RTO के धन कुबेर पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा को जमानत, 10 लाख के मुचलके पर मिली राहत
Neel Tiwari | Aug 04, 2026, 23:12 IST
Photograph: (thesootr)
JABALPUR. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने चर्चित आरटीओ के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नियमित जमानत दे दी है। जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की सिंगल बैंच ने 10 लाख रुपए के निजी मुचलके पर रिहाई का आदेश दिया।
समझें क्या है पूरा मामला...
- सौरभ शर्मा पर आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं।
- जिला अदालत और फिर हाई कोर्ट पहले नियमित जमानत खारिज कर चुके थे।
- पत्नी की बीमारी के आधार पर मांगी गई अंतरिम जमानत भी नहीं मिली थी।
- इसके बाद सौरभ ने बदली परिस्थितियों का हवाला देकर तीसरी नियमित जमानत याचिका दायर की।
- हाई कोर्ट ने लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी को देखते हुए अब नियमित जमानत दे दी।
यह आदेश 4 अगस्त को शाम करीब छह बजे अपलोड हुआ। अदालत ने सौरभ को 10 लाख रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की स्थानीय जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
पहले दो बार नहीं मिली थी राहत
इसके बाद पत्नी की गंभीर बीमारी का हवाला देकर अंतरिम जमानत मांगी गई। 10 जून 2026 को जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने वह आवेदन भी खारिज कर दिया था। अदालत ने उस समय केवल मानवीय आधार पर सुनवाई की थी। नियमित जमानत के अधिकार पर कोई फैसला नहीं दिया गया था।
तीसरी नियमित जमानत में क्या नया आधार
बचाव पक्ष ने कहा कि पूरा केस करीब तीन हजार पन्नों के दस्तावेजों पर आधारित है। ऐसे में ट्रायल जल्दी खत्म होना संभव नहीं है। सौरभ 10 फरवरी 2025 से जेल में है। लगातार लंबी कैद अब सजा जैसी बन गई है।
ईडी ने जमानत का किया था कड़ा विरोध
ईडी ने यह भी कहा कि यदि आरोपी को छोड़ा गया तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी बनी रहेगी। एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।
rto constable saurabh sharma
हाई कोर्ट ने किन आधारों पर दी जमानत
ऐसे में बिना ट्रायल लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कहा कि अब आगे की हिरासत किसी उपयोगी उद्देश्य की पूर्ति नहीं करेगी। इसलिए बिना मामले के गुण-दोष पर राय दिए नियमित जमानत दी जाती है।
इन शर्तों पर मिली जमानत...
- हाई कोर्ट ने सौरभ शर्मा को 10 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी है।
- अदालत ने चार प्रमुख शर्तें लगाई हैं।
- किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे।
- सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे।
- अदालत की अनुमति बिना विदेश नहीं जाएंगे।
- ट्रायल कोर्ट में हर तारीख पर नियमित उपस्थित रहेंगे।
क्या है पूरा मामला
जांच के दौरान कई परिसरों से नकदी, सोना और अन्य संपत्तियां मिलने का दावा किया गया। इनोवा कार से बड़ी मात्रा में नकदी और सोना मिलने का मामला भी जांच का अहम हिस्सा बना। इसी आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की थी।
अब आगे क्या होगा
अदालत ने साफ किया है कि जमानत आदेश का मतलब आरोपों पर अंतिम राय नहीं है। मामले का फैसला ट्रायल के दौरान पेश होने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा।
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