पंचायत चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 15 आरएएस अफसरों के तबादले; जानें किसे क्या मिली जिम्मेदारी?
Jageshwar prasad | Oct 03, 2026, 15:13 IST
आचार संहिता लागू होने से ऐन पहले 15 आरएएस अधिकारियों के तबादले
पंचायत चुनाव की आचार संहिता के प्रभावी होने से पहले, राजस्थान में 15 आरएएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इनमें ज्यादातर उपखंड अधिकारी और अतिरिक्त जिला कलेक्टर शामिल हैं, जिनका चुनाव प्रक्रिया में अहम योगदान होता है। यह निर्णय चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले लिया गया है, जिसके अंतर्गत कानून व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया पर निगरानी रखने का प्रयास किया गया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- पंचायत चुनाव से ऐन पहले बड़ा फेरबदल।
- आचार संहिता से पहले 15 आरएएस के तबादले।
- ज्यादातर एसडीएम और एडीएम स्तर के अफसर।
- कार्मिक विभाग ने जारी किया आदेश।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा शनिवार दोपहर 3 बजे पंचायत चुनाव के आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा और आचार संहिता लागू होने से कुछ ही समय पहले की गई इस कार्रवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किन अधिकारियों के हुए तबादले
श्री अवि गर्ग को रजिस्ट्रार, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर की जिम्मेदारी दी गई है। श्री सुरेन्द्र प्रसाद को उपखण्ड अधिकारी, नारायणपुर कोटपुतली-बहरोड़ लगाया गया है। श्री सुनील शर्मा-I को शासन उप सचिव, सहायता विभाग, जयपुर बनाया गया है।
श्री दिनेश शर्मा को उपखण्ड अधिकारी एवं उप परियोजना अधिकारी, सहरिया विकास परियोजना, शाहबाद बारां लगाया गया है। श्री रवि कुमार को सहायक निदेशक, लोक सेवाएं, करौली बनाया गया है। श्री शिव राज मीना को उपखण्ड अधिकारी, सवाईमाधोपुर लगाया गया है।
अन्य अधिकारियों की तैनाती
श्री बनवारी लाल बैरवा को उपखण्ड अधिकारी, फूलियाकलां भीलवाड़ा लगाया गया है। सुश्री धारा को प्रोटोकॉल अधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग, जयपुर बनाया गया है। श्री श्याम सुन्दर बेनीवाल को उपखण्ड अधिकारी, हनुमानगढ़ लगाया गया है।
चुनावी कमान पर नियंत्रण
ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले पंचायत चुनावों में एसडीएम ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका निभाते हैं। आचार संहिता लगने से ठीक पहले सरकार ने संवेदनशील और महत्वपूर्ण उपखंडों में अनुभवी प्रशासनिक चेहरों को तैनात किया है।
इससे पूरी चुनाव प्रक्रिया और कानून व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण रखा जा सके। यह सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना जरूरी है कि इसका असर चुनाव पर कैसा पड़ता है।
आचार संहिता के बंधन से बचना
यदि बहुत जरूरी हो तो सरकार को चुनाव आयोग से लंबी कागजी कार्रवाई और विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। इसमें आयोग की मंजूरी मिलना तय नहीं होता। इस कानूनी पेंच से बचने के लिए ही सरकार ने आचार संहिता की घोषणा से ठीक पहले यह सूची जारी की है।
स्थानीय समीकरण साधने की कोशिश
अक्सर जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में ऐसे अधिकारियों की तैनाती चाहते हैं, जिनके साथ उनका बेहतर समन्वय हो। इस सूची में नारायणपुर कोटपुतली-बहरोड़, मण्डावर दौसा, शाहबाद और किशनगंज बारां जैसी जगहों पर किए गए बदलाव स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश माने जा रहे हैं।
क्यों अहम है यह फेरबदल?
आचार संहिता लगने के बाद ऐसे तबादले संभव नहीं होते। इसलिए सरकार ने समय रहते यह कदम उठाया। अब सभी की नजर चुनाव आयोग की घोषणा और आगे की प्रक्रिया पर है।
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