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देश की न्याय व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने पांच राज्यों के हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिस (मुख्य न्यायाधीश) की नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है। इन नियुक्तियों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने की थी, जिसकी अगुवाई देश के चीफ जस्टिस बी.आर. गवई कर रहे हैं।
In exercise of the power conferred by the Constitution of India, in consultation with the Chief Justice of India, the President is pleased to appoint following Judges as Chief Justices of High Courts along with transfer of following Chief Justices: pic.twitter.com/9qUlVjfeDb
— Arjun Ram Meghwal (@arjunrammeghwal) July 14, 2025
अब ये 5 चीफ जस्टिस संभालेंगे हाईकोर्ट की कमान
इन पांच जजों को देश के अलग-अलग हाईकोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है
- जस्टिस संजीव सचदेवा जो अब तक एक्टिंग चीफ जस्टिस के तौर पर कार्य कर रहे थे उनको मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया है।
- जस्टिस तरलोक सिंह चौहान अब झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस होंगे।
- जस्टिस विभू बाखरू को कर्नाटक हाईकोर्ट की कमान दी गई है।
- जस्टिस आशुतोष कुमार को गुवाहाटी हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया है।
- जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली को पटना हाईकोर्ट का नया चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है।
कॉलेजियम सिस्टम से होती है जजों की नियुक्ति
भारत में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए एक व्यवस्था बनाई गई है, जिसे कॉलेजियम सिस्टम कहा जाता है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और उनके चार वरिष्ठतम जज मिलकर यह तय करते हैं कि किसे कहां जज या चीफ जस्टिस बनाया जाए। यह कॉलेजियम ही इन पांच जजों के नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
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जरूरी थी यह नियुक्तियां
देश के कई हाईकोर्ट में स्थायी चीफ जस्टिस नहीं थे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ही जस्टिस सुरेश कुमार कैत के रिटायर होने के बाद से जस्टिस संजीव सचदेवा एक्टिंग चीफ जस्टिस के रूप में कार्य कर रहे थे। इससे कोर्ट के कामकाज पर असर पड़ रहा था। अब जब इन राज्यों को नए चीफ जस्टिस मिल गए हैं, तो उम्मीद की जा रही है कि वहां फैसले तेजी से होंगे और लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा।
हाईकोर्ट को मिल सकते हैं और नए जज
सूत्रों के अनुसार आने वाले समय में और भी हाईकोर्ट में नए जजों की नियुक्तियां हो सकती हैं। कई सीनियर जज रिटायर होने वाले हैं, इसलिए कोर्ट और सरकार दोनों कोशिश में हैं कि खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाए।
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