वन नेशन-वन इलेक्शन को मोदी कैबिनेट की हरीझंडी, शीत सत्र में पेश होगा बिल
Sourabh Bhatnagar | Sept 18, 2024, 15:23 IST
वन नेशन-वन इलेक्शन
मोदी कैबिनेट ने 'वन नेशन-वन इलेक्शन' ( One Nation One Election ) प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।। इससे अब चुनावी खर्च कम होगा और विकास कार्य सुचारु होंगे।
भारत में चुनावी प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में मोदी कैबिनेट ने 'वन नेशन-वन इलेक्शन' यानी एक देश-एक चुनाव के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब बिल लोकसभा के शीतकालीन सत्र में पटल पर रखे जाने की तैयारी है।
इस प्रस्ताव के तहत देशभर में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने का सुझाव दिया गया है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित समिति ने इस मामले पर मार्च में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें इस व्यवस्था की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई थी।
कोविंद समिति ने अपनी रिपोर्ट में अनुशंसा की है कि पहले चरण में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं। इसके बाद इन चुनावों के 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जाएं। यह प्रस्ताव इसलिए लाया गया है, ताकि पूरे देश में एक निश्चित समय सीमा में चुनावी प्रक्रियाएं पूरी हो सकें। वर्तमान में भारत में विधानसभा और लोकसभा के लिए अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं, जिससे बार-बार चुनावी मोड में आने की स्थिति बनती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से 'वन नेशन-वन इलेक्शन' की वकालत करते आए हैं। उन्होंने अपने एक बयान में कहा था कि देश में सरकारों का पूरा कार्यकाल चुनावी माहौल में नहीं बीतना चाहिए। उनका मानना है कि चुनावी प्रक्रियाओं में बार-बार व्यस्त रहने से विकास कार्यों पर नकारात्मक असर पड़ता है और सरकार को पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। उन्होंने यह भी कहा था कि चुनावों के लिए बड़ी धनराशि खर्च होती है, जिसे एक साथ चुनाव कराने से बचाया जा सकता है। ज्ञातव्य है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में वन नेशन, वन इलेक्शन का वादा किया था।
केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति ने 62 राजनीतिक पार्टियों से संपर्क किया था, जिनमें से 32 पार्टियों ने 'वन नेशन-वन इलेक्शन' का समर्थन किया था। इनमें जेडीयू और एलजेपी (आर) जैसी पार्टियां भी शामिल हैं, जो मानती हैं कि इससे समय और पैसे की बचत हो सकेगी। जबकि 15 पार्टियों ने इसका विरोध किया था, जिनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, सीपीएम और बसपा प्रमुख हैं। वहीं, 15 पार्टियों ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिनमें टीडीपी और झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रमुख हैं।
समर्थकों का तर्क है कि 'वन नेशन-वन इलेक्शन' से चुनावी खर्चों में कमी आएगी, प्रशासनिक कार्यों में समन्वय बनेगा और विकास कार्यों को निर्बाध रूप से पूरा करने में सहायता मिलेगी। वहीं, विरोधी पक्ष का मानना है कि यह प्रणाली संघीय ढांचे को कमजोर कर सकती है और राज्यों के अधिकारों को सीमित कर सकती है।
भारत में वर्तमान समय में राज्यों की विधानसभा और देश की लोकसभा के चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं। "वन नेशन, वन इलेक्शन" का मतलब है कि पूरे देश में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं। इसका उद्देश्य यह है कि मतदाता एक ही दिन या चरणबद्ध तरीके से अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करें, चाहे वह लोकसभा का हो या राज्य विधानसभा का।
स्वतंत्रता के बाद, 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए गए थे। लेकिन 1968-69 में कुछ विधानसभाओं और फिर 1970 में लोकसभा को समय से पहले भंग कर दिया गया, जिससे यह परंपरा टूट गई।
सीएम मोहन यादव ने X पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेतृत्व में आज भारतीय लोकतंत्र ने One Nation-One Election की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने One Nation-One Election को दी स्वीकृति का मैं समस्त मध्य प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक स्वागत करता हूं। इस पहल से न केवल भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों और आदर्शों को मजबूती मिलेगी, बल्कि यह हमारी संसदीय प्रणाली में एक ऐतिहासिक सुधार भी साबित होगा। सीएम मोहन ने कहा कि मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि आज के इस निर्णय से भारतीय जनता पार्टी के संकल्प पत्र में की गई एक और महत्वपूर्ण घोषणा साकार होने जा रही है। इस ऐतिहासिक कदम के लिए प्रधानमंत्री मोदी का हृदय से आभार और सभी देशवासियों को बधाई...
इस प्रस्ताव के तहत देशभर में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने का सुझाव दिया गया है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित समिति ने इस मामले पर मार्च में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें इस व्यवस्था की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई थी।
कोविंद समिति ने अपनी रिपोर्ट में अनुशंसा की है कि पहले चरण में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं। इसके बाद इन चुनावों के 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जाएं। यह प्रस्ताव इसलिए लाया गया है, ताकि पूरे देश में एक निश्चित समय सीमा में चुनावी प्रक्रियाएं पूरी हो सकें। वर्तमान में भारत में विधानसभा और लोकसभा के लिए अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं, जिससे बार-बार चुनावी मोड में आने की स्थिति बनती है।
क्या है पीएम मोदी का मत
समिति ने 62 पार्टियों से किया संपर्क
समर्थकों का तर्क है कि 'वन नेशन-वन इलेक्शन' से चुनावी खर्चों में कमी आएगी, प्रशासनिक कार्यों में समन्वय बनेगा और विकास कार्यों को निर्बाध रूप से पूरा करने में सहायता मिलेगी। वहीं, विरोधी पक्ष का मानना है कि यह प्रणाली संघीय ढांचे को कमजोर कर सकती है और राज्यों के अधिकारों को सीमित कर सकती है।
एक साथ ही बड़े चुनाव करने की मंशा
स्वतंत्रता के बाद, 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए गए थे। लेकिन 1968-69 में कुछ विधानसभाओं और फिर 1970 में लोकसभा को समय से पहले भंग कर दिया गया, जिससे यह परंपरा टूट गई।
संकल्प पत्र की घोषणा को किया साकार : सीए मोहन यादव
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज भारतीय लोकतंत्र ने One Nation-One Election की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा One Nation-One Election को दी गई स्वीकृति का मैं समस्त मध्य प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक स्वागत… pic.twitter.com/PWY73inFsC
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) September 18, 2024
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