27% OBC आरक्षण पर 20 जुलाई को ओबीसी महासभा करेगी विधानसभा का घेराव
Sandeep Kumar | Jul 18, 2026, 18:14 IST
27% OBC आरक्षण
मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण देने की मांग तेज हो गई है। ओबीसी महासभा 20 जुलाई को भोपाल में विधानसभा घेराव करेगी। कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने इस आंदोलन को समर्थन दिया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण की मांग तेज हुई है।
- OBC महासभा 20 जुलाई को भोपाल में प्रदर्शन करेगी।
- विधानसभा घेराव में कांग्रेस ने समर्थन देने की घोषणा की।
- समाजवादी पार्टी भी आंदोलन के समर्थन में उतर गई है।
- सपा ने OBC को 52% आरक्षण देने की मांग की है।
सचिन यादव ने दिया समर्थन
सचिन यादव ने भाजपा सरकार की नीतियों को ओबीसी विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि वे 20 जुलाई को होने वाले घेराव का पूर्ण समर्थन करते हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी ओबीसी वर्ग से इस आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने की अपील की।
उनका कहना है कि यह आंदोलन एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से जुड़ने की अपील दोहराई। उनके इस समर्थन से आंदोलन को नई ताकत मिली है।
सपा की बड़ी मांग
डॉ मनोज यादव ने एक कदम आगे बढ़कर बड़ी मांग रखी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जनसंख्या के अनुपात में ओबीसी वर्ग को आरक्षण मिलना चाहिए। उनके अनुसार यह आंकड़ा 52 फीसदी होना चाहिए।
यह मांग मौजूदा 27% आरक्षण से काफी ज्यादा है। इससे साफ है कि सपा इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपना रही है। आने वाले दिनों में यह मांग और चर्चा में आ सकती है।
20 जुलाई का घेराव क्यों अहम
इस आंदोलन के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। मांग है कि 27% आरक्षण को बिना किसी रोक-टोक के लागू किया जाए। साथ ही 13% आरक्षण पर लगा होल्ड तुरंत हटाया जाए।
राजनीतिक दलों के समर्थन से इस आंदोलन को नई धार मिली है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
पूरा मामला क्या है?
इस फैसले के बाद राज्य में कुल आरक्षण 63 प्रतिशत हो गया। इसमें एससी को 16 प्रतिशत और एसटी को 20 प्रतिशत आरक्षण मिला। ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण तय हुआ। यह सुप्रीम कोर्ट की 50 प्रतिशत सीमा से अधिक था। इसी आधार पर फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
क्या था हाईकोर्ट का फैसला?
इस आदेश से कई सरकारी भर्तियां प्रभावित हुईं। कई परीक्षाओं के परिणाम और नियुक्तियां अटक गईं। बाद में सरकार ने भर्ती प्रक्रिया जारी रखने के लिए नई व्यवस्था लागू की।
MPPSC ने 87:13 फॉर्मूला अपनाया
इन पदों को भविष्य में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू होने की स्थिति के लिए रखा गया। इस फॉर्मूले को भी बाद में अदालत में चुनौती दी गई। इसका असर राज्य सेवा परीक्षा, सहायक प्राध्यापक भर्ती और चिकित्सा शिक्षा विभाग की भर्तियों पर पड़ा। हजारों अभ्यर्थियों के परिणाम और नियुक्तियां लंबे समय तक रुकी रहीं।
मामला अब सुप्रीम कोर्ट में
22 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले से जुड़ी सुनवाई फिलहाल हाईकोर्ट में अलग-अलग नहीं होगी। 7 अप्रैल 2025 को यूथ फॉर इक्वलिटी की याचिका पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संबंधित कानून पर प्रथम दृष्टया रोक नहीं है।
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