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Photograph: (the sootr)
Jaipur. राजस्थान में पेपर लीक मामले के आरोपी आरपीएससी के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा को आरपीएससी मेंबर बनाने के लिए कांग्रेस नेता दिनेश खोडनिया को 1.30 करोड़ रुपए देने के मामले में नया खुलासा हुआ है।
कटारा का कहना है कि उसने यह बयान ईडी अफसरों के कहने पर प्रताड़ना से बचने के लिए दिया था। ईडी ने भी खोडनिया का कटारा के साथ सेकंड ग्रेड टीचर भर्ती पेपर लीक मामले में शामिल होने के कोई सबूत नहीं होना माना है।
कटारा बोले, 1.30 करोड़ देकर बनवाया मेंबर
बाबूलाल कटारा को एसओजी ने सेकंड ग्रेड टीचर भर्ती पेपर लीक करने के मामले में गिरफ्तार किया ​था। इस मामले में ईडी ने भी कार्रवाई की ​है।
कटारा ने ईडी को बयान दिया था कि कांग्रेस के डूंगरपुर जिला अध्यक्ष दिनेश खोडनिया ने एक करोड़ 30 लाख रुपए के बदले में आरपीएससी मेंबर बनवाया था। इसमें से 40 लाख रुपए वह खो​डनिया के नजदीकी अशोक जैन को दे चुका है। यह 40 लाख रुपए भी उसने पेपर बेचकर ही कमाए थे।
आरपीएससी के निलंबित सदस्य कटारा के इस बयान के बाद ईडी ने दिनेश खोडनिया के ठिकानो पर छापे मारे थे। इस छापे में ईडी ने उनके घर और दफ्तर से 24 लाख रुपए नगद,दस्तावेज व मोबाईल फोन आदि जब्त किए थे।
ईडी के दबाव में लिया खोडनिया का नाम
बाबूलाल कटारा के बयान के बाद कांग्रेस नेता दिनेश खो​डनिया और अशोक जैन ने कटारा के खिलाफ उदयपुर की कोर्ट में मानहानि का केस कर दिया। नोटिस के जवाब में कटारा ने उदयपुर सेंट्रल जेल में 3 फरवरी,2024 को लिखित में बयान दिया था।
कटारा ने कहा कि ईडी अफसरों ने पूछताछ के दौरान उसके समक्ष एक लिस्ट रखी। इसमें दिनेश खोडनिया, बाबूलाल, विजय कुमार और शेर सिंह के नाम थे। ईडी ने थर्ड डिग्री का इस्तेमाल कर कहा कि उसे इन लोगों को पेपर लीक में शामिल बताना है। अगर बयान दोगे तो सरकारी नौकरी बच जाएगी और सरकारी गवाह बनाकर मामले से बाहर निकाल देंगे।
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आरपीएससी में मेंबर बनाने का खेल
कटारा ने मानहानि केस में दिए बयान में स्वीकार किया कि उसने ईडी अफसरों की यातनाओं से बचने के लिए दिनेश खो​डनिया का नाम लिया था, जबकि हकीकत में वह खोडनिया को शक्ल भी नहीं जानता।
लेकिन, सागवाड़ा और डूंगरपुर में खोडनिया का नाम व प्रतिष्ठा काफी जानी पहचानी है। उसने डर के कारण खोडनिया का झूठा नाम लिया था। कटारा ने कोर्ट को भेजे इस बयान में खोडनिया से माफी भी मांगी है। मानहानि का यह केस अभी कोर्ट में पेडिंग है।
ईडी ने भी माना, खोडनिया के खिलाफ सबूत नहीं
दिनेश खोडनिया ने जब्त किए 24 लाख रुपए, दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस आदि को रिलीज करवाने के लिए सफेमा ट्रिब्यूनल, दिल्ली में अर्जी दायर की थी। इस मामले में ईडी ने ट्रिब्यूनल में पेश जवाब में माना है​ कि कटारा के बयान के अनुसार अशोक जैन को पैसा देने के कोई सबूत नहीं मिले।
कटारा ने बयान के पक्ष में कोई सबूत नहीं दिया और ईडी को भी अनुसंधान में खोडनिया के रिश्वतेदार अशोक जैन को आरपीएससी मेंबर बनने के लिए बाबूलाल कटारा की ओर से नगद देने के कोई सबूत नहीं मिले है। ना ही तीनों के बीच में किसी भी प्रकार के लेन-देन के बैंकिंग सबूत मिले हैं।
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कोई अन्य सबूत भी नहीं
ईडी ने माना है कि खोडनिया के घर से जब्त 24 लाख रुपए का सेकंेड ग्रेड टीचर पेपर लीक मामले की आपराधिक कार्रवाई से संबंधित होने के कोई सबूत नहीं है। ईडी ने यह भी माना है कि जब्त दस्तावेजों व मोबाइल आदि की जांच में खोडनिया के टीचर पेपर लीक से किसी प्रकार से संबंधित होने के कोई सबूत नहीं है।
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रिलीज किया कैश
दोनों पक्ष की सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल चेयरमैन जस्टिस एमएन भंडारी व सदस्य जीसी मिश्रा की बैंच ने 21 अगस्त,2025 को दिनेश खोडनिया के जब्त किए 24 लाख रुपए, दस्तावेज व मोबाइल फोन आदि रिलीज करने के आदेश दिए।
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67 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश
सेकंड ग्रेड टीचर भर्ती पेपर लीक मामले में बाबूलाल कटारा सहित 67 से ज्यादा आरोपियों के खिलाफ एसओजी चार्जशीट पेश कर चुकी है। सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर बहस हो रही है। संभवत: अगले सप्ताह मामले में आरोप तय हो जाएंगे।
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दिनेश खोडनिया की मामले में सफाई
डूंगरपुर के पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिनेश खोडनिया का पूरे मामले को लेकर कहा कि बाबूलाल कटारा को आरपीएससी मेंबर बनवाने में मेरी कोई भूमिका नहीं थी। उसके पैसे देने वाले बयान के बाद मैंने कटारा के खिलाफ मानहानि का केस किया है।
जवाब में कटारा ने जेल से दिए बयान में माना है कि ईडी ने जबरन उससे मेरे खिलाफ बयान दिलवाया था। उसका यह बयान कोर्ट के रिकॉर्ड पर है। केस अभी चल रहा है। इसके अतिरिक्त ईडी ने भी ट्रिब्यूनल में स्वीकार किया है कि मेरा कटारा और पेपर लीक मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
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