हाईकोर्ट में ‘अथवा’ पर अटकी कानूनी बहस, पंचायत चुनाव के नियमों की व्याख्या पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव के हलफनामे में 'अथवा' शब्द की व्याख्या पर कानूनी बहस शुरू हो गई है । चुनावी नियमों और भ्रष्टाचार पर भी सवाल उठ गए हैं।

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Neel Tiwari
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Photograph: (thesootr)

News in short

  • पंचायत चुनाव विवाद में हाई कोर्ट में नई कानूनी बहस शुरू।
  • हलफनामे में लिखे “अथवा” शब्द की व्याख्या बना विवाद का केंद्र।
  • ‘लंबित आपराधिक मामला’ की परिभाषा पर उठे गंभीर सवाल।
  • कोर्ट ने मामले की जटिलता देखते हुए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया।
  • अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी।

News in detail

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पंचायत चुनाव से जुड़े एक मामले ने अब नया कानूनी मोड़ ले लिया है। चुनावी हलफनामे में लिखे एक शब्द “अथवा” ने पूरे मामले को जटिल बना दिया है। इस शब्द की व्याख्या को लेकर अब मध्य प्रदेश पंचायत निर्वाचन नियम 1995 और भ्रष्ट आचरण नियम 1995 की व्याख्या पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

‘अथवा’ शब्द से खड़ा हुआ कानूनी विवाद

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान एक रोचक कानूनी सवाल सामने आया है। जबलपुर में जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच राकेश पांडे बनाम ऋषिराज मिश्रा एवं अन्य (WP No. 23715/2024) मामले की सुनवाई कर रही है।

सुनवाई के दौरान चुनावी हलफनामे में लिखे गए एक शब्द “अथवा” की व्याख्या को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है। यह बहस इतनी महत्वपूर्ण हो गई है कि इससे सीधे तौर पर मध्य प्रदेश पंचायत निर्वाचन नियम 1995 और मध्य प्रदेश पंचायत निर्वाचन एवं भ्रष्ट आचरण नियम 1995 की व्याख्या पर भी सवाल उठने लगे हैं।

‘लंबित आपराधिक मामला’ किसे माना जाए

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय के. अग्रवाल ने अदालत के सामने महत्वपूर्ण तर्क रखा। उन्होंने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले को तब तक लंबित (Pending) नहीं माना जा सकता जब तक उस मामले में अदालत द्वारा आरोप तय नहीं कर दिए जाते। उनका कहना है कि केवल एफआईआर दर्ज होने या प्रारंभिक जांच होने से मामला ‘लंबित’ नहीं माना जाना चाहिए।

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चुनावी हलफनामे की भाषा पर उठे सवाल

बहस का मुख्य केंद्र चुनाव आयोग के हलफनामे के प्रारूप में लिखी एक पंक्ति है, जिसमें कहा गया है-

  • “मेरे विरुद्ध कोई भी आपराधिक मामला लंबित नहीं है अथवा मेरे विरुद्ध आपराधिक मामलों का विवरण निम्नुसार है…”
  • प्रतिवादी पक्ष का तर्क है कि इस वाक्य में प्रयुक्त “अथवा” शब्द को केवल लंबित मामलों के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं निकाला जा सकता कि हर प्रकार के मामले का खुलासा अनिवार्य है।

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अदालत ने मांगी स्वतंत्र कानूनी राय

मामले की गंभीरता और कानूनी जटिलता को देखते हुए हाई कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ को न्यायालय की सहायता के लिए एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त किया है। उन्हें यह स्पष्ट करने के लिए कहा गया है कि चुनावी हलफनामे में प्रयुक्त इस वाक्य का वास्तविक कानूनी अर्थ क्या है और ‘लंबित मामला’ की सीमा किस स्तर तक मानी जानी चाहिए।

किन नियमों की होगी व्याख्या

अदालत इस मामले का विश्लेषण कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों के आधार पर करेगी। इनमें प्रमुख रूप से-

  • मध्य प्रदेश पंचायत निर्वाचन नियम, 1995 का नियम 31A(2)नियम 35(2)(c)
  • मप्र पंचायत निर्वाचन याचिका एवं भ्रष्ट आचरण नियम, 1995 का नियम 21(1)(d)(i)
  • इन नियमों की व्याख्या से यह स्पष्ट होगा कि चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी देने की सीमा और दायरा क्या होना चाहिए।

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क्या था पूरा मामला

दरअसल यह विवाद वर्ष 2022 में हुए पंचायत चुनाव से जुड़ा है। सीधी जिले के रामपुर नैकिन जनपद पंचायत के वार्ड नंबर 1 से ऋषिराज मिश्रा जनपद सदस्य चुने गए थे।

चुनाव परिणाम के बाद दूसरे उम्मीदवार राकेश पांडे ने आरोप लगाया कि मिश्रा ने नामांकन के समय अपने हलफनामे में आपराधिक मामलों सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई थीं। इसके बाद उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर चुनाव को चुनौती दी।

पहले हाईकोर्ट दे चुका है बड़ा फैसला

इस विवाद में पहले हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया था। 12 नवंबर 2025 को सुरक्षित किया इस आदेश को जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट से 6 मार्च को जारी किया गया था।

ऋषिराज मिश्रा का निर्वाचन निरस्त कर दिया था और वार्ड में फिर से चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। अब उसी मामले से जुड़े कानूनी पहलू में ‘लंबित आपराधिक मामला’ और ‘अथवा’ शब्द की व्याख्या को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

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अगली सुनवाई की तारीख तय

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता स्वतंत्र पांडे को निर्देश दिया है कि वे मामले से जुड़े सभी दस्तावेज एमिकस क्यूरी सिद्धार्थ सेठ को उपलब्ध कराएं। 

सिद्धार्थ सेठ को इस विषय पर अपना शोध और जवाब प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को की जाएगी।

चुनाव आयोग जस्टिस विशाल मिश्रा जनपद सदस्य मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पंचायत चुनाव हाईकोर्ट
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