आखिर क्या है 113 करोड़ के शिवपुरी सीवर प्रोजेक्ट की इनसाइड स्टोरी, जिस पर उखड़ गए सिंधिया?
Amresh Kushwaha | Sept 27, 2026, 12:46 IST
शिवपुरी सीवर प्रोजेक्ट की इनसाइड स्टोरी
शिवपुरी के 69 करोड़ रुपए के सीवर प्रोजेक्ट पर अब तक 113 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। फिर भी 14 साल बाद काम अधूरा है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। अब कमान एमपी अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को सौंपी जाएगी।
समझें क्या है पूरा मामला...
- शिवपुरी सीवर प्रोजेक्ट पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नाराज हुए हैं।
- 69 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर अब तक 113 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
- 14 साल बाद भी सीवर प्रोजेक्ट का काम पूरा नहीं हो पाया है।
- सिंधिया ने निर्माण कार्यों में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का सीधा आरोप लगाया है।
- अब प्रोजेक्ट की कमान एमपी अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को सौंपी जाएगी।
अब तक इस प्रोजेक्ट पर 113 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, फिर भी शहर को पूरी सुविधा नहीं मिल पाई है। सिंधिया ने मीडिया से बातचीत में इस पूरे मामले में हुई अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर सीधा सवाल उठाया है।
कब शुरू हुई थी यह योजना
उस वक्त इसका बजट करीब 69 करोड़ रुपए रखा गया था और इसे पौने दो साल (21 महीने) में पूरा करना था। वहीं, हद तो यह है कि लगभग 14 साल बीत जाने के बाद भी यह काम अधूरा ही पड़ा है।
वहीं, समय बीतने के साथ यह खर्च लगातार बढ़ता चला गया। 13 साल में ही यह राशि बढ़कर 111 करोड़ रुपए तक पहुंच गई थी। वहीं, अब यह खर्च राशि 113 करोड़ हो गई है। इसके बाद भी काम पूरी तरह से खत्म नहीं हो सका।
कहां अटका हुआ है काम
सिंधिया ने क्यों जताई नाराजगी
उन्होंने मीडिया से बातचीत में इस पूरे मामले पर खुलकर अपनी बात रखी। उनका कहना है कि जनता के पैसों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। इससे साफ है कि आने वाले समय में जांच और सख्ती दोनों बढ़ सकती हैं।
दादा के जमाने की याद आई सिंधिया को
सिंधिया ने इस तुलना के जरिए मौजूदा प्रोजेक्ट की खामियों को उजागर किया है। उनका इशारा साफ था कि पुराने समय में हुआ काम आज भी टिकाऊ है। जबकि नया प्रोजेक्ट दोगुने से ज्यादा पैसा खर्च होने पर भी अधूरा है। इस तुलना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
पीएचई और नगर पालिका पर सवाल
इससे साफ है कि निगरानी और तालमेल में कहीं न कहीं कमी रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि काम की गुणवत्ता पर भी ध्यान नहीं दिया गया। बार-बार पैसा खर्च होने के बावजूद स्थाई समाधान नहीं मिल सका।
अब किसे मिलेगी प्रोजेक्ट की कमान
साथ ही निगरानी व्यवस्था भी पहले से बेहतर होगी। शहर के लोग लंबे समय से इस बदलाव का इंतजार कर रहे थे। उनका कहना है कि अब तक की देरी से आम जनता को ही सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी है।
जनता झेल रही है लंबे समय से परेशानी
अब केंद्रीय मंत्री के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद जगी है कि यह मामला जल्दी सुलझेगा। स्थानीय लोगों की मांग है कि जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही बचा हुआ काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
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