यह है शिकायत की कॉपी-I
खबर छपने के एक साल बाद पत्रकार पर FIR, इंदौर क्राइम ब्रांच की कार्रवाई पर उठे सवाल
The Sootr | Oct 03, 2026, 14:29 IST
विनय पिंगले लेफ्ट साइड में हैं और राइट साइड (चश्मा पहने) में पत्रकार प्रवेश गौतम हैं।
Bhopal. भोपाल के पत्रकार और 'द करंट स्टोरी' के संपादक प्रवेश गौतम पर इंदौर क्राइम ब्रांच ने अवैध वसूली, मानहानि और आईटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है। शिकायत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मालवा प्रांत के संपर्क प्रमुख विनय पिंगले और उनके सहयोगी जतिन खंडेलवाल ने की है।
इस मामले में बड़ी बात ये है कि एक साल पहले छपी खबर पर अब FIR हुई है। यह FIR भी तब हुई, जब पत्रकार ने शिकायतकर्ताओं से जुड़ी कंपनियों पर लिखित सवाल भेजे और 6 सितंबर 2026 को खबर प्रकाशित की।
शिकायत के मुताबिक 16 सितंबर 2025 को पत्रकार प्रवेश गौतम ने मध्यस्थ सुनील आनंद के जरिए जतिन खंडेलवाल से संपर्क किया और दस लाख रुपए मांगे। आरोप है कि उन्होंने कहा था कि पैसे न मिलने पर वे सरकारी विभागों में शिकायत करेंगे कि डीसीएम टेस्ट लैब्स ने ठेकेदारों को जो रिपोर्ट दी है, वह फर्जी है।
शिकायत के अनुसार खंडेलवाल ने यह मांग ठुकरा दी। इसके बाद 22 सितंबर 2025 को पीडब्ल्यूडी में शिकायत हुई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार यह शिकायत जांच में गलत पाई गई। फिर दिसंबर 2025 में इस विषय पर खबर भी चलाई गई।
दिसंबर 2025 में खबर प्रकाशित होने के बाद शिकायतकर्ताओं की ओर से पुलिस में कोई केस दर्ज नहीं कराया गया। इधर मामला अगस्त 2026 में फिर सामने आया।
दरअसल 22 अगस्त 2026 को गौतम ने पिंगले और खंडेलवाल को वॉट्सऐप और ईमेल पर सवालों की सूची भेजी। इसमें डीसीएम टेस्ट लैब्स और इनोवेटिव कैड सेंटर के वित्तीय लेन-देन पर जानकारी मांगी गई थी। सवालों में मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी दस्तावेज, शासन से धोखाधड़ी, संगठित भ्रष्टाचार और हितों के टकराव से जुड़े कई बिंदु थे।
जब इस मैसेज का जवाब नहीं आया तो गौतम ने 29 अगस्त को दोबारा जवाब मांगा। इसके बाद 6 सितंबर 2026 को खबर प्रकाशित हुई और सोशल मीडिया पर सात मिनट का वीडियो भी डाला गया। इस खबर के बाद ही पिंगले और खंडेलवाल ने क्राइम ब्रांच इंदौर में शिकायत की और FIR दर्ज हो गई।
गौतम सवाल उठाते हैं, "जो राशि मांगने की बात हो रही है, वह सितंबर 2025 का मामला बताया गया है। फिर एक साल बाद शिकायत क्यों की गई? ताकि अगली न्यूज न हो। पुलिस ने दबाव में कार्रवाई की है।"
गौतम का सबसे बड़ा आरोप पुलिस की कार्रवाई की रफ्तार पर है। उनके मुताबिक शिकायती आवेदन मिलने के महज दो घंटे में FIR दर्ज कर ली गई। उनका कहना है कि विधि विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में FIR से पहले जांच का प्रावधान है, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ।
वे यह भी बताते हैं कि वे अधिमान्य (एक्रेडिटेड) पत्रकार हैं। इसलिए नियमों के हिसाब से पुलिस को शिकायत मिलने के बाद पहले जांच करनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि बिना विवेचना के सीधे धाराएं लगा दी गईं।
