पंडित धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट केस, HC से अपील खारिज
Rahul Garhwal | Feb 06, 2024, 01:02 IST
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
बागेश्वर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया की अपील खारिज कर दी है। अपील करने वालों में फेसबुक-मेटा, एक्स और यू-ट्यूब शामिल थे।
BHOPAL. बागेश्वर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Pandit Dhirendra Krishna Shastri) के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया की अपील खारिज कर दी है। अपील करने वालों में फेसबुक-मेटा, एक्स और यू-ट्यूब शामिल थे। जस्टिस न्यायाधीश रवि मलिमठ और न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की पीठ ने इस मामले में आदेश दिया।
याचिकाकर्ता रंजीत सिंह पटेल की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि फेसबुक-मेटा, एक्स व यू-ट्यूब आदि बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ अनर्गल पोस्ट की वजह से कठघरे में हैं। इसलिए याचिका के जरिए आपत्तिजनक पोस्ट डिलीट किए जाने की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने पोस्ट हटाने के निर्देश दिए थे।
मामले में फेसबुक-मेटा, एक्स और यू-ट्यूब ने हाईकोर्ट में अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि उनके प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल पोर्टल हैं, जिस पर कई लोग पोस्ट करते हैं। पोस्ट पर उनका कोई नियंत्रण नहीं हैं। इसलिए अनुचित पोस्ट करने वाले व्यक्ति विशेष के खिलाफ केस दायर किया जाना चाहिए और उन्हें इस मामले से मुक्त रखना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट का कहना है कि वे ये कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
क्या था मामला ?
याचिकाकर्ता रंजीत सिंह पटेल की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि फेसबुक-मेटा, एक्स व यू-ट्यूब आदि बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ अनर्गल पोस्ट की वजह से कठघरे में हैं। इसलिए याचिका के जरिए आपत्तिजनक पोस्ट डिलीट किए जाने की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने पोस्ट हटाने के निर्देश दिए थे।
फेसबुक-मेटा, एक्स और यू-ट्यूब ने की अपील
मामले में फेसबुक-मेटा, एक्स और यू-ट्यूब ने हाईकोर्ट में अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि उनके प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल पोर्टल हैं, जिस पर कई लोग पोस्ट करते हैं। पोस्ट पर उनका कोई नियंत्रण नहीं हैं। इसलिए अनुचित पोस्ट करने वाले व्यक्ति विशेष के खिलाफ केस दायर किया जाना चाहिए और उन्हें इस मामले से मुक्त रखना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट का कहना है कि वे ये कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
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