SIR के साइड इफेक्ट : एक नाम से कई शिकायतें तो कहीं बीएलओ के मतदाता होने पर आपत्ति

Sanjay Sharma | Feb 06, 2026, 23:09 IST
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sir side effects
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मध्य प्रदेश में एसआईआर के दूसरे चरण में मतदाता सूची पर बढ़ती आपत्तियां बीएलओ के लिए मुश्किल पैदा कर रही हैं। फर्जी शिकायतों और अन्य तकनीकी गड़बड़ियों ने मतदाता शुद्धिकरण की प्रक्रिया को चुनौती दी है।

News in Short

  • मध्य प्रदेश में एसआईआर के दूसरे चरण में मतदाता सूची पर आपत्तियां मुश्किल खड़ी कर रही हैं।
  • विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत ज्यादातर आपत्तियां पक्षपातपूर्ण तरीके से की जा रही हैं।
  • एसआईआर के प्रावधान भी मतदाता सूची से नाम काटने की वजह बन रहे हैं और लोग भटकने मजबूर हैं।
  • भोपाल में ही 10 हजार से ज्यादा नाम काटने के लिए दूसरे लोग अथवा मतदाताओं ने फार्म-7 भरा है।
  • आपत्तियों के समाधान के लिए बीएलओ को सबसे ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

News in Detail

BHOPAL.मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य मध्य प्रदेश में भी तेजी से जारी है। प्रदेश में कुल 5.73 करोड़ मतदाताओं को 65 हजार 14 बीएलओ द्वारा नाम जोड़ने के लिए फॉर्म बांटे गए थे।

23 नवंबर तक इनमें से 3.27 करोड़ फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके थे। जहां पहले चरण में मतदाताओं की मैपिंग मुसीबत बनी थी। वहां अब आपत्तियां मुश्किल पैदा कर रही हैं। पूरे प्रदेश में मतदाता शुद्धिकरण के काम पर सवाल उठ रहे हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण में मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं। कहीं बाप- बेटे की उम्र, कहीं ज्यादा बच्चे तो कहीं नाम की त्रुटियों पर नोटिस दिए गए हैं।

निर्वाचन कार्यालयों में इन आपत्तियों के निपटारे को लेकर भीड़ लगी है। इसमें बीएलओ को दोहरी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। मतदाताओं के नाम काटने की शिकायतों के सत्यापन में बीएलओ भटक रहे हैं। ज्यादातर शिकायतकर्ता के नाम और मोबाइल नंबर फर्जी पाए जा रहे हैं।

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भोपाल में शिकायतों का पहाड़

भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा में नाम कटवाने के फर्जी आपत्तियां दर्ज करने का मामला सामने आया है। कोटरा सुल्तानाबाद के लीलाधर के नाम से सूची से नाम काटने 7 आपत्तियां दी गई हैं। लीलाधर ने ऐसी किसी भी आपत्ति से इंकार किया है। विदिशा जिले के गंज बासौदा में वार्ड नंबर 23 में चार लोगों के नाम से 78 आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। बीएलओ इन फर्जी शिकायतों का शिकार बन रहे हैं। प्रदेश में ऐसी शिकायतों ने निर्वाचन कार्यालय और बीएलओ का काम बढ़ा दिया है।

दूसरे नामों से की जा रही शिकायत

फर्जी आपत्तियों में तकनीकी गड़बड़ियां भी सामने आई हैं। एक मामले में फॉर्म-7 में आपत्तिकर्ता का नाम अलग दर्ज है। इस फार्म पर दर्ज मोबाइल नंबर किसी और का है। दक्षिण-पश्चिम विधानसभा में विकास सिंह के नाम से दर्ज आपत्ति में मोबाइल नंबर एक राजनीतिक दल क कार्यकर्ता का है। भोपाल की सात विधानसभाओं में नाम काटने 10 हजार 143 फार्म-7 प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा नए नाम जोड़ने 80 हजार 892 फार्म-6, नाम में संशोधन के लिए 47 हजार 493 फार्म-8 जमा हुए हैं।

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बाल विवाह, अधिक संतान पर नोटिस

मतदाता सूची के पुनरीक्षण के आखिरी दौर में मुश्किलें बनी हुई हैं। आपत्तियां ही नहीं निर्वाचन कार्यालय के नोटिस भी पेचिदगी बढ़ा रहे हैं। 20 साल के मतदाता से मां और उसकी उम्र में कम अंतर पर नोटिस जारी हो रहे हैं।

यहीं नहीं नाबालिग अवस्था में विवाह पर भी जबाव तलब किया गया है। विदिशा में वार्ड 4 की मतदाता रामसखी अहिरवार से माता-पिता की 6 से ज्यादा संतान होने पर जवाब मांगा गया है।

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बीएलओ के बाहरी होने की शिकायत

गंजबासौदा के वार्ड 8 की मतदाता सूची में बीएलओ सबा परवीन के नाम पर आपत्ति मिली है। शिकायतकर्ता ने बीएलओ को बाहरी बताकर सूची से नाम काटने की मांग की है। जांच में यह आपत्ति फर्जी पाई गई है।

बीएलओ सबा परवीन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं और वार्ड की स्थायी निवासी हैं। वार्ड 23 में चार अलग नाम से 78 लोगों को मतदाता सूची से बाहर करने शिकायत की गई है। बीएलओ ने हर मतदाता के घर जाकर सत्यापन किया तो यह शिकायत भी गलत पाई गईं।

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अधिकारिक आंकड़ों में भी अंतर

समाजवादी जनपरिषद के राष्ट्रीय सदस्य अनुराग मोदी का ने वेबसाइट और कार्यालयों के आंकड़ों पर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि नाम काटने फार्म 7 निर्धारित है। निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट और जिला कार्यालयों में फार्म 7 के आंकड़ों में अंतर है।

राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते निर्वाचन अधिकारी और बीएलओ निष्पक्ष जांच नहीं कर रहे हैं। 22 जनवरी तक प्रदेश में राजनैतिक दलों ने 7,929 और आम मतदाताओं ने कुल 95 हजार 210 आपत्तियां दर्ज की हैं। पूरे प्रदेश में एसआईआर की मैपिंग के बाद कुल 1 लाख तीन हजार से ज्यादा आपत्ति आई हैं।

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