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News in short
- बिना वास्तविक खरीदी 14 हजार 934.50 क्विंटल धान कागजों में दर्ज की गई।
- फर्जी एंट्री के जरिए 3.53 करोड़ रुपए निकालने की कोशिश।
- गोदाम में स्टॉक कम मिला, पोर्टल में दिखी भरमार।
- केंद्र प्रभारी और ऑपरेटर ने फर्जीवाड़ा स्वीकार किया।
- BNS 2023 की गंभीर धाराओं में FIR, वसूली की तैयारी।
News in detail
जबलपुर की मझौली तहसील में धान उपार्जन की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। बिना धान खरीदे 3.53 करोड़ रुपए का फसल रिकॉर्ड पर दिखाया गया। जांच में घोटाला सामने आया। पुलिस ने केंद्र प्रभारी और ऑपरेटर पर केस दर्ज किया है।
फाइलों में लहलहाई करोड़ों की फसल
जबलपुर जिले की मझौली तहसील में धान उपार्जन के नाम पर ऐसा घोटाला सामने आया है। इस घोटाले ने पूरी सरकारी खरीद प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वृहताकार सेवा सहकारी संस्था मझौली द्वारा संचालित श्रीजी वेयरहाउस में कोई धान नहीं आया और न तौल हुई। फिर भी कागजों और ई-उपार्जन पोर्टल पर 14,934.50 क्विंटल धान की खरीदी दिखाकर 3 करोड़ 53 लाख 79 हजार 830 रुपए की राशि का घोटाला किया गया।
पोर्टल पर रिकॉर्ड और खाली पड़ा गोदाम
संयुक्त कलेक्टर ऋषभ जैन की अध्यक्षता में गठित जांच दल ने केंद्र का भौतिक सत्यापन किया। इसमें पोर्टल और जमीनी स्थिति में बड़ी असमानता पाई गई। ई-उपार्जन पोर्टल पर केंद्र में कुल 65,235.5 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज थी। गोदाम में रखे वास्तविक स्टॉक और ऑनलाइन परिदान का मिलान करने पर 14,934.50 क्विंटल धान की कमी पाई गई। इसने पूरे रिकॉर्ड को संदिग्ध बना दिया।
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बोरियों ने खुद खोल दी पोल
जांच के दौरान गोदाम में रखी बोरियों का वजन भी इस फर्जीवाड़े की गवाही देता दिखा। नियमानुसार प्रति बोरी 40.580 किलो धान होना चाहिए था, लेकिन बोरियों का औसत वजन 33.42 से 35 किलो था। कई बोरियों पर न किसान कोड था और न ही अनिवार्य स्टेंसिल, जिससे साबित हुआ कि धान की खरीदी केवल कागजों तक सीमित थी।
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डिलीट करने की कोशिश, कबूलनामा सामने आया
घोटाले का पर्दाफाश होने पर केंद्र प्रभारी रत्नेश भट्ट और ऑपरेटर अमन सेन ने स्वीकार किया कि 14,505.20 क्विंटल धान की एंट्री फर्जी थी। दोनों ने पोर्टल से इन एंट्रियों को डिलीट करने का अनुरोध किया। हालांकि, सच्चाई पहले ही सामने आ चुकी थी।
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FIR हुई दर्ज, वसूली की भी तैयारी
जांच रिपोर्ट और कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की स्वीकृति के बाद मझौली थाने में अपराध क्रमांक 0022/2026 दर्ज किया गया। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 316(2), 318(4) और 3(5) के तहत मामला कायम हुआ है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि सरकारी धन की हेराफेरी का मामला है। इसलिए 3.53 करोड़ रुपए की वसूली भू-राजस्व बकाया की तरह किए जाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
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दो नाम, करोड़ों का धान घोटाला
मामले में केंद्र प्रभारी रत्नेश भट्ट (वार्ड क्रमांक 15, मझौली) और कंप्यूटर ऑपरेटर अमन सेन (काकरदेही, मझौली) को नामजद आरोपी बनाया गया है। यह घोटाला दर्शाता है कि कमजोर निगरानी के कारण खेतों से पहले फाइलों में ही करोड़ों की फसल काट ली जाती है।
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