खबर पहले ही छप चुकी थी: गौतम का कहना है कि जिस खबर को रोकने के लिए पैसे मांगने का आरोप है, वह 20 दिसंबर 2025 को प्रकाशित हो चुकी थी। ऐसे में खबर रोकने के बदले वसूली का तर्क उनके हिसाब से टिकता नहीं।
घटनास्थल भोपाल, केस इंदौर में: गौतम के मुताबिक शिकायत में ही पैसे मांगने की घटना भोपाल की बताई गई है। 6 सितंबर 2026 की खबर से इस घटना का कोई संबंध नहीं है। ऐसे में शिकायत भोपाल में होनी चाहिए थी, इंदौर में नहीं।
शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से कहा है कि प्रवेश गौतम ने जो डॉक्यूमेंट मांगे, जैसे आयकर रिटर्न और बैंक ट्रांजेक्शन जैसे गोपनीय दस्तावेज व्यक्तिगत हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि यह डेटा सर्वर में अनधिकृत रूप से घुसकर हासिल किया गया। उन्होंने इसकी जांच और गौतम के मोबाइल-कंप्यूटर जब्त करने की मांग की है।
विनय पिंगले RSS मालवा प्रांत के पदाधिकारी और इंजीनियर हैं। वे इंदौर के इंद्रपुरी में रहते हैं। वे मेसर्स इनोवेटिव कैड सेंटर के प्रोपराइटर हैं, जो केंद्र और राज्य सरकार के विभागों को इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परामर्श और तकनीकी सेवाएं देती है। मध्य प्रदेश शासन ने मई 2018 में टेंडर के जरिए आईसीसी को पीएम आवास योजना में गुणवत्ता अनुश्रवण एजेंसी नियुक्त किया था।
जतिन खंडेलवाल भोपाल के रहने वाले सिविल इंजीनियर हैं। वे आईसीसी में प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर और डीसीएम टेस्ट लैब्स, भोपाल के सीईओ हैं। यह लैब ठेकेदारों और सरकारी एजेंसियों के लिए सामग्री परीक्षण करती है।
गौतम की खबर और वीडियो में दावा किया गया था कि डीसीएम टेस्ट लैब की रिपोर्ट गलत है और क्वालिटी जांच का काम पिंगले की कंपनी आईसीसी को मिला। खबर में कहा गया कि कूटरचित रिपोर्ट से सरकार को भ्रमित किया जा रहा है और पैसा कर्मचारियों के खातों में घुमाया जा रहा है। यह भी दावा था कि राशि 20 लाख से कम रखी गई ताकि यह जीएसटी के दायरे में न आए। खबर के मुताबिक यह नेटवर्क मध्य प्रदेश के अलावा यूपी, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और केरल तक फैला है।
शिकायतकर्ताओं ने पुलिस को बताया कि खबर में यह भी कहा गया कि अगली कड़ी में बैंक खाते और अन्य दस्तावेज सामने लाए जाएंगे। उन्होंने इसे धमकी के रूप में दर्ज कराया है।
FIR में पिंगले और खंडेलवाल ने खुद को ब्लैकमेलिंग की कोशिश का पीड़ित बताया है। उनका कहना है कि पैसे की मांग ठुकराने के बाद उनके खिलाफ शिकायतें और खबरें चलाई गईं और उनके निजी वित्तीय दस्तावेज अनधिकृत तरीके से हासिल किए गए। उन्होंने पुलिस से इसकी जांच और कार्रवाई की मांग की है।
गौतम का कहना है कि ऊपर दिए तथ्यों से यह आशंका बनती है कि क्राइम ब्रांच इंदौर ने यह FIR किसी दबाव में या किसी अनैतिक उद्देश्य से दर्ज की है। वे कहते हैं, "मैंने अपनी पत्रकारिता की है। हमारा काम सामने वालों से जवाब मांगना होता है। वही सवाल बनाकर भेजे गए और जवाब मांगा गया।"
