रीवा एयरपोर्ट पर बुकिंग के बावजूद 15 यात्रियों को फ्लाइट बोर्ड करने से रोका गया, ये है पूरा मामला
Anjali Dwivedi | May 04, 2026, 13:16 IST
alliance air flight booking issue
रीवा एयरपोर्ट पर अलायंस एयर की लापरवाही से 15 यात्रियों की दिल्ली फ्लाइट छूट गई। 72 सीटों की बुकिंग के बाद कंपनी ने 48 सीटर छोटा विमान भेज दिया, जिससे कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों ने भारी हंगामा किया।
रीवा एयरपोर्ट से एक बेहद चौंकाने वाला और यात्रियों की परेशानी बढ़ाने वाला मामला सामने आया है। विमानन कंपनी अलायंस एयर की एक बड़ी लापरवाही के कारण चार मई रविवार रात एयरपोर्ट पर भारी अफरातफरी और हंगामे की स्थिति बन गई।
एयरलाइन ने दिल्ली जाने वाले 72 यात्रियों की बुकिंग तो कन्फर्म कर ली, लेकिन मौके पर क्षमता से छोटा विमान भेज दिया। इस तकनीकी और प्रबंधकीय चूक की वजह से 15 यात्रियों को कन्फर्म टिकट होने के बावजूद सफर करने से रोक दिया गया। उन्हें मजबूरन एयरपोर्ट से वापस लौटना पड़ा।
रविवार की रात रीवा से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली फ्लाइट में सफर करने के लिए यात्री उत्साहित थे। अलायंस एयर ने इस रूट के लिए 72 सीटों वाले विमान (ATR-72) की बुकिंग स्वीकार की थी। नियमानुसार, सभी 72 यात्रियों के पास कन्फर्म टिकट थे। लेकिन जब उड़ान का समय नजदीक आया, तो रनवे पर 72 सीटों वाले विमान की जगह महज 48 सीटों वाला छोटा एयरक्राफ्ट लैंड हुआ।
जैसे ही एयरलाइन कर्मचारियों को अहसास हुआ कि विमान की क्षमता यात्रियों की संख्या से काफी कम है, तो उन्होंने आनन-फानन में यात्रियों को रोकना शुरू कर दिया। करीब 48 यात्रियों को तो बोर्डिंग पास मिल गए, लेकिन 15 से अधिक यात्रियों को गेट पर ही रोक दिया गया।
विमानन कंपनी की इस अव्यवस्था ने न केवल यात्रियों का समय बर्बाद किया, बल्कि उनके जरूरी कामों और यात्रा के उद्देश्यों पर भी पानी फेर दिया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा प्रभावित वे लोग हुए जिनका दिल्ली जाना अनिवार्य था। अमरपाटन की रहने वाली शिवानी जैन ने एयरलाइन और एयरपोर्ट प्रबंधन के रवैये पर कड़े सवाल उठाए हैं। शिवानी को सोमवार को एक जरूरी इंटरव्यू के लिए दिल्ली पहुंचना था।
उन्होंने बताया, मेरी फ्लाइट रात 9 बजे की थी। मैं पूरी तरह तैयार होकर दो घंटे पहले ही एयरपोर्ट पहुंच गई थी ताकि समय पर फॉर्मेलिटी पूरी हो सकें। लेकिन बोर्डिंग के समय मुझे चौंकाने वाली बात कही गई।
अधिकारियों ने पहले तो यह बहाना बनाया कि सिस्टम में मेरा टिकट शो नहीं हो रहा है। करीब एक घंटे तक मुझे इधर-उधर टहलाया गया और अंत में साफ कह दिया गया कि फ्लाइट में सीटें नहीं हैं, इसलिए आप नहीं जा सकतीं। शिवानी का कहना है कि एयरलाइन की इस गलती की वजह से उनका करियर और इंटरव्यू दोनों खतरे में पड़ गए।
हैरानी की बात यह है कि एयरलाइन ने विमान बदलने या सीटों की कमी को लेकर यात्रियों को पहले से कोई ईमेल, मैसेज या फोन कॉल नहीं किया था। जब यात्री अपना सामान लेकर चेक-इन काउंटर पर पहुंचे, तब उन्हें इस सच्चाई का पता चला।
यात्रियों का आरोप है कि एयरलाइन कर्मियों ने अपनी गलती मानने के बजाय 'सिस्टम एरर' का सहारा लिया ताकि यात्रियों को तकनीकी रूप से चुप कराया जा सके। जब पीड़ित यात्रियों और उनके परिजनों ने विरोध दर्ज कराया, तो एयरपोर्ट परिसर में तीखी बहस शुरू हो गई।
परिजनों का कहना था कि यदि एयरलाइन के पास बड़ा विमान उपलब्ध नहीं था, तो उन्होंने 72 सीटों की बुकिंग क्यों की? और अगर विमान बदला गया था, तो वैकल्पिक व्यवस्था या रिफंड की जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई?
कन्फर्म टिकट के बावजूद यात्रा से वंचित किए जाने पर शिवानी जैन के परिजनों और अन्य यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा। एयरपोर्ट के भीतर ही प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी हुई और अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई गई। हंगामे को बढ़ता देख मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन यात्रियों की नाराजगी कम नहीं हुई।
काफी देर चले विवाद के बाद, एयरलाइन से जुड़े कुछ स्थानीय अधिकारियों ने दबी जुबान में यह स्वीकार किया कि छोटा विमान आने के कारण ही 15 यात्रियों को वापस भेजा गया है।
हालांकि, इतने बड़े घटनाक्रम और यात्रियों के मानसिक उत्पीड़न के बावजूद अलायंस एयर के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी का आधिकारिक लिखित बयान या माफीनामा सामने नहीं आया है।
यह घटना नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के नियमों का भी खुला उल्लंघन नजर आती है। नियमों के मुताबिक, यदि किसी यात्री को ओवरबुकिंग या विमान बदलने के कारण बोर्डिंग से रोका जाता है, तो एयरलाइन को वैकल्पिक उड़ान या उचित मुआवजे की व्यवस्था करनी होती है।
Rewa Airport पर हुई इस घटना ने मध्य प्रदेश में विमानन सेवाओं के विस्तार और उनके दावों की पोल खोल कर रख दी है। फिलहाल, परेशान यात्री अब कंज्यूमर फोरम और सोशल मीडिया के जरिए अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में हैं।
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एयरलाइन ने दिल्ली जाने वाले 72 यात्रियों की बुकिंग तो कन्फर्म कर ली, लेकिन मौके पर क्षमता से छोटा विमान भेज दिया। इस तकनीकी और प्रबंधकीय चूक की वजह से 15 यात्रियों को कन्फर्म टिकट होने के बावजूद सफर करने से रोक दिया गया। उन्हें मजबूरन एयरपोर्ट से वापस लौटना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
जैसे ही एयरलाइन कर्मचारियों को अहसास हुआ कि विमान की क्षमता यात्रियों की संख्या से काफी कम है, तो उन्होंने आनन-फानन में यात्रियों को रोकना शुरू कर दिया। करीब 48 यात्रियों को तो बोर्डिंग पास मिल गए, लेकिन 15 से अधिक यात्रियों को गेट पर ही रोक दिया गया।
विमानन कंपनी की इस अव्यवस्था ने न केवल यात्रियों का समय बर्बाद किया, बल्कि उनके जरूरी कामों और यात्रा के उद्देश्यों पर भी पानी फेर दिया।
यात्रियों का क्या कहना है
उन्होंने बताया, मेरी फ्लाइट रात 9 बजे की थी। मैं पूरी तरह तैयार होकर दो घंटे पहले ही एयरपोर्ट पहुंच गई थी ताकि समय पर फॉर्मेलिटी पूरी हो सकें। लेकिन बोर्डिंग के समय मुझे चौंकाने वाली बात कही गई।
अधिकारियों ने पहले तो यह बहाना बनाया कि सिस्टम में मेरा टिकट शो नहीं हो रहा है। करीब एक घंटे तक मुझे इधर-उधर टहलाया गया और अंत में साफ कह दिया गया कि फ्लाइट में सीटें नहीं हैं, इसलिए आप नहीं जा सकतीं। शिवानी का कहना है कि एयरलाइन की इस गलती की वजह से उनका करियर और इंटरव्यू दोनों खतरे में पड़ गए।
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बिना सूचना के बदलाव किए गए
यात्रियों का आरोप है कि एयरलाइन कर्मियों ने अपनी गलती मानने के बजाय 'सिस्टम एरर' का सहारा लिया ताकि यात्रियों को तकनीकी रूप से चुप कराया जा सके। जब पीड़ित यात्रियों और उनके परिजनों ने विरोध दर्ज कराया, तो एयरपोर्ट परिसर में तीखी बहस शुरू हो गई।
परिजनों का कहना था कि यदि एयरलाइन के पास बड़ा विमान उपलब्ध नहीं था, तो उन्होंने 72 सीटों की बुकिंग क्यों की? और अगर विमान बदला गया था, तो वैकल्पिक व्यवस्था या रिफंड की जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई?
एयरपोर्ट पर भारी हंगामा
काफी देर चले विवाद के बाद, एयरलाइन से जुड़े कुछ स्थानीय अधिकारियों ने दबी जुबान में यह स्वीकार किया कि छोटा विमान आने के कारण ही 15 यात्रियों को वापस भेजा गया है।
हालांकि, इतने बड़े घटनाक्रम और यात्रियों के मानसिक उत्पीड़न के बावजूद अलायंस एयर के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी का आधिकारिक लिखित बयान या माफीनामा सामने नहीं आया है।
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यात्रियों के अधिकार और सुरक्षा पर सवाल
Rewa Airport पर हुई इस घटना ने मध्य प्रदेश में विमानन सेवाओं के विस्तार और उनके दावों की पोल खोल कर रख दी है। फिलहाल, परेशान यात्री अब कंज्यूमर फोरम और सोशल मीडिया के जरिए अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में हैं।
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