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News In Short
- सागर के शासकीय कॉलेज में 2 करोड़ रुपए की एफडी तुड़वाने का आरोप सामने आया है।
- जांच समिति ने प्राचार्या को दोषी पाया है।
- 7 महीने बाद भी सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
- याचिकाकर्ता की ओर से कई अधिवक्ताओं ने कोर्ट में पक्ष रखा है।
- हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को 4 हफ्ते में जवाब देने को कहा है।
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News In Detail
क्या है पूरा मामला
यह मामला , सागर का है। कॉलेज जनभागीदारी समिति अध्यक्ष नितिन शर्मा ने याचिका दायर की है। उन्होंने जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई न होने को चुनौती दी है। याचिका में पूर्व प्रभारी प्राचार्या डॉ. सरोज गुप्ता का नाम है। उन पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
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जांच समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आया
उच्च शिक्षा विभाग के जरिए गठित दो सदस्यीय जांच समिति ने 19 जून 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में कहा गया कि डॉ. सरोज गुप्ता ने वरिष्ठता सूची में हेराफेरी कर खुद को प्राचार्य नियुक्त करवाया। कॉलेज की जनभागीदारी निधि से जुड़ी करीब 2 करोड़ रुपए की एफडी बिना अनुमति के तुड़वा दी गई। इसके बाद इस राशि को एक निजी बैंक के चालू खाते में जमा करा दिया गया।
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कॉलेज को हुआ लाखों का नुकसान
जांच में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एफडी तुड़वाने के कारण कॉलेज को हर साल मिलने वाला लाखों रुपए का ब्याज बंद हो गया। इसके अलावा जनभागीदारी समिति के खाते से अनियमित खरीदी और भुगतान भी किए गए। इसे जांच समिति ने प्रमाणित माना।
सरकार की निष्क्रियता पर उठे सवाल
जांच रिपोर्ट को उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यालय के माध्यम से आगे की कार्रवाई के लिए भेजा गया था। करीब सात महीने बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार या संबंधित विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इसी निष्क्रियता के खिलाफ जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष ने कोर्ट का रुख किया है।
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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता नितिन कुमार शर्मा की ओर से अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह, पुष्पेंद्र कुमार शाह ने पक्ष रखा। अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि जनभागीदारी समिति एक शासकीय निकाय है। उसके धन का दुरुपयोग सीधे तौर पर सार्वजनिक हित को नुकसान पहुंचाता है।
सरकार सहित उच्च शिक्षा विभाग और सरोज गुप्ता को नोटिस
इस मामले की सुनवाई मुख्य पीठ, जबलपुर में चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में हुई। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा आयुक्त, को नोटिस दिया। साथ ही अतिरिक्त संचालक, संबंधित कॉलेजों के प्राचार्य और डॉ. सरोज गुप्ता को भी नोटिस जारी किया। सभी को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
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जनहित और पारदर्शिता से जुड़ा मामला
कोर्ट ने साफ किया कि शैक्षणिक संस्थानों में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जनभागीदारी समिति जैसे तंत्र में अनियमितता प्रशासनिक पारदर्शिता पर सीधा सवाल खड़ा करती है।
अब आगे क्या
अब सभी प्रतिवादियों के जवाब आने के बाद हाईकोर्ट अगली सुनवाई की तारीख तय करेगा। कोर्ट की टिप्पणी से साफ है कि इस मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में कड़ा रुख अपनाया जाएगा।
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