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News In Short
मध्य प्रदेश की 32 छोटी नदियों को फिर से जीवित करने का अभियान शुरू हुआ था।
दो जगहों पर 100 प्रतिशत काम हुआ बाकी 30 नदियों में काम धीमी गति से तल रहे हैं।
नर्मदा नदी में मिलने वाली दो छोटी नदियों पर भी काम धीमी गति से तल रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में 60 धार्मिक स्थानों के पास गंदा पानी पाया गया है।
News In Detail
मध्य प्रदेश में 32 छोटी नदियों को फिर से जीवित करने का अभियान कागजों तक ही सीमित रह गया है। तीन साल से इस पर काम चल रहा है लेकिन असल में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। इन नदियों पर स्टोन पिचिंग, पौधरोपण, फेंसिंग, घाटों का निर्माण, सफाई, वॉकवे, रेलिंग, पाथवे और बेंच लगाने जैसे काम किए जाने थे।
इनमें से सिर्फ दो जगहों पिछोर और बुधनी की छोटी नदियों में ही 100 फीसदी काम हुआ है। बाकी 30 नदियों में से 9 पर तो बिल्कुल भी काम नहीं हुआ है। वहीं कुछ जगहों पर सिर्फ 2 से 10 फीसदी काम हुआ है।
शहरों के काम फाइलों में ही अटके
स्वच्छ भारत मिशन के तहत नदियों को साफ रखने के लिए 353 छोटे शहरों को चिन्हित किया गया था। इन शहरों से निकलने वाले गंदे पानी और घरेलू पानी (यूज्ड और ग्रे वॉटर) को सही तरीके से साफ करके नदियों में बहने से रोकना था।
इसके लिए कुछ ट्रीटमेंट और रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी भी दी गई थी। करीब 110 शहरों में अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है और वो फाइलों में ही अटककर रह गए हैं।
दो साल में भी काम पूरा नहीं
नर्मदा में मिलने वाली दो छोटी नदियों पर सीहोर जिले के शाहगंज और बुधनी में घाट रिपेयरिंग, पौधरोपण और गैबियन वॉल बनाने का काम चल रहा था। बुधनी में यह काम पूरा हो गया है पर शाहगंज में यह काम बहुत धीमी गति से हो रहा है।
सागर की सुनार नदी के लिए 97 लाख रुपए मंजूर किए गए थे। अब तक केवल 40% काम ही हुआ है। वहीं धार जिले के बदनावर की बागेड़ी नदी के लिए 67 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। यहां पर भी दो साल में भी काम पूरा नहीं हो पाया है।
पानी हाथ धोने लायक भी नहीं
दो साल पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश की 89 नदियां पूरे साल बहती हैं। रिपोर्ट में 293 जगहों पर पानी की जांच की गई। इसमें से 197 जगहों पर पानी की गुणवत्ता अच्छी पाई गई (ए-कैटेगरी) जबकि 96 जगहों पर पानी की गुणवत्ता खराब थी।
इनमें से 60 से ज्यादा स्थल धार्मिक क्षेत्रों के पास हैं जहां पानी इतना गंदा है कि उसे हाथ धोने के लिए भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
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