अब सवाल यह है कि क्या पुलिस मामले की निष्पक्ष विवेचना कर इन बिंदुओं की जांच करेगी। क्या एक साल पुराने आरोप पर, खबर छपने के तुरंत बाद दर्ज हुई FIR टिक पाएगी, या यह पत्रकारिता को दबाने का एक और उदाहरण बनेगी? इसका जवाब जांच से ही मिलेगा।
पहले जानिए, मामला क्या है
शिकायत के अनुसार खंडेलवाल ने यह मांग ठुकरा दी। इसके बाद 22 सितंबर 2025 को पीडब्ल्यूडी में शिकायत हुई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार यह शिकायत जांच में गलत पाई गई। फिर दिसंबर 2025 में इस विषय पर खबर भी चलाई गई।
एक साल तक चुप्पी, फिर FIR
दरअसल 22 अगस्त 2026 को गौतम ने पिंगले और खंडेलवाल को वॉट्सऐप और ईमेल पर सवालों की सूची भेजी। इसमें डीसीएम टेस्ट लैब्स और इनोवेटिव कैड सेंटर के वित्तीय लेन-देन पर जानकारी मांगी गई थी। सवालों में मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी दस्तावेज, शासन से धोखाधड़ी, संगठित भ्रष्टाचार और हितों के टकराव से जुड़े कई बिंदु थे।
जब इस मैसेज का जवाब नहीं आया तो गौतम ने 29 अगस्त को दोबारा जवाब मांगा। इसके बाद 6 सितंबर 2026 को खबर प्रकाशित हुई और सोशल मीडिया पर सात मिनट का वीडियो भी डाला गया। इस खबर के बाद ही पिंगले और खंडेलवाल ने क्राइम ब्रांच इंदौर में शिकायत की और FIR दर्ज हो गई।
गौतम सवाल उठाते हैं, "जो राशि मांगने की बात हो रही है, वह सितंबर 2025 का मामला बताया गया है। फिर एक साल बाद शिकायत क्यों की गई? ताकि अगली न्यूज न हो। पुलिस ने दबाव में कार्रवाई की है।"
दो घंटे में FIR, मगर जांच ही नहीं हुई: पत्रकार
वे यह भी बताते हैं कि वे अधिमान्य (एक्रेडिटेड) पत्रकार हैं। इसलिए नियमों के हिसाब से पुलिस को शिकायत मिलने के बाद पहले जांच करनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि बिना विवेचना के सीधे धाराएं लगा दी गईं।
खबर पहले ही छप चुकी थी: गौतम का कहना है कि जिस खबर को रोकने के लिए पैसे मांगने का आरोप है, वह 20 दिसंबर 2025 को प्रकाशित हो चुकी थी। ऐसे में खबर रोकने के बदले वसूली का तर्क उनके हिसाब से टिकता नहीं।
यह है शिकायत की कॉपी-II
दस्तावेज चोरी और हैकिंग के आरोप पर जवाब
कौन हैं शिकायतकर्ता?
जतिन खंडेलवाल भोपाल के रहने वाले सिविल इंजीनियर हैं। वे आईसीसी में प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर और डीसीएम टेस्ट लैब्स, भोपाल के सीईओ हैं। यह लैब ठेकेदारों और सरकारी एजेंसियों के लिए सामग्री परीक्षण करती है।
6 सितंबर की खबर में क्या था
शिकायतकर्ताओं ने पुलिस को बताया कि खबर में यह भी कहा गया कि अगली कड़ी में बैंक खाते और अन्य दस्तावेज सामने लाए जाएंगे। उन्होंने इसे धमकी के रूप में दर्ज कराया है।
शिकायतकर्ताओं का पक्ष
पत्रकार की आशंका
अब सवाल यह है कि क्या पुलिस मामले की निष्पक्ष विवेचना कर इन बिंदुओं की जांच करेगी। क्या एक साल पुराने आरोप पर, खबर छपने के तुरंत बाद दर्ज हुई FIR टिक पाएगी, या यह पत्रकारिता को दबाने का एक और उदाहरण बनेगी? इसका जवाब जांच से ही मिलेगा।
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