राज्यसभा चुनाव ने टाला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान, आखिर किसके साथ हैं निर्मला सप्रे?
Ramanand Tiwari | Jun 13, 2026, 08:45 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मतदान होता तो तस्वीर साफ हो सकती थी, लेकिन निर्विरोध निर्वाचन के बाद भी बीना विधायक की राजनीतिक पहचान पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर किस दल के साथ खड़ी हैं निर्मला सप्रे...
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- राज्यसभा चुनाव में मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी।
- भाजपा के तीन प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए।
- निर्मला सप्रे ने मुख्यमंत्री के सामने भाजपा में शामिल होने की घोषणा की।
- हाईकोर्ट में खुद को कांग्रेस की सदस्य बताया।
- जनता जानना चाहती है उनकी वास्तविक राजनीतिक स्थिति।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि 18 जून को मतदान होता, तो लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद पर कुछ हद तक पर्दा उठ सकता था। फिलहाल वोटिंग टल गई है, लेकिन संशय अब भी बरकरार है।
- राज्यसभा चुनाव में मतदान की जरूरत नहीं पड़ी।
- भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
- निर्मला सप्रे का वोट सार्वजनिक परीक्षा का विषय बन सकता था। हाईकोर्ट में वह खुद को कांग्रेस विधायक बता चुकी हैं।
- मुख्यमंत्री की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होने की घोषणा भी कर चुकी हैं।
- जनता के बीच अब भी सवाल है कि उनकी वास्तविक राजनीतिक स्थिति क्या है।
वोटिंग होती तो क्या खुल सकती थी तस्वीर?
ऐसे माहौल में यदि मतदान होता, तो निर्मला सप्रे का रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता। उनका वोट यह संकेत दे सकता था कि वह व्यवहारिक रूप से किस दल के साथ खड़ी हैं। लेकिन निर्विरोध निर्वाचन के कारण यह स्थिति फिलहाल टल गई।
आधा कार्यकाल बीता, लेकिन सवाल वहीं के वहीं
मामला विधानसभा अध्यक्ष से लेकर न्यायालय तक पहुंचा। इसी बीच हाईकोर्ट में स्वयं को कांग्रेस का विधायक बताया जाना पूरे विवाद को नया आयाम दे गया।
कांग्रेस और भाजपा, दोनों के सामने असहज सवाल
दूसरी ओर, यदि उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया है, तो उनकी संवैधानिक स्थिति को लेकर अब तक स्पष्टता क्यों नहीं आ सकी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियां लोकतांत्रिक व्यवस्था में भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं।
जनता पूछ रही है जवाब
- क्षेत्र की जनता जानना चाहती है।
- विधायक किस दल के निर्देशों का पालन कर रही हैं?
- क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए किस राजनीतिक मंच का सहारा लिया जाए?
- दलबदल से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा क्यों नहीं होता?
- राजनीतिक दलों की जवाबदेही तय करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
घटनाक्रम: कैसे बदलते गए राजनीतिक संकेत...
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होने की घोषणा। क्षेत्र के विकास को वजह बताया।
1 सितंबर 2024
विधायकी से जुड़े मुद्दे पर उचित समय पर स्थिति स्पष्ट करने की बात कही गई।
19 अक्टूबर 2024
जल्द निर्णय लेने के संकेत दिए गए और सार्वजनिक जीवन में सिद्धांतों का उल्लेख किया गया।
23 जुलाई 2025
स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों के बीच मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश नेतृत्व से मुलाकात हुई।
अप्रैल 2026
हाईकोर्ट में स्वयं को कांग्रेस की सदस्य बताया गया। जब कांग्रेस की विधायक निर्मला सप्रे को द सूत्र ने बात करने के लिए मोबाइल किया तो उनके यहां किसी व्यक्ति ने फ़ोन उठाया। उन्होंने कहा कि विधायक अभी बात नहीं कर सकती।
क्या आगे आएगा कोई बड़ा फैसला?
राहत मिली, लेकिन जवाब अभी बाकी हैं
बीना की जनता अब भी जानना चाहती है कि उनके द्वारा चुना गया प्रतिनिधि आखिर किस राजनीतिक दल और किस वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ खड़ा है। न्यायालय, विधानसभा अध्यक्ष और स्वयं निर्मला सप्रे के अगले कदम पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।
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