रायसेन : गोदामों से 291 क्विंटल सरकारी गेहूं हजम, जांच पर परोसी जा रही लीपापोती
Ravi Awasthi | Sept 12, 2025, 19:45 IST
wheat raisen
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार अब धृष्टता के साथ हो रहा है। दोषियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होने से हौंसले बुलंद हैं। वे बेखौफ इसे अंजाम दे रहे हैं।
रवि अवस्थी,भोपाल।
रायसेन जिले में गोदामों से करीब 291 क्विंटल सरकारी गेहूं गायब होने का एक बड़ा मामले सामने आया है। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अब वारदात से जुड़े दोषियों को बचाने की कवायद की जा रही है। जबकि इससे पहले तीन सौ क्विंटल गेहूं की जांच के मामले को भी दबाया जा रहा है।
नया मामला जिले के परसौरा व रतनपुर वेयर हाउस से जुड़ा है। साल 2021-22 में जिले में करीब 42716 क्विंटल गेहूं रखा गया था। बाद में इसमें करीब 291 क्विंटल गेहूं जिले की राशन दुकानों में आपूर्ति के दौरान गायब हो गया। यह मामला उस वक्त पकड़ में आया जब राशन दुकानदारों ने गेहूं कम मिलने की शिकायत की। तब जिला कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए।
जिले के सहायक आपूर्ति अधिकारी द्वारा की गई जांच में पाया गया कि कागजों में प्रत्येक बोरी में 50 किलो गेहूं राशन दुकानों पर भेजना बताया गया,जबकि वास्तविकता में यह मात्रा 17 से 30 किग्रा.प्रति बोरी ही थी। यही नहीं,गेहूं की आपूर्ति के दौरान उक्त दोनों ही गोदामों में रखी बोरियों की संख्या अचानक बढ़ गई। ऐसी 589 बोरियां दस्तावेजों में अधिक मिली। इस मान से करीब 8 लाख रुपए कीमत का 291 क्विंटल गेहूं की अफरा-तफरी की गई।
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जांच रिपोर्ट में कहा गया कि यह तथ्य भी विचारणीय है कि गेहूं चोरी के करीब चार माह बाद आनलाइन पोर्टल से डीओ यानी वितरण आदेश डिलीट कर दिया गया। बताया जाता है कि पोर्टल का संचालन क्षेत्रीय प्रबंधक के स्तर से होता है। जो यह दर्शाता है कि गेहूं की अफरा-तफरी में जिले से लेकर क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय तक मिलीभगत रही।
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जांच रिपोर्ट को दबाने की कवायद
सहायक आपूर्ति अधिकारी की जांच रिपोर्ट इसी साल 9 जनवरी को सौंप दी गई थी,लेकिन इसे करीब आठ माह तक जिलास्तर पर दबाया गया। शिकवे-शिकायत बढ़ने पर यह रिपोर्ट 8 अप्रैल 2025 की बैक डेट में पिछले माह ही निगम मुख्यालय को भेजी गई और अब यहां भी इस मामले को दबाने का जतन हो रहा है। इस मामले में मप्र वेयर हाउस कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक अनुराग वर्मा ने कहा कि आप प्रकरण संज्ञान में लाए हैं तो वह इसे दिखवाते हैं।
जबकि क्षेत्रीय प्रबंधक राजेश अग्रवाल ने बेपरवाह वाले अंदाज में कहा कि जांच कलेक्टर ने कराई है तो वहीं कार्रवाई भी होगी। आनलाइन पोर्टल से डीओ डिलीट होने के मामले में भी उनका जवाब गोलमोल रहा। वहीं,जांच रिपोर्ट आठ माह विलंब से निगम मुख्यालय भेजे जाने के मामले में जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी राजू कातुलकर चुप्पी साध गए। उन्होंने व्हाट्सएप संदेश तक का जवाब नहीं दिया।
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रायसेन में सरकारी गेहूं की अफरा-तफरी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बीते साल जिला मुख्यालय की सरकारी एवं केसर गोदाम से करीब तीन सौ क्विंटल गेहूं की इसी तरह अफरा-तफरी हुई। इसकी शिकायत पर तत्कालीन कलेक्टर अरविंद दुबे ने मामले की जांच कर रिपोर्ट तीन दिन में देने का आदेश जारी हुआ।
इसके लिए तत्कालीन एसडीएम मुकेश कुमार के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच समिति भी बनाई गई,लेकिन यह समिति 13 माह में भी जांच नहीं कर सकी। आलम यह है कि मुकेश कुमार सहित दो सदस्यों को हाल ही में तबादला हो गया तो एक सदस्य सेवानिवृत हो गए। शिकायतकर्ता ने नई समिति गठित कर जांच जल्द पूरी करने की मांग की,लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया।
रायसेन जिले में गोदामों से करीब 291 क्विंटल सरकारी गेहूं गायब होने का एक बड़ा मामले सामने आया है। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अब वारदात से जुड़े दोषियों को बचाने की कवायद की जा रही है। जबकि इससे पहले तीन सौ क्विंटल गेहूं की जांच के मामले को भी दबाया जा रहा है।
नया मामला जिले के परसौरा व रतनपुर वेयर हाउस से जुड़ा है। साल 2021-22 में जिले में करीब 42716 क्विंटल गेहूं रखा गया था। बाद में इसमें करीब 291 क्विंटल गेहूं जिले की राशन दुकानों में आपूर्ति के दौरान गायब हो गया। यह मामला उस वक्त पकड़ में आया जब राशन दुकानदारों ने गेहूं कम मिलने की शिकायत की। तब जिला कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए।
50 किलो की जगह 30 किलो गेहूं पहुंचा
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क्षेत्रीय प्रबंधक के पोर्टल से गायब हुआ रिकॉर्ड
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जांच रिपोर्ट को दबाने की कवायद
जबकि क्षेत्रीय प्रबंधक राजेश अग्रवाल ने बेपरवाह वाले अंदाज में कहा कि जांच कलेक्टर ने कराई है तो वहीं कार्रवाई भी होगी। आनलाइन पोर्टल से डीओ डिलीट होने के मामले में भी उनका जवाब गोलमोल रहा। वहीं,जांच रिपोर्ट आठ माह विलंब से निगम मुख्यालय भेजे जाने के मामले में जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी राजू कातुलकर चुप्पी साध गए। उन्होंने व्हाट्सएप संदेश तक का जवाब नहीं दिया।
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13 महीने में भी पूरी नहीं हुई जांच
इसके लिए तत्कालीन एसडीएम मुकेश कुमार के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच समिति भी बनाई गई,लेकिन यह समिति 13 माह में भी जांच नहीं कर सकी। आलम यह है कि मुकेश कुमार सहित दो सदस्यों को हाल ही में तबादला हो गया तो एक सदस्य सेवानिवृत हो गए। शिकायतकर्ता ने नई समिति गठित कर जांच जल्द पूरी करने की मांग की,लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया।
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