संघ की केंद्रीय बैठक में बड़ा दांव! अनुषांगिक संगठन से आ सकता है भाजपा का नया संगठन महामंत्री

Sanjay Dhiman | Mar 02, 2026, 15:57 IST
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BJPs new organization general secretary may come from a subsidiary organization
Photograph: (the sootr)

भोपाल में भाजपा संगठन महामंत्री पद को लेकर हलचल तेज हो गई है। संघ अपनी केंद्रीय बैठक में नया संगठन महामंत्री चुनने की योजना बना रहा है, जो भाजपा में नई रणनीति की ओर इशारा करता है।

News in Short

  • भाजपा संगठन महामंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।
  • संघ 13-14 मार्च को केंद्रीय बैठक में नए संगठन महामंत्री पर चर्चा करेगा।
  • इस बार संघ अनुषांगिक संगठन से किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को चुन सकता है।
  • संगठन महामंत्री भाजपा और संघ के बीच समन्वय बनाए रखता है।
  • संघ अपने 100 साल पूरे होने पर संगठनात्मक ढांचे को बेहतर बनाने पर मंथन कर रहा है।

News in Detail

BHOPAL. प्रदेश भाजपा में संगठन महामंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हितानंद शर्मा की रवानगी के बाद अब सबकी नजर 13–14 मार्च को होने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की केंद्रीय टोली की बैठक पर टिकी है।

सूत्रों का दावा है कि इस बार संघ सीधे अपने प्रचारक को भेजने के बजाय किसी अनुषांगिक संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी को भाजपा में संगठन महामंत्री बनाकर नई रणनीति का संकेत दे सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह संघ-भाजपा तालमेल की परंपरागत व्यवस्था में अहम बदलाव माना जाएगा।

संगठन महामंत्री क्यों अहम है?

भारतीय जनता पार्टी में संगठन महामंत्री वह कड़ी होता है, जो संघ और पार्टी के बीच समन्वय बनाता है।अब तक परंपरा रही है कि संघ अपने प्रचारकों में से किसी एक को यह जिम्मेदारी देता रहा है, ताकि संगठनात्मक दिशा और वैचारिक तालमेल बना रहे।

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इस बार क्या बदलाव संभव?

सूत्रों के मुताबिक इस बार संघ सीधे अपने पदाधिकारी को भेजने के बजाय अपने किसी अनुषांगिक संगठन-जैसे छात्र, मजदूर, किसान या सेवा क्षेत्र से जुड़े मंच-के वरिष्ठ चेहरे को यह जिम्मेदारी दे सकता है। यह फैसला 13–14 मार्च की केंद्रीय टोली की बैठक में हो सकता है।

संघ क्यों कर रहा है माइक्रो प्लानिंग?

संघ इस वर्ष अपने 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। इसी के तहत संगठनात्मक ढांचे को और चुस्त-दुरुस्त करने पर मंथन चल रहा है।

  • प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक की नई व्यवस्था पर विचार
  • जिम्मेदारियों का विकेंद्रीकरण
  • छोटे-छोटे क्षेत्र में बेहतर संपर्क और निगरानी
  • 50–58 वर्ष आयु वर्ग के अनुभवी पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारी
तर्क यह है कि बड़े प्रांत में लंबी दूरी तय करने में समय अधिक लगता है, जिससे जमीनी संपर्क प्रभावित होता है। नई व्यवस्था लागू होने पर क्षेत्र छोटा होगा और काम की गति बढ़ेगी।

किन मुद्दों पर होगा मंथन?

  • संगठन विस्तार और नई शाखाओं की योजना
  • प्रशिक्षण वर्गों और वैचारिक कार्यक्रमों की रूपरेखा
  • सामाजिक समरसता और सेवा कार्य
  • अनुषांगिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय
  • वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक हालात

राजनीतिक नजरिए से क्यों अहम?

संघ की रणनीतिक बैठकों को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। चुनावी राज्यों की तैयारी, संगठनात्मक मजबूती और जनसंपर्क अभियानों की दिशा इन बैठकों से तय होती है। यदि अनुषांगिक संगठन से संगठन महामंत्री नियुक्त होता है, तो यह संकेत होगा कि संघ अब व्यापक संगठनात्मक अनुभव वाले चेहरों को आगे लाकर भाजपा की कार्यप्रणाली में नया संतुलन बनाना चाहता है।

संघ परिवार की ताकत कितनी?

संघ से वैचारिक रूप से जुड़े लगभग 40 से अधिक प्रमुख संगठन सक्रिय हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से संघ परिवार या विचार परिवार कहा जाता है।

इनमें प्रमुख हैं:

  • अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
  • भारतीय मजदूर संघ
  • भारतीय किसान संघ
  • विश्व हिंदू परिषद
  • सेवा भारती
  • राष्ट्र सेविका समिति
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आगे क्या?

अब निगाहें 13–14 मार्च की बैठक पर टिकी हैं। क्या संघ संगठन महामंत्री के चयन में नई परंपरा की शुरुआत करेगा? या फिर पुरानी व्यवस्था ही बरकरार रहेगी? फिलहाल भोपाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में इसी फैसले की चर्चा है।

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