1 अक्टूबर को मध्यप्रदेश आएंगे राहुल गांधी, आदिवासी बच्चों की मौत का सच जानने पहुंचेंगे बालाघाट
Aman Vaishnav | Sept 29, 2026, 14:08 IST
1 अक्टूबर को बालाघाट पहुंचेंगे राहुल गांधी
1 अक्टूबर को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मध्यप्रदेश के बालाघाट आ रहे हैं। बीते 13 दिन में राहुल गांधी का यह दूसरा मध्यप्रदेश दौरा है। इस बार वे बालाघाट में बैगा आदिवासी बच्चों की हुई मौतों पर पीड़ित परिवारों से मिलेंगे। बिरसा और बैहर के प्रभावित गांवों में अब तक 32 मासूमों की जान जा चुकी है। जांच में कुपोषण, मलेरिया और एनीमिया जैसी वजहें सामने आई थी।
13 दिन में राहुल गांधी का दूसरा मध्यप्रदेश दौरा
राहुल गांधी यहां बैहर और बिरसा विकासखंड के उन सुदूर आदिवासी गांवों में जाएंगे, जहां हाल के महीनों में कई मासूमों ने दम तोड़ा है। राहुल गांधी वहां जाकर पीड़ित परिजनों से बातचीत करेंगे।
19 सितंबर को इंदौर आए थे राहुल
राहुल गांधी ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो जरा राज्य की जमीनी हालत भी देखिए। बीमारी, पोषण और साफ पानी की कमी है। चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण छोटे बच्चों की जान जा रही है।
जून 2026 से शुरू हुआ था मौतों का सिलसिला
इसके बाद यह सिलसिला रुका नहीं और तेजी से दूसरे घरों तक फैल गया।
- 26 जून 2026: कोहनीमोड़टोला गांव की 14 वर्षीय लमनिन धुर्वे की बीमारी से मौत हुई थी।
- 27 जून 2026: साहिल धुर्वे नाम के एक और बच्चे ने दम तोड़ दिया था।
- बढ़ता दायरा: इसके बाद बोंदारी, कुंडेकसा, कोरका और आसपास के कई मजरों-टोलों में लगातार बच्चों की मौतें दर्ज की जाने लगीं।
कैसे दबा रहा मामला ?
प्रशासनिक स्तर पर बात करें तो 22 जुलाई को यह मामला बाहर आया। अडोरी पंचायत के सरपंच ने तत्कालीन एसडीएम को बोंदारी गांव में 3 बच्चों की मौत की लिखित जानकारी दी थी। इसके बाद 12 अगस्त को जिला प्रशासन ने प्रभावित गांवों में फैली बीमारी को लेकर पहला आधिकारिक पत्र जारी किया।
अगस्त के मध्य में जब मीडिया में मौतों का आंकड़ा तेजी से सामने आने लगा, तब जाकर यह मामला पूरे प्रदेश की सुर्खियों में आया। इसके तुरंत बाद केंद्र और राज्य की विशेषज्ञ स्वास्थ्य टीमें गांवों में भेजी गईं।
जब टीमों ने बच्चों के खून के नमूने लेकर जांच शुरू की तो पता चला कि यह सिर्फ मलेरिया का मामला नहीं था। रिपोर्ट में खसरा, मलेरिया, दोनों का मिला-जुला असर देखने को मिला। इसके अलावा कुपोषण, खून की कमी, निमोनिया, शरीर में पानी की कमी और शॉक जैसी कई जानलेवा वजहें भी सामने आईं।
12 सितंबर को पहुंचे थे CJP प्रमुख अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि प्रशासन मौतों की संख्या को मान तो रहा है, लेकिन आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। न ही जवाबदेही तय की गई।
दिपके ने यह भी दावा किया कि गांव वालों के अनुसार मौतों की असल संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। कुछ बच्चों का बिना पोस्टमॉर्टम करवाए ही अंतिम संस्कार करवा दिया गया था।
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