अपनी ही सरकार के अफसरों पर भड़के शिवराज, आदिवासियों के उजड़े घर देख सीधे मुख्य सचिव को लगाया फोन
Sumit Kumar | Oct 11, 2026, 22:41 IST
सीहोर के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के टूटे मकान देखने पहुंचे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान।
मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में आदिवासियों के घर तोड़े जाने पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान नाराज हो गए। वे बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव पहुंचे। यहां उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। ग्रामीणों ने मकान तोड़ने और फसलें बर्बाद करने की शिकायत की। शिवराज ने मौके से मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन लगाया।
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी बात की। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से चर्चा करने की बात कही।
सीहोर जिले के कोसमी गांव में वन विकास निगम ने कार्रवाई की है। यहां कई आदिवासी परिवार लंबे समय से रह रहे हैं। इन परिवारों के मकान गिराए जाने का मामला सामने आया है। कार्रवाई से बरेला आदिवासी समुदाय के लोग प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके खेतों की फसलें भी उजाड़ी गईं। कई परिवारों के सामने रहने की परेशानी खड़ी हो गई है।
यह गांव बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आता है। शिवराज सिंह चौहान पहले इसी क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। वर्तमान में वे विदिशा से सांसद और केंद्रीय कृषि मंत्री हैं। घटना की जानकारी मिलने पर वे गांव पहुंचे। उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी परेशानी सुनी।
शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई। उनके मुताबिक उन्होंने पहले ही प्रशासन से बात की थी। वन विभाग के अधिकारियों को भी मकान नहीं तोड़ने के लिए कहा था। इसके बावजूद गांव में कार्रवाई की गई।
शिवराज ने सवाल उठाया कि उनकी बात के बाद भी मकान क्यों गिराए गए। उन्होंने गरीब परिवारों को हो रही परेशानी पर चिंता जताई। मौके पर वरिष्ठ अधिकारियों की गैरमौजूदगी से भी वे नाराज दिखे।
आदिवासी परिवारों के टूटे मकान देखकर शिवराज सिंह चौहान ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मेरे क्षेत्र में जुल्म की पराकाष्ठा हुई है। अन्याय की इंतिहा हो गई है। सुबह तक जिन घरों में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब चीखें सुनाई दे रही हैं। महिलाएं रो रही हैं। लोगों के घर गिरा दिए गए। उनकी फसलें मलबे में दबा दी गईं। कुएं भी मिट्टी से भर दिए गए।
शिवराज ने अधिकारियों को हृदयहीन और संवेदनहीन बताया। उन्होंने सवाल किया कि क्या इन अधिकारियों के परिवार नहीं हैं? अगर उनके अपने बच्चों के साथ ऐसा होता तो कैसा लगता? उन्होंने कहा कि ऐसा अन्याय करने वालों को भगवान भी माफ नहीं करेगा। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ताकि भविष्य में कोई ऐसा अन्याय न कर सके।
गांव में प्रभावित परिवारों की स्थिति देखने के बाद शिवराज ने फोन लगाया। उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से बातचीत की। इस दौरान घरों को तोड़े जाने का मामला उनके सामने रखा। ग्रामीणों की शिकायतों की जानकारी भी दी।
इसके बाद उन्होंने बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से चर्चा की। शिवराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी बात करने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों की कार्रवाई पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई में उन्हें भारी नुकसान हुआ है। कई परिवारों के मकान तोड़ दिए गए। खेतों में लगी मक्का और तुअर की फसलों को भी नुकसान पहुंचाया गया। ये फसलें परिवारों की आजीविका का जरिया थीं।
प्रभावित लोगों ने पानी के कुएं को मिट्टी से भरने का आरोप भी लगाया। इस कुएं से पीने और सिंचाई के लिए पानी मिलता था। ग्रामीणों के मुताबिक अब पानी की व्यवस्था भी मुश्किल हो गई है। मकान टूटने से परिवारों के सामने रहने का संकट भी खड़ा हो गया है।
हालांकि इन आरोपों की वन विकास निगम ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित परिवारों को मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। जिन परिवारों के मकान टूटे हैं, उनके लिए नए घर बनवाए जाएंगे।
शिवराज ने स्थायी आवास मिलने तक अस्थायी व्यवस्था कराने का भरोसा भी दिया। उन्होंने परिवारों के रहने और खाने-पीने का इंतजाम कराने की बात कही। इससे प्रभावित लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है। इसी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हैं। शिवराज एमपी के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में वन विकास निगम की कार्रवाई पर उनकी नाराजगी सामने आई है।
शिवराज का कहना है कि उनकी अधिकारियों से पहले ही बातचीत हो चुकी थी। उन्हें परिवारों के घर नहीं गिराने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद कार्रवाई होने पर उन्होंने सीधे मुख्य सचिव से बात की।
आखिर क्या है पूरा मामला?
यह गांव बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आता है। शिवराज सिंह चौहान पहले इसी क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। वर्तमान में वे विदिशा से सांसद और केंद्रीय कृषि मंत्री हैं। घटना की जानकारी मिलने पर वे गांव पहुंचे। उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी परेशानी सुनी।
शिवराज के कहने पर भी नहीं रुकी कार्रवाई
शिवराज ने सवाल उठाया कि उनकी बात के बाद भी मकान क्यों गिराए गए। उन्होंने गरीब परिवारों को हो रही परेशानी पर चिंता जताई। मौके पर वरिष्ठ अधिकारियों की गैरमौजूदगी से भी वे नाराज दिखे।
शिवराज बोले- अन्याय की इंतिहा हुई
शिवराज ने अधिकारियों को हृदयहीन और संवेदनहीन बताया। उन्होंने सवाल किया कि क्या इन अधिकारियों के परिवार नहीं हैं? अगर उनके अपने बच्चों के साथ ऐसा होता तो कैसा लगता? उन्होंने कहा कि ऐसा अन्याय करने वालों को भगवान भी माफ नहीं करेगा। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ताकि भविष्य में कोई ऐसा अन्याय न कर सके।
मुख्य सचिव को मौके से लगाया फोन
इसके बाद उन्होंने बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से चर्चा की। शिवराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी बात करने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों की कार्रवाई पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
मकान ही नहीं, फसलें भी उजाड़ने का आरोप
प्रभावित लोगों ने पानी के कुएं को मिट्टी से भरने का आरोप भी लगाया। इस कुएं से पीने और सिंचाई के लिए पानी मिलता था। ग्रामीणों के मुताबिक अब पानी की व्यवस्था भी मुश्किल हो गई है। मकान टूटने से परिवारों के सामने रहने का संकट भी खड़ा हो गया है।
हालांकि इन आरोपों की वन विकास निगम ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
शिवराज ने दिया नए घर बनवाने का भरोसा
शिवराज ने स्थायी आवास मिलने तक अस्थायी व्यवस्था कराने का भरोसा भी दिया। उन्होंने परिवारों के रहने और खाने-पीने का इंतजाम कराने की बात कही। इससे प्रभावित लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
अपनी ही सरकार के अफसरों से नाराजगी
शिवराज का कहना है कि उनकी अधिकारियों से पहले ही बातचीत हो चुकी थी। उन्हें परिवारों के घर नहीं गिराने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद कार्रवाई होने पर उन्होंने सीधे मुख्य सचिव से बात की।
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