इंदौर गैस लाइन ब्लास्ट केस में एसडीएम धनगर का झूठा शपथपत्र, HC नाराज
Sanjay Gupta | Aug 06, 2026, 14:41 IST
गैस लाइन ब्लास्ट में एसडीएम धनगर का झूठा शपथ पत्र
इंदौर के विजयनगर में 23 जून को अवंतिका गैस लाइन में हुए विस्फोट में बड़ा झोल हो गया है। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी पीड़ित के उपचार की राशि नहीं दी गई। वहीं एसडीएम ने झूठा शपथपत्र दिया कि भुगतान हो गया।
इंदौर के विजयनगर इलाके के वार्ड 31 में गैस लाइन के ऊपर बोरिंग करने की कोशिश के दौरान विस्फोट हो गया था। इस हादसे में चार लोग झुलस गए थे। मामले को लेकर अधिवक्ता रितेश इनानी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
इसमें सभी घायलों का मुफ्त इलाज कराने की मांग की गई थी। हादसे में गंभीर रूप से घायल झिनी झाला को इलाज के लिए अहमदाबाद के जायडस अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज का खर्च अब 15 लाख रुपए से ज्यादा पहुंच गया है।
एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि जायडस अस्पताल लगातार इलाज के खर्च के भुगतान को लेकर पत्र भेज रहा है। लेकिन सुनवाई तक 15 लाख रुपए के बिल में से एक रुपए का भी भुगतान नहीं किया गया है। इसके बावजूद एसडीएम जूनी इंदौर घनश्याम धनगर ने कोर्ट में शपथपत्र देकर बताया कि भुगतान हो चुका है।
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शपथपत्र के बिंदु 4 में एसडीएम ने लिखा है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार झिनी झाला के इलाज की पूरी व्यवस्था कर दी गई है। अस्पताल का शुल्क भी चुका दिया गया है।
इसके अलावा मरीज या उसके परिवार की ओर से इलाज पर किए गए खर्च की जांच के बाद उसकी राशि वापस कर दी गई है। शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि अगर इसके अलावा कोई और भुगतान बाकी है तो दस्तावेज पेश करने पर उसकी राशि भी चुका दी जाएगी।
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इस मामले पर जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने सवाल उठाए और शासकीय अधिवक्ता से जवाब मांगा। हालांकि, सुनवाई के दौरान स्थिति साफ नहीं हो पाई। इसके बाद कोर्ट ने 7 अगस्त को फिर से मामले की सुनवाई तय करते हुए जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता रितेश इनानी ने बताया कि हाईकोर्ट ने इंदौर एसडीएम घनश्याम धनगर को खुद पेश होने के लिए कहा है।
सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि अन्य पीड़ित भी अस्पताल में जाकर ड्रेसिंग करा रहे हैं और इसके लिए उन्हें हर बार भुगतान करना पड़ रहा है। किसी भी तरह का मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। वहीं मुआवजा राशि को लेकर भी बहस हुई।
उधर, इस मामले में एमपी हाईकोर्ट (Indore News) की सख्ती और आदेश के बाद वार्ड 31 के बीजेपी पार्षद बालमुकुंद सोनी पर भी केस दर्ज किया गया था। द सूत्र ने इस मामले की पूरी इनसाइड स्टोरी पहले ही सामने रखी थी। निगम की रिपोर्ट में सोनी को दोषी बताया गया है।
हालांकि, इंदौर हाईकोर्ट में बताया गया कि सोनी लगातार नगर निगम इंदौर के इंजीनियरों और अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं कि इस घटना के लिए वे जिम्मेदार हैं। इस पर हाईकोर्ट ने सोनी से भी जवाब मांगा है। उनके अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा है।
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इसमें सभी घायलों का मुफ्त इलाज कराने की मांग की गई थी। हादसे में गंभीर रूप से घायल झिनी झाला को इलाज के लिए अहमदाबाद के जायडस अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज का खर्च अब 15 लाख रुपए से ज्यादा पहुंच गया है।
एसडीएम धनगर ने दिया झूठा शपथपत्र
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शपथपत्र में यह लिखा
इसके अलावा मरीज या उसके परिवार की ओर से इलाज पर किए गए खर्च की जांच के बाद उसकी राशि वापस कर दी गई है। शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि अगर इसके अलावा कोई और भुगतान बाकी है तो दस्तावेज पेश करने पर उसकी राशि भी चुका दी जाएगी।
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हाईकोर्ट ने बताई नाराजगी, मांगा जवाब
किसी को भी इलाज की राशि नहीं मिल रही
पार्षद ने निगम के इंजीनियरों को घेरा
हालांकि, इंदौर हाईकोर्ट में बताया गया कि सोनी लगातार नगर निगम इंदौर के इंजीनियरों और अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं कि इस घटना के लिए वे जिम्मेदार हैं। इस पर हाईकोर्ट ने सोनी से भी जवाब मांगा है। उनके अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा है।
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