लेंगे।
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