उज्जैन में सोमयज्ञ: कितने प्रतिशत होगी बारिश? साइंटिस्ट कर रहे अध्ययन
Sandeep Kumar | Apr 26, 2025, 16:45 IST
somyagya-effect
उज्जैन में आयोजित हो रहे सोमयज्ञ के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम वहां पहुंची है। उनका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद बारिश की संभावना में कितना इजाफा होता है।
MP NEWS: उज्जैन ( ujjain ) के महाकाल मंदिर के आंगन में इन दिनों सोमयज्ञ (Somayagya ) चल रहा है। बताया जा रहा है कि अधिक बारिश के लिए ये सोमयज्ञ किया जा रहा है। Somayagya के बाद बारिश की संभावना कितनी बढ़ सकती है, इसे जानने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IITM),पुणे के वैज्ञानिकों की टीम ने मोर्चा संभाला है। टीम विभिन्न यंत्रों की मदद से हवा का दबाव, आर्द्रता, तापमान और गैसों की स्थिति को रिकॉर्ड कर रही है।
बताया जा रहा है कि सोमयज्ञ से वायुमंडल में उपस्थित कणों पर नमी जमा हो जाती है, जो बारिश की बूंदों का निर्माण करते हैं। यह प्रक्रिया वायुमंडल में बारिश के अनुकूल परिवर्तन लाती है। बादलों की प्रकृति भी जांची जा रही है कि वे पानी खींचने वाले कणों से बने हैं या नहीं।
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हवा में बारिश योग्य कणों की संख्या पता करने के लिए विशेष यंत्र लगाए गए हैं। साथ ही, वायुमंडलीय गैसों जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और मीथेन (CH4) की मौजूदा स्थिति भी दर्ज की जा रही है। वैज्ञानिक डॉ. सचिन के. फिलिप और स्टेनी बेनी के नेतृत्व में यह छह दिन का अनुसंधान कार्यक्रम संचालित हो रहा है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डब्बावाला के अनुसार, सोमयज्ञ एक प्राचीन वैदिक अनुष्ठान है। इसे विशेष रूप से अधिक वर्षा की कामना के लिए किया जाता है। यह अनुष्ठान त्रेतायुग और द्वापरयुग के काल से चला आ रहा है। पहले राजा-महाराजा अपने राज्य में सुखद और पर्याप्त वर्षा के लिए इसका आयोजन करते थे।
यह केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि प्रकृति से संतुलन स्थापित करने का एक गूढ़ वैज्ञानिक तरीका भी माना गया है। इस यज्ञ की सबसे विशिष्ट विशेषता सोमवल्ली नामक विशेष वनस्पति से तैयार होने वाला सोमरस है। इस रस को शुद्ध देसी गाय के घी में मिलाकर अग्नि में आहुति दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि यह आहुति वातावरण में विशेष प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न करती है, जिससे वायुमंडल में नमी और संतुलन का निर्माण होता है, जो वर्षा की संभावना को बढ़ा सकता है।
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सोमयज्ञ का वैज्ञानिक आधार
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बादल की दो प्रकृति होती है
- पानी को शिथिल करने वाले कण
- पानी को खींचने वाले कण
विशेष यंत्रों से हो रही निगरानी
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क्या है सोमयज्ञ
यह केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि प्रकृति से संतुलन स्थापित करने का एक गूढ़ वैज्ञानिक तरीका भी माना गया है। इस यज्ञ की सबसे विशिष्ट विशेषता सोमवल्ली नामक विशेष वनस्पति से तैयार होने वाला सोमरस है। इस रस को शुद्ध देसी गाय के घी में मिलाकर अग्नि में आहुति दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि यह आहुति वातावरण में विशेष प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न करती है, जिससे वायुमंडल में नमी और संतुलन का निर्माण होता है, जो वर्षा की संभावना को बढ़ा सकता है।
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FAQ
- उज्जैन में सोमयज्ञ क्यों किया जा रहा है?
उज्जैन में सोमयज्ञ उत्तम बारिश के लिए किया जा रहा है। वैज्ञानिक इसकी प्रक्रिया और प्रभावों का गहन अध्ययन कर रहे हैं। - सोमयज्ञ से बारिश की संभावना कैसे बढ़ती है?
सोमयज्ञ के दौरान निकली गैसें और वातावरण में बने कण नमी को आकर्षित करते हैं, जिससे बादल वर्षा करने में सहायक होते हैं। - वैज्ञानिक किस प्रकार से सोमयज्ञ के प्रभाव को माप रहे हैं?
वैज्ञानिक विशेष यंत्रों से हवा का दबाव, आर्द्रता, तापमान और गैसों की मात्रा माप रहे हैं ताकि सोमयज्ञ के बाद वर्षा की संभावना का अनुमान लगाया जा सके।
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