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Photograph: (The Sootr)
BHOPAL. शेविंग रेजर खरीदने पर ज्यादा जीएसटी वसूलने के मामले को भोपाल जिला उपभोक्ता फोरम ने अनुचित व्यापार माना है। फोरम ने रिलायंस रिटेल लिमिटेड और रिलायंस स्मार्ट स्टोर को राशि ब्याज सहित वापस लौटाने का निर्णय सुनाया है।
रिलायंस को क्षतिपूर्ति- मानसिक कष्ट की प्रतिपूर्ति के लिए भी आदेशित किया गया है। सुनवाई के दौरान रिलायंस के वकीलों ने आरोपों को नकारने और इसे कर्मचारियों की गलती बताने का प्रयास किया लेकिन उनकी दलीलें फोरम के सामने टिक नहीं सकीं।
प्रोडक्ट पर ज्यादा वसूली जीएसटी
अयोध्या बायपास क्षेत्र में रहने वाले हरीश गेहलोत 9 मई 2024 को रिलायंस स्मार्ट स्टोर पर खरीदारी करने पहुंचे थे। उन्होंने स्टोर से जिलेट प्रेस्टो शेविंग रेजर का पैकेट लिया था। जब वे बिलिंग काउंटर पर पहुंचे तो उनसे 169 रुपए लिए गए। इसका बिल भी उन्हें दिया गया।
घर आकर जब उन्होंने रेजर के पैकेट को देखा तो उस पर अधिकतम कीमत 150 रुपए दर्ज थी। स्टोर पर उनसे जीएसटी के रूप में 25 रुपए से अधिक वसूल किए गए थे। रिलायंस जैसी बड़ी कंपनी के स्टोर पर इस तरह अधिक कीमत और जीएसटी की वसूली से दुखी होकर गेहलोत ने जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद पेश किया था।
18 हजार स्टोर पर अनुचित वसूली
हरीश गेहलोत द्वारा उपभोक्ता फोरम में पेश किए गए आवेदन में रिलायंस स्टोर पर ज्यादा कीमत वसूलने पर दुख प्रकट किया गया था। उनका कहना था देशभर में रिलायंस रिटेल लिमिटेड के 18 हजार से ज्यादा स्टोर संचालित हैं।
रेजर जैसी दैनिक उपयोगी वस्तु इन स्टोर्स से खरीदी जाती हैं। यानी हर दिन कोई न कोई किसी न किसी स्टोर से ऐसा ही रेजर खरीदता है। उन्होंने इस लिहाज से रिलाइंस स्मार्ट स्टोर पर ज्यादा कीमत वसूलने पर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षतिपूर्ति और केस के खर्च के लिए 49.75 लाख रुपए की प्रतिपूर्ति की मांग की थी।
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रिलायंस की दलीलें पड़ी कमजोर
जिला उपभोक्ता फोरम में सुनवाई के दौरान रिलायंस रिटेल लिमिटेड और रिलायंस स्मार्ट स्टोर की ओर से वकील ने तर्क पेश किए। परिवादी के आरोपों को नकारते हुए वकील ने दलीलें दीं। उनका तर्क था कि परिवादी ने 9 मई 2024 को स्टोर से जिलेट प्रेस्टो खरीदा था लेकिन उनसे 19 रुपए ज्यादा नहीं लिए गए।
जिलेट प्रेस्टो स्टोर में विक्रय के लिए नहीं था। इसकी कीमत स्टोर के सिस्टम में अपडेट नहीं हुई थी। कर्मचारी ने अपनी भूल स्वीकार कर प्रोडक्ट बदलकर दूसरा देने का आग्रह किया था। रिलायंस के वकील ने परिवादी हरीश गेहलोत पर स्टोर के कर्मचारी से अभद्रता करने का आरोप लगाकर परिवाद निरस्त करने की मांग की। जिसे फोरम ने तथ्यों के आधार पर अस्वीकार कर दिया।
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फोरम ने माना अनुचित व्यापार
प्रकरण की सुनवाई में हरीश गेहलोत की ओर से सीनियर एडवोकेट जीपी उपवंशी ने पक्ष रखा। रिलायंस के वकील की दलीलें कमजोर साबित हुईं। जिला उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल और सदस्य डॉ.श्रीमती प्रतिभा पांडेय ने स्टोर पर ग्राहक से अधिक कीमत वसूलना अनुचित व्यापार माना।
आदेश में लिखा गया है कि जो प्रोडक्ट विक्रय के लिए नहीं था उसे स्टोर में ग्राहक की पहुंच में क्यों रखा गया था। रिलायंस के वकील इसका कारण भी पेश नहीं कर सके। फोरम ने रिलायंस रिटेल और रिलायंस स्मार्ट स्टोर को संयुक्त रूप से या अलग-अलग अधिक वसूली गई राशि को खरीदी की तारीख से ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उन्हें सेवा में कमी, मानसिक कष्ट और परिवाद व्यय के लिए अलग से प्रतिपूर्ति करनी होगी। रिलायंस स्टोर पर जुर्माना